यूपी में अब 'कुर्मी मुख्यमंत्री' की मांग! महापंचायत में खाली रखी गई CM की कुर्सी, लेकिन बड़े दलों का कोई प्रमुख नेता नहीं पहुँचा

विधानसभा चुनाव से पहले लखनऊ की महापंचायत में मुख्यमंत्री पद पर प्रतिनिधित्व का सवाल उठा। अनुप्रिया और पल्लवी पटेल जैसे नेताओं को एक मंच पर लाने की पहल, अब आयोजकों ने समर्थन जुटाने का अभियान आगे बढ़ाया।

लखनऊ में कुर्मी मुख्यमंत्री की मांग को लेकर महापंचायत हुई। मंच पर खाली कुर्सी रखी गई, जबकि बड़े दलों का कोई प्रमुख प्रतिनिधि नहीं पहुँचा। जानिए प्रस्ताव और आगे की योजना।

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लखनऊ के विश्वेश्वरैया सभागार में आयोजित कुर्मी महापंचायत में मुख्यमंत्री पद की मांग उठाते हुए मंच पर सवालिया निशान वाली खाली कुर्सी रखी गई।
लखनऊ | 4 नवंबर 2026 | प्रत्यक्षदर्शी समाचार
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लखनऊ के विश्वेश्वरैया सभागार में आयोजित कुर्मी महापंचायत में मुख्यमंत्री पद की मांग उठाते हुए मंच पर सवालिया निशान वाली खाली कुर्सी रखी गई।
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले मुख्यमंत्री पद को लेकर एक नई राजनीतिक मांग सामने आई है। लखनऊ में आयोजित कुर्मी महापंचायत में मुख्यमंत्री की एक कुर्सी खाली रखी गई और उस पर सवालिया निशान लगाया गया। आयोजकों ने इस प्रतीक के जरिए पूछा कि उत्तर प्रदेश में कुर्मी समाज से मुख्यमंत्री बनाने की मांग पर राजनीतिक दल क्या रुख अपनाएंगे। खास बात यह रही कि कार्यक्रम में प्रमुख राजनीतिक दलों का कोई बड़ा प्रतिनिधि शामिल नहीं हुआ।

खबर में खास

  • लखनऊ में 2 नवंबर को कुर्मी मुख्यमंत्री अभियान समिति की महापंचायत हुई।
  • मंच पर सवालिया निशान वाली खाली कुर्सी रखी गई।
  • अलग-अलग राजनीतिक दलों में सक्रिय नेताओं को एक मंच पर लाने का प्रस्ताव रखा गया।
  • अब आयोजक महापंचायत के प्रस्तावों पर लोगों की राय और समर्थन जुटा रहे हैं।
  • किसी मुख्यमंत्री उम्मीदवार के नाम पर अंतिम सहमति नहीं हुई है।

मुख्यमंत्री की कुर्सी खाली क्यों रखी गई?

दो नवंबर को लखनऊ के लोक निर्माण विभाग स्थित विश्वेश्वरैया सभागार में कुर्मी मुख्यमंत्री अभियान समिति ने महापंचायत आयोजित की।
कार्यक्रम में प्रदेश के अलग-अलग जिलों से लोग पहुँचे। मंच पर मुख्यमंत्री पद के लिए एक खाली कुर्सी रखी गई, जिस पर प्रश्नचिह्न लगा था।
आयोजकों ने इस व्यवस्था के माध्यम से मुख्यमंत्री पद पर सामाजिक प्रतिनिधित्व का सवाल उठाया।
वक्ताओं ने कहा कि समाज के मुद्दों को सरकार तक प्रभावी तरीके से पहुँचाने के लिए राजनीतिक नेतृत्व और भागीदारी महत्वपूर्ण है।

BJP और सपा के बड़े नेता क्यों नहीं पहुँचे?

चार नवंबर को प्रकाशित  महापंचायत में किसी प्रमुख राजनीतिक दल का प्रतिनिधि शामिल नहीं हुआ।
हालांकि, आयोजकों की ओर से अलग-अलग दलों के नेताओं को एक मंच पर लाने की कोशिश पहले से की जा रही थी।
किसी विशेष नेता के कार्यक्रम में नहीं आने की आधिकारिक वजह सार्वजनिक नहीं हुई है। इसलिए इसे किसी पार्टी का औपचारिक बहिष्कार या विरोध मानना उचित नहीं होगा।

अनुप्रिया पटेल और पल्लवी पटेल का नाम क्यों आया?

उत्तर प्रदेश में कुर्मी समाज से जुड़े कई नेता अलग-अलग दलों में सक्रिय हैं।
इनमें केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल और अपना दल (कमेरावादी) की नेता पल्लवी पटेल प्रमुख हैं।
कार्यक्रम से पहले इन नेताओं सहित अन्य प्रतिनिधियों को एक मंच पर लाने की अपील की गई थी।
महापंचायत से संबंधित रिपोर्टों में उनके नामों पर चर्चा का उल्लेख है, लेकिन किसी एक नेता को मुख्यमंत्री पद का आधिकारिक उम्मीदवार घोषित नहीं किया गया है।

महापंचायत में कौन-से प्रस्ताव रखे गए?

आयोजकों ने राजनीतिक प्रतिनिधित्व बढ़ाने, विभिन्न दलों के नेताओं के बीच संवाद स्थापित करने और साझा मुद्दों पर सामाजिक संगठनों को एक मंच देने की बात कही।
समिति ने प्रस्तावों पर रायशुमारी की प्रक्रिया भी शुरू की है।
आयोजकों ने लोगों की प्रतिक्रिया प्राप्त करने के लिए मिस्ड कॉल का विकल्प और अभियान संबंधी पोस्टर जारी किए हैं।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि शबनम लता ने भी मुख्यमंत्री पद पर प्रतिनिधित्व की मांग का समर्थन किया।

क्या इस मांग से 2027 का राजनीतिक समीकरण बदलेगा?

फिलहाल यह एक संगठन द्वारा उठाई गई राजनीतिक मांग है। इसके समर्थन का वास्तविक दायरा या सभी कुर्मी मतदाताओं का रुख निर्धारित करने वाला कोई प्रमाणित सर्वे उपलब्ध नहीं है।
संविधान के अनुच्छेद 164 के अनुसार मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल करते हैं और सरकार को विधानसभा के प्रति जवाबदेह रहना होता है।
इसलिए महापंचायत में उठी मांग अपने आप किसी मुख्यमंत्री उम्मीदवार के चयन या चुनावी गठबंधन का फैसला नहीं है।
अब महत्वपूर्ण सवाल यह है कि राजनीतिक दल इस मांग पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं और आयोजक अपने प्रस्तावों को आगे किस रूप में ले जाते हैं।

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