चुनाव हारे कांग्रेस नेता को मिली सरकारी कुर्सी, BJP विधायक कोर्ट पहुँचे! हाईकोर्ट ने समिति रद्द कर सरकार को सुनाई खरी-खरी
कर्नाटक में 2023 का चुनाव हारने वाले कांग्रेस नेता को सरकारी भूमि समिति का अध्यक्ष बनाया गया। भाजपा विधायक की याचिका पर हाईकोर्ट ने अधिसूचना रद्द की और नियुक्तियों के लिए स्पष्ट नियम बनाने का आदेश दिया।
कर्नाटक में चुनाव हारे कांग्रेस नेता गोपाल पुजारी की अध्यक्षता वाली सरकारी समिति की अधिसूचना हाईकोर्ट ने रद्द की। BJP विधायक की याचिका पर अदालत ने नियुक्ति के नियम बनाने को कहा।
बेंगलुरु | 4 नवंबर 2026 | प्रत्यक्षदर्शी समाचार
कर्नाटक हाईकोर्ट ने चुनाव हारे कांग्रेस नेता की अध्यक्षता में बनाई गई अतिरिक्त भूमि नियमितीकरण समिति की अधिसूचना रद्द कर दी।
कर्नाटक में चुनाव हारने के बाद कांग्रेस नेता को सरकारी समिति का अध्यक्ष बनाए जाने पर हाईकोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणी सामने आई है। अदालत ने बिंदूर विधानसभा क्षेत्र में बनाई गई अतिरिक्त भूमि नियमितीकरण समिति की अधिसूचना रद्द कर दी है। यह समिति उस कांग्रेस नेता की अध्यक्षता में बनाई गई थी, जो 2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा उम्मीदवार से हार गए थे। अदालत ने कहा कि सार्वजनिक पद राजनीतिक वफादारी का इनाम या चुनावी हार की भरपाई करने का साधन नहीं होना चाहिए।
खबर में खास
2023 का विधानसभा चुनाव हारे कांग्रेस नेता के. गोपाल पुजारी को सरकारी समिति का अध्यक्ष बनाया गया।
उसी सीट से जीते भाजपा विधायक गुरुराज गंटिहोले ने अदालत में नियुक्ति को चुनौती दी।
हाईकोर्ट ने 2023 की दो सरकारी अधिसूचनाएँ रद्द कर दीं।
अदालत ने नियुक्तियों के लिए पारदर्शी दिशानिर्देश बनाने का आदेश दिया।
चुनाव में हारने के बाद कैसे मिली सरकारी जिम्मेदारी?
कर्नाटक की बिंदूर विधानसभा सीट पर 2023 में भाजपा उम्मीदवार गुरुराज गंटिहोले और कांग्रेस नेता के. गोपाल पुजारी के बीच मुकाबला हुआ था।
चुनाव में गुरुराज गंटिहोले जीते। नवंबर 2023 में उन्हें भूमि नियमितीकरण से संबंधित समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया।
लेकिन इसके लगभग एक महीने बाद राज्य सरकार ने उसी क्षेत्र में एक अतिरिक्त समिति बनाने की अधिसूचना जारी की।
इस नई समिति की अध्यक्षता चुनाव हारने वाले कांग्रेस नेता गोपाल पुजारी को सौंप दी गई।
कांग्रेस नेता ने खुद अपने नाम की सिफारिश की थी?
अदालत के सामने आए दस्तावेजों के अनुसार, गोपाल पुजारी ने तत्कालीन राजस्व मंत्री को पत्र लिखकर अतिरिक्त समिति बनाने का अनुरोध किया था।
पत्र में उन्होंने खुद को अध्यक्ष और तीन अन्य व्यक्तियों को समिति का सदस्य बनाने की सिफारिश की थी।
बाद में एक अन्य मंत्री ने भी इसी तरह की सिफारिश की। सरकार ने जिस समिति का गठन किया, उसमें उन्हीं नामों को शामिल किया गया था।
BJP विधायक कोर्ट क्यों पहुँचे?
भाजपा विधायक गुरुराज गंटिहोले ने अतिरिक्त समिति बनाने के सरकार के निर्णय को चुनौती दी।
उनका तर्क था कि नई समिति की वास्तविक प्रशासनिक आवश्यकता स्पष्ट नहीं की गई और इस व्यवस्था से निर्वाचित विधायक की समिति का अधिकार प्रभावित हुआ।
राज्य सरकार ने जवाब दिया कि बड़ी संख्या में लंबित भूमि आवेदनों का निस्तारण करने के लिए अतिरिक्त समिति जरूरी थी।
गोपाल पुजारी का पक्ष था कि चुनाव हार जाना किसी व्यक्ति को ऐसी समिति का अध्यक्ष बनने से अपने आप अयोग्य नहीं बनाता।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
दो नवंबर को न्यायमूर्ति डी.के. सिंह और न्यायमूर्ति एच. शांति भूषण की पीठ ने फैसला सुनाया।
अदालत ने पाया कि दिसंबर 2023 में अतिरिक्त समिति बनाते समय सरकार के रिकॉर्ड में उसकी आवश्यकता के समर्थन में पर्याप्त प्रासंगिक सामग्री नहीं थी।
सरकार ने 2026 में दाखिल हलफनामे से लंबित आवेदनों का विवरण दिया था। अदालत के अनुसार, बाद में प्रस्तुत जानकारी से तीन साल पुराने सरकारी निर्णय की मूल वैधता सिद्ध नहीं की जा सकती।
अदालत ने टिप्पणी की कि सरकारी पद जनता की सेवा के लिए हैं। उन्हें राजनीतिक हार की भरपाई या किसी नेता को दोबारा अधिकार दिलाने का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए।
सरकार को अब क्या करना होगा?
हाईकोर्ट ने 4 और 26 दिसंबर 2023 की संबंधित अधिसूचनाएँ रद्द कर दीं।
साथ ही राज्य सरकार को अतिरिक्त समितियों के अध्यक्षों की नियुक्ति के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश बनाने का आदेश दिया।
इनमें प्रशासनिक क्षमता, अनुभव, ईमानदारी और आचरण जैसे मानदंड शामिल करने को कहा गया है।
अदालत ने यह नहीं कहा कि चुनाव हारने वाला कोई व्यक्ति कभी सरकारी समिति का अध्यक्ष नहीं बन सकता। निर्णय का आधार समिति बनाने की कानूनी प्रक्रिया और पर्याप्त प्रशासनिक औचित्य का अभाव था।
यह फैसला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सरकारी नियुक्तियों में राजनीतिक सिफारिश और वास्तविक प्रशासनिक आवश्यकता के बीच अंतर स्पष्ट करता है।