UP में फिर 10 MLC सीटों पर चुनाव की तैयारी! BJP-सपा के विधायकों की होगी परीक्षा, तीसरी सीट के लिए अखिलेश को क्यों चाहिए 8 और वोट?

यूपी में विधान परिषद की 10 सीटों का कार्यकाल जनवरी में खत्म होगा। दिसंबर में चुनाव की संभावना है। भाजपा और सपा के सामने विधायकों को एकजुट रखने की चुनौती होगी।

UP MLC Election 2026: यूपी में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले विधान परिषद की 10 और सीटों पर चुनाव की संभावना है। भाजपा गठबंधन के पास 291 और सपा के पास 101 विधायक हैं। जानिए तीसरी सीट के लिए सपा को अतिरिक्त वोट क्यों चाहिए और क्रॉस वोटिंग का क्या असर हो सकता है।

प्रत्यक्षदर्शी समाचार | लखनऊ | 30 अक्टूबर 2026
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जनवरी 2027 में यूपी विधान परिषद की 10 सीटों का कार्यकाल समाप्त होगा। इन सीटों के चुनाव का कार्यक्रम अभी घोषित नहीं हुआ है।

खबर में खास

  • यूपी विधान परिषद की 10 और सीटों पर चुनाव की तैयारी को लेकर नई रिपोर्ट।
  • इन सीटों के मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल 30 जनवरी 2027 को समाप्त होगा।

  • नवंबर में चुनाव कार्यक्रम और दिसंबर में मतदान होने की संभावना जताई गई है; आधिकारिक तारीख अभी घोषित नहीं।

  • भाजपा के 255 और समाजवादी पार्टी के 101 विधायक बताए गए हैं।

  • सपा को तीसरी सीट के लिए कांग्रेस के दो विधायकों के समर्थन के बावजूद अतिरिक्त मतों की जरूरत पड़ सकती है।

  • 2024 के राज्यसभा चुनाव में हुई क्रॉस वोटिंग का राजनीतिक संदर्भ भी महत्वपूर्ण है।
उत्तर प्रदेश में अभी विधान परिषद की 11 शिक्षक और स्नातक सीटों के चुनाव का राजनीतिक माहौल शांत भी नहीं हुआ है कि अब 10 अन्य सीटों को लेकर नया चुनावी गणित सामने आया है। ये सीटें विधानसभा सदस्यों द्वारा चुने जाने वाले विधान परिषद सदस्यों की हैं, जिनका कार्यकाल 30 जनवरी 2027 को समाप्त होने वाला है।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार की शुक्रवार, 30 अक्टूबर को सुबह 5:30 बजे प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, इन 10 सीटों के लिए नवंबर में चुनाव कार्यक्रम घोषित होने और दिसंबर में मतदान कराए जाने की संभावना है।
हालांकि, निर्वाचन आयोग ने अभी इस प्रस्तावित चुनाव की आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की है।
यह चुनाव 2027 विधानसभा चुनाव से पहले होगा और इसमें आम मतदाताओं के बजाय विधायक मतदान करेंगे। इसलिए भाजपा और सपा, दोनों के लिए उम्मीदवार चयन तथा विधायकों के समर्थन का सवाल महत्वपूर्ण होगा।

भाजपा के पास कितने विधायक, सपा के पास कितनी ताकत?

रिपोर्ट में दिए गए मौजूदा विधानसभा संख्या बल के अनुसार भाजपा के पास 255 विधायक हैं। सहयोगी दलों को मिलाकर भाजपा गठबंधन की संख्या 291 बताई गई है।

वहीं समाजवादी पार्टी के पास 101 विधायक हैं। कांग्रेस के दो विधायक जोड़ने पर दोनों दलों का कुल संख्या बल 103 हो जाता है।

इन 10 सीटों के चुनाव में 37 प्रथम वरीयता मतों का अनुमानित कोटा बताया जा रहा है। हालांकि, अंतिम कोटा वैध मतों की संख्या और निर्वाचन नियमों के अनुसार निर्धारित होगा।

विधानसभा का मौजूदा चुनावी गणित

भाजपा गठबंधन
291
विधायक

समाजवादी पार्टी

101

विधायक

कांग्रेस

2

विधायक

अनुमानित प्रथम वरीयता कोटा

37

मत प्रति सीट
30 अक्टूबर 2026। गठबंधन संख्या और दलवार संख्या को दोबारा जोड़कर नहीं देखना चाहिए।

तीसरी सीट के लिए अखिलेश यादव को 8 वोट और क्यों चाहिए?

यही इस संभावित चुनाव का महत्वपूर्ण गणित है।
यदि एक सीट के लिए प्रथम वरीयता का कोटा 37 वोट रहता है, तो तीन उम्मीदवारों को सीधे इस कोटे तक पहुंचाने के लिए कुल 111 मत चाहिए होंगे।
सपा के पास 101 विधायक हैं। कांग्रेस के दो विधायक जोड़ने के बाद भी कुल संख्या 103 होती है। इस हिसाब से तीन उम्मीदवारों के लिए जरूरी 111 के आंकड़े तक पहुंचने के लिए आठ अतिरिक्त मतों का अंतर रह जाता है।
यह केवल प्रथम वरीयता के अनुमानित कोटे पर आधारित गणना है। वास्तविक परिणाम अन्य उम्मीदवारों, वरीयता मतों के हस्तांतरण और कुल वैध मतदान पर भी निर्भर करेगा।

क्या फिर क्रॉस वोटिंग का मामला सामने आ सकता है?

इस चुनाव से पहले फरवरी 2024 में उत्तर प्रदेश के राज्यसभा चुनाव का घटनाक्रम महत्वपूर्ण है।
तब 10 राज्यसभा सीटों के चुनाव में भाजपा ने आठ और सपा ने दो सीटें जीती थीं। रिपोर्टों के अनुसार सपा के कम से कम सात विधायकों ने भाजपा उम्मीदवारों के पक्ष में क्रॉस वोटिंग की थी, जिससे सपा का तीसरा प्रत्याशी हार गया था।
हालांकि, 2024 की घटना के आधार पर आगामी विधान परिषद चुनाव में भी क्रॉस वोटिंग होने की भविष्यवाणी नहीं की जा सकती।
इस बार भी दलों को अपने उम्मीदवारों के लिए पर्याप्त वोट सुनिश्चित करने होंगे।

किन 10 नेताओं का कार्यकाल समाप्त होने वाला है?

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार इन 10 सीटों पर फिलहाल नौ सदस्य भाजपा और एक सदस्य समाजवादी पार्टी से हैं।
भाजपा के सदस्य
सपा के सदस्य
कुंवर मानवेन्द्र सिंह
राजेंद्र चौधरी
डॉ. धर्मेन्द्र सिंह
 
स्वतंत्र देव सिंह
 
अरविंद कुमार शर्मा
 
अश्विनी त्यागी
 
गोविंद नारायण शुक्ल
 
धर्मवीर प्रजापति
 
सलिल विश्नोई
 
डॉ. सुरेन्द्र चौधरी
 
यह वर्तमान सदस्यों की सूची है, नई उम्मीदवार सूची नहीं।

2027 विधानसभा चुनाव से पहले क्यों महत्वपूर्ण?

23 अक्टूबर को हुए शिक्षक-स्नातक विधान परिषद चुनाव में भाजपा ने छह और समाजवादी पार्टी ने पांच सीटें जीती थीं। उन नतीजों के बाद सपा की विधान परिषद में सदस्य संख्या 10 से बढ़कर 12 होने की रिपोर्ट है।
अब सामने आया प्रस्तावित चुनाव अलग प्रकृति का है। इसमें विधायकों को मतदान करना है और पार्टियों का विधानसभा में संख्या बल निर्णायक भूमिका निभाएगा।
पार्टी नेतृत्व के लिए उम्मीदवार चयन और चुनावी समन्वय के सवाल महत्वपूर्ण रहेंगे। फिलहाल किसी दल ने इन 10 सीटों के लिए अंतिम उम्मीदवार सूची घोषित नहीं की है।

अब किस घोषणा पर नजर रहेगी?

सबसे पहले निर्वाचन आयोग के औपचारिक चुनाव कार्यक्रम का इंतजार है। उसके बाद भाजपा, सपा और अन्य दलों की प्रत्याशी सूची, नामांकन तथा वास्तविक मतदान व्यवस्था स्पष्ट होगी।
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि जनवरी में 10 विधान परिषद सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है और इनके चुनाव को लेकर दिसंबर की संभावना सामने आई है। इसे अभी घोषित चुनाव कार्यक्रम नहीं माना जाना चाहिए।

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