लखनऊ में 'बॉयकॉट सपा' के पोस्टर! स्वामी प्रसाद मौर्य और चंद्रशेखर के नाम पर PDA से सवाल, आखिर किसने लगवाए?

यूपी विधानसभा चुनाव 2027 से पहले राजधानी में समाजवादी पार्टी के विरोध वाले बैनर लगे। स्वामी प्रसाद मौर्य से विवाद के बाद मौर्य, शाक्य, सैनी और कुशवाहा समाज के नाम पर उठे सवाल; पोस्टर लगाने वालों की पहचान स्पष्ट नहीं।

लखनऊ में समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव के खिलाफ बॉयकॉट पोस्टर लगाए गए हैं। स्वामी प्रसाद मौर्य और चंद्रशेखर आजाद के नाम पर PDA को लेकर सवाल उठाए गए। जानिए पूरा विवाद।

लखनऊ | 4 नवंबर 2026 | प्रत्यक्षदर्शी समाचार
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लखनऊ में समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव के खिलाफ लगाए गए बहिष्कार वाले पोस्टर। इनमें स्वामी प्रसाद मौर्य के नाम पर विरोध और PDA की राजनीति को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बुधवार को समाजवादी पार्टी के खिलाफ लगाए गए पोस्टरों ने नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। शहर के अलग-अलग इलाकों में दिखाई दिए बैनरों पर सपा और उसके अध्यक्ष अखिलेश यादव के बहिष्कार की अपील लिखी है। इनमें पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य के कथित अपमान और समाजवादी पार्टी के PDA नारे पर सवाल उठाए गए हैं। कुछ पोस्टरों में नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद का नाम भी शामिल है।

खबर में खास

  • लखनऊ के प्रमुख इलाकों में सपा के बहिष्कार वाले बैनर दिखाई दिए।
  • पोस्टरों पर स्वामी प्रसाद मौर्य के अपमान का आरोप लगाया गया।
  • मौर्य, शाक्य, सैनी और कुशवाहा समाज के नाम से विरोध जताया गया।
  • कुछ होर्डिंग में चंद्रशेखर आजाद का नाम और तस्वीर भी शामिल है।
  • पोस्टर लगाने वालों की आधिकारिक पहचान सामने नहीं आई है।

लखनऊ में लगे पोस्टरों पर आखिर लिखा क्या है?

लाइव हिंदुस्तान और नवभारत टाइम्स की रिपोर्टों के मुताबिक, राजधानी के 1090 चौराहे और अन्य प्रमुख स्थानों पर बड़े पोस्टर तथा होर्डिंग दिखाई दिए हैं।
इनमें सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और स्वामी प्रसाद मौर्य की तस्वीरें लगी हैं। कुछ पोस्टरों पर अखिलेश की तस्वीर के ऊपर लाल क्रॉस का निशान भी बनाया गया है।
पोस्टरों के माध्यम से आरोप लगाया गया कि समाजवादी पार्टी के कुछ समर्थक स्वामी प्रसाद मौर्य और उनसे जुड़े सामाजिक वर्गों के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां कर रहे हैं।
एक होर्डिंग में सोशल मीडिया टिप्पणियों के स्क्रीनशॉट भी प्रदर्शित किए गए हैं। हालांकि उन सभी टिप्पणियों की प्रामाणिकता की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

स्वामी प्रसाद मौर्य को लेकर विवाद क्यों हुआ?

स्वामी प्रसाद मौर्य की कांग्रेस नेताओं के साथ बातचीत और विपक्षी INDIA गठबंधन में शामिल होने की इच्छा के बाद समाजवादी पार्टी से उनका विवाद बढ़ा था।
अखिलेश यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि मौर्य के लिए सपा की सीटों में जगह नहीं है। उन्होंने उन्हें नजरअंदाज करने की बात भी कही थी।
इसके जवाब में स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा था कि INDIA गठबंधन केवल समाजवादी पार्टी नहीं है। उनका तर्क था कि उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व से बातचीत की है और गठबंधन संबंधी फैसला किसी एक सहयोगी दल का नहीं हो सकता।
इस राजनीतिक बयानबाजी के बाद अब राजधानी में बहिष्कार वाले पोस्टर दिखाई दिए हैं।

PDA के नारे पर क्यों उठाए गए सवाल?

समाजवादी पार्टी अपने राजनीतिक अभियान में PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों के प्रतिनिधित्व पर जोर देती है।
लखनऊ में लगे पोस्टरों में इसी नारे का उल्लेख करते हुए सवाल उठाया गया है कि स्वामी प्रसाद मौर्य और चंद्रशेखर आजाद जैसे नेताओं को लेकर सपा का रवैया क्या है।
कुछ पोस्टरों पर मौर्य, शाक्य, सैनी और कुशवाहा समाज का नाम लिखा है।
हालांकि, किसी पोस्टर पर समुदाय का नाम लिखे होने से यह प्रमाणित नहीं होता कि उस पूरे समाज या उसके सभी संगठनों ने अभियान का समर्थन किया है।

आखिर पोस्टर किसने लगवाए?

यही इस खबर का महत्वपूर्ण अनुत्तरित सवाल है।
चार नवंबर तक उपलब्ध रिपोर्टों में पोस्टर लगवाने वाले व्यक्ति या संगठन की आधिकारिक पहचान स्पष्ट नहीं हुई है।
यह भी पुष्टि नहीं हुई है कि इस अभियान का स्वामी प्रसाद मौर्य या चंद्रशेखर आजाद से कोई प्रत्यक्ष संगठनात्मक संबंध है।
इसलिए पोस्टरों को दोनों नेताओं द्वारा चलाया गया अभियान बताना उचित नहीं होगा।

क्या सपा ने इस पर जवाब दिया?

अखिलेश यादव और स्वामी प्रसाद मौर्य के बीच पहले की बयानबाजी सार्वजनिक है। हालांकि, इन नए पोस्टरों पर समाजवादी पार्टी नेतृत्व की कोई विशिष्ट आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध रिपोर्टों में पुष्ट नहीं हुई है।
अब महत्वपूर्ण सवाल यह है कि पोस्टर लगाने वालों की पहचान सामने आती है या नहीं और संबंधित राजनीतिक दल इस विवाद पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।
फिलहाल यह घटना 2027 विधानसभा चुनाव से पहले यूपी में राजनीतिक मतभेदों के पोस्टरों के जरिए सार्वजनिक होने का एक नया उदाहरण है।

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