UP Voter List: कांग्रेस के आरोपों के बाद चुनाव आयोग का एक्शन! पीलीभीत में 2 अधिकारी हटे, पूरे यूपी की वोटर लिस्ट की होगी जांच
पीलीभीत सदर की मतदाता सूची में गड़बड़ी मिलने के बाद मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने दो अधिकारियों को चुनावी कार्य से हटाने और जिम्मेदार लोगों पर कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए। सभी जिलों से दो दिन में जाँच रिपोर्ट मांगी गई है।
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यूपी की वोटर लिस्ट में गड़बड़ी के मामले में बड़ी कार्रवाई हुई है। पीलीभीत में दो अधिकारियों को चुनावी कार्य से हटाया गया और पूरे प्रदेश की विधानसभा मतदाता सूचियों की जाँच के आदेश दिए गए हैं।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | लखनऊ | 22 अक्टूबर 2026
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों का मामला अब प्रशासनिक कार्रवाई तक पहुँच गया है। पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र में हजारों मतदाताओं की जानकारी बदलने के कांग्रेस के आरोपों के बाद राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
पीलीभीत के निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) और संबंधित वोटर रजिस्ट्रेशन सेंटर (VRC) ऑपरेटर को तत्काल प्रभाव से मतदाता सूची संबंधी कार्यों से हटा दिया गया है। इसके अलावा सभी जिलों के निर्वाचन अधिकारियों को अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों की मतदाता सूचियाँ जाँचकर दो दिन के भीतर रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है।
खबर में खास
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पीलीभीत सदर में दो अधिकारियों को मतदाता सूची संबंधी काम से हटाया गया।
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जाँच में कुछ EPIC नंबरों पर दूसरे मतदाताओं की जानकारी दिखाई देने की पुष्टि।
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जिम्मेदार अधिकारियों पर कानूनी कार्रवाई के निर्देश।
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यूपी के सभी जिलों से दो दिन में मतदाता सूची की जाँच रिपोर्ट मांगी गई।
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कांग्रेस ने 13,150 नाम बदले जाने सहित कई गंभीर आरोप लगाए थे।
जाँच में क्या गड़बड़ी सामने आई?
पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में अनियमितताओं की शिकायत मिलने के बाद जिला निर्वाचन अधिकारी के माध्यम से प्राथमिक जाँच कराई गई।
जाँच में पाया गया कि कुछ मतदाताओं के मतदाता फोटो पहचान पत्र यानी EPIC नंबर ऑनलाइन सर्च करने पर दूसरे मतदाताओं का विवरण दिखाई दे रहा था।
इसी आधार पर मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को मतदाता सूची से जुड़े कार्य से हटाने और गलतियों को तत्काल सुधारने के निर्देश दिए।
अधिकारियों पर किस कानून के तहत कार्रवाई होगी?
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 32 और भारतीय न्याय संहिता के संबंधित प्रावधानों के तहत जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
संबंधित सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने के लिए भी विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है।
हालाँकि, कार्रवाई के निर्देश जारी होने का अर्थ यह नहीं है कि संबंधित अधिकारियों का अपराध अदालत में सिद्ध हो चुका है।
कांग्रेस ने क्या आरोप लगाए थे?
21 अक्टूबर को कांग्रेस के यूपी प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम और पार्टी प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने पीलीभीत सदर की मतदाता सूची को लेकर सवाल उठाए थे।
कांग्रेस ने दावा किया था कि जुलाई से सितंबर के बीच 13,150 मतदाताओं के नाम बदल दिए गए, जबकि उनके EPIC नंबर और क्रम संख्या पहले जैसे ही रहे।
पार्टी ने 804 मतदाताओं के नाम हटाए जाने और लगभग 2,600 गैर-निवासियों के नाम जोड़े जाने के भी आरोप लगाए थे। ये आँकड़े कांग्रेस के दावे हैं। प्राथमिक जाँच में मिली कुछ गड़बड़ियों को इन सभी आरोपों की अंतिम पुष्टि नहीं माना जा सकता
पूरे यूपी में जाँच का आदेश क्यों महत्वपूर्ण है?
इस मामले में नया घटनाक्रम केवल पीलीभीत तक सीमित नहीं है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने प्रदेश के सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को अपने जिलों की विधानसभा मतदाता सूचियों की समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं। उन्हें दो दिन में रिपोर्ट भेजनी होगी।
इससे यह जाँचा जा सकेगा कि पीलीभीत जैसी तकनीकी या डेटा संबंधी त्रुटियाँ अन्य विधानसभा क्षेत्रों में भी मौजूद हैं या नहीं।
फिलहाल दूसरे जिलों में ऐसी गड़बड़ियाँ मिलने की कोई व्यापक आधिकारिक पुष्टि इस कार्रवाई से नहीं होती।
2027 के विधानसभा चुनाव पर क्या असर?
