Manipur Violence: मणिपुर में फिर हिंसा, 4 लोगों की मौत! CM के कार्यक्रम के बाहर पुलिस से झड़प, खरगे ने मोदी-शाह से पूछे 3 सवाल

मणिपुर में अलग-अलग हमलों में 4 लोगों की मौत के बाद विरोध तेज हो गया। इंफाल में CM के कार्यक्रम के बाहर प्रदर्शन हुआ, जबकि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने PM मोदी और अमित शाह से 3 सवाल पूछे।

मणिपुर में ताजा हिंसा से चार लोगों की मौत के बाद राजनीतिक विवाद बढ़ गया है। मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के बाहर प्रदर्शन हुआ, जबकि मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह से तीन सवाल पूछे।

प्रत्यक्षदर्शी समाचार | नई दिल्ली/इंफाल | 22 अक्टूबर 2026
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मणिपुर में चार लोगों की हत्या के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार से शांति बहाली और पुनर्वास पर जवाब मांगा।
मणिपुर में लंबे समय से जारी जातीय तनाव के बीच एक बार फिर हिंसा और विरोध प्रदर्शनों ने राजनीतिक चिंता बढ़ा दी है। राज्य में 19 और 20 अक्टूबर को हुई अलग-अलग घटनाओं में चार लोगों की हत्या के बाद राजधानी इंफाल में प्रदर्शन हुए। बुधवार को मुख्यमंत्री वाई. खेमचंद सिंह के एक कार्यक्रम के बाहर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हो गई।
इस बीच कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मणिपुर में शांति बहाली के प्रयासों को लेकर जवाब मांगा है। उन्होंने आरोप लगाया कि लंबे समय के बाद भी सरकार राज्य में स्थायी शांति स्थापित नहीं कर पाई है।
खबर में खास
  • मणिपुर में दो अलग-अलग हमलों में चार नागरिकों की मौत।

  • तीन मैतेई लोगों की हत्या के मामले में तीन संदिग्ध गिरफ्तार।

  • मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के बाहर प्रदर्शनकारियों और पुलिस में झड़प।

  • तीन प्रदर्शनकारियों के मामूली रूप से घायल होने की खबर।

  • खरगे ने शांति समिति, पुनर्वास और जवाबदेही पर सवाल उठाए।

मणिपुर में फिर कैसे भड़की हिंसा?

19 अक्टूबर को इंफाल ईस्ट और कांगपोकपी की सीमा के पास नोंगसुम पहाड़ी क्षेत्र में लकड़ी इकट्ठा करने गए लोगों पर हथियारबंद हमलावरों ने गोलीबारी की थी। इस घटना में मैतेई समुदाय के तीन लोगों की मौत और तीन अन्य घायल हो गए।
अगले दिन कांगपोकपी जिले में बांस की कोपलें इकट्ठा करने गए कुकी-जो समुदाय के 45 वर्षीय व्यक्ति की भी गोली मारकर हत्या कर दी गई।
इन घटनाओं के बाद विभिन्न समुदायों में तनाव बढ़ा और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे।
मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के बाहर क्या हुआ?
21 अक्टूबर को इंफाल के खुमान लम्पक स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में मुख्यमंत्री वाई. खेमचंद सिंह और राज्य के गृह मंत्री गोविंदास कोंथौजम एक खेल आयोजन में शामिल थे।
इसी दौरान कुछ महिला प्रदर्शनकारियों ने परिसर की ओर बढ़ने का प्रयास किया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि नागरिकों की हत्या के बीच सरकार को कानून-व्यवस्था की स्थिति पर अधिक ध्यान देना चाहिए।
पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल किया। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, झड़प में तीन लोगों को मामूली चोटें आईं।
 
खरगे ने मोदी और अमित शाह से क्या पूछा?
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने 21 अक्टूबर को सोशल मीडिया पर बयान जारी कर केंद्र सरकार की भूमिका पर सवाल उठाए।
उन्होंने तीन प्रमुख मुद्दे उठाए—जून 2023 में बनाई गई शांति समिति की वर्तमान स्थिति, सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त न्यायमूर्ति गीता मित्तल समिति की सिफारिशों पर कार्रवाई और वर्षों से विस्थापित लोगों के पुनर्वास की प्रगति।
खरगे ने दावा किया कि मई 2023 से जारी हिंसा में 300 से अधिक लोगों की मौत हुई है और 24,530 लोग अब भी राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं।
ये आँकड़े कांग्रेस अध्यक्ष के बयान में दिए गए हैं। इन्हें सरकार के नए आधिकारिक आँकड़ों के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए।
सरकार और सुरक्षा एजेंसियों ने क्या कार्रवाई की?
मणिपुर पुलिस ने 19 अक्टूबर के हमले से जुड़े मामले में तीन संदिग्धों को गिरफ्तार किया है।
पुलिस के अनुसार, संयुक्त सुरक्षा अभियान में 12 हथियार, 1,095 कारतूस और विस्फोटक सामग्री भी बरामद की गई। जांच जारी है और अन्य संभावित आरोपियों की पहचान की जा रही है।
अधिकारियों ने लोगों से अफवाहों से बचने और शांति बनाए रखने की अपील की है।
तीन साल बाद भी शांति क्यों है बड़ा सवाल?
मणिपुर में मई 2023 से विभिन्न समुदायों के बीच हिंसा और विस्थापन की गंभीर समस्या बनी हुई है। केंद्र और राज्य की सुरक्षा एजेंसियां कार्रवाई कर रही हैं, लेकिन हाल की घटनाओं ने नागरिक सुरक्षा तथा स्थायी समाधान के सवाल फिर सामने ला दिए हैं।
कांग्रेस सरकार की जवाबदेही तय करने की मांग कर रही है। वहीं प्रशासन गिरफ्तारियों, तलाशी अभियानों और अतिरिक्त सुरक्षा उपायों के जरिए हालात नियंत्रित करने में जुटा है।
अब निगाहें इस बात पर हैं कि सरकार हिंसा रोकने, प्रभावित परिवारों को राहत देने और विस्थापितों की सुरक्षित वापसी के लिए आगे क्या ठोस कदम उठाती है।

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