UP Election 2027: 11 साल बाद BJP से कुशाग्र सागर का इस्तीफा! सपा विधायक की बढ़ती नजदीकियों के बीच बदायूं में सियासी हलचल

बदायूं की बिसौली सीट से पूर्व विधायक कुशाग्र सागर ने BJP की सदस्यता छोड़ दी। 11 साल बाद इस्तीफे में सम्मान न मिलने की पीड़ा जताई। अब उनके सपा में जाने की चर्चा है, लेकिन आधिकारिक घोषणा नहीं हुई।

UP Election 2027 से पहले बदायूं के पूर्व BJP विधायक कुशाग्र सागर ने पार्टी छोड़ दी। उन्होंने 11 साल बाद सम्मान और अपनापन न मिलने की बात कही। बिसौली सीट पर अब नए राजनीतिक समीकरणों की चर्चा है।

प्रत्यक्षदर्शी समाचार | बदायूं | 21 अक्टूबर 2026
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आंध्र प्रदेश के निकाय चुनाव में नामांकन संबंधी शिकायतों पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग और पुलिस को निर्देश दिए।
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले बदायूं की राजनीति में बड़ा बदलाव सामने आया है। जिले की बिसौली सुरक्षित विधानसभा सीट से भाजपा के पूर्व विधायक कुशाग्र सागर ने बुधवार को भारतीय जनता पार्टी की प्राथमिक सदस्यता और अपने सभी संगठनात्मक दायित्वों से इस्तीफा दे दिया। करीब 11 वर्षों तक भाजपा के साथ रहने वाले सागर ने फेसबुक पोस्ट के जरिए अपना फैसला सार्वजनिक किया और संगठन में अपेक्षित सम्मान तथा अपनापन न मिलने की बात कही।
उनका इस्तीफा ऐसे समय आया है, जब बिसौली से समाजवादी पार्टी के मौजूदा विधायक आशुतोष मौर्य की भाजपा नेताओं से बढ़ती नजदीकियों को लेकर राजनीतिक अटकलें चल रही हैं। हालांकि कुशाग्र सागर ने अपने इस्तीफे में किसी नेता को इस फैसले का जिम्मेदार नहीं बताया है।
खबर में खास
  • पूर्व BJP विधायक कुशाग्र सागर ने 21 अक्टूबर को पार्टी छोड़ी।
  • फेसबुक पोस्ट में 11 साल की सेवा और सम्मान न मिलने की पीड़ा जताई।

  • 2022 में सपा के आशुतोष मौर्य ने उन्हें करीब 1,834 वोटों से हराया था।

  • मौजूदा सपा विधायक की भाजपा से नजदीकियों को लेकर राजनीतिक चर्चा।

  • कुशाग्र के सपा में जाने की अटकलें, लेकिन कोई औपचारिक घोषणा नहीं।

11 साल बाद BJP छोड़ने की वजह क्या बताई?

कुशाग्र सागर ने अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा कि उन्होंने पार्टी को परिवार मानकर अपनी राजनीतिक यात्रा आगे बढ़ाई। व्यक्तिगत कठिनाइयों के बावजूद संगठन के लिए लगातार काम किया।
उन्होंने कहा कि लंबे समय तक निष्ठा से काम करने के बाद भी अपेक्षित सम्मान और अपनापन नहीं मिला। इससे उन्हें व्यक्तिगत रूप से पीड़ा पहुँची।
सागर ने पार्टी में मिले अवसरों और कार्यकर्ताओं के सहयोग के लिए आभार भी व्यक्त किया। उन्होंने अपने फैसले को आत्मसम्मान के साथ नई शुरुआत बताया।
उनकी पोस्ट में टिकट देने से इनकार या किसी खास नेता के कारण इस्तीफा देने का प्रत्यक्ष आरोप नहीं है।
2017 में विधायक बने, 2022 में मिली हार
कुशाग्र सागर 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के टिकट पर बिसौली सुरक्षित सीट से विधायक चुने गए थे। उस समय उनकी गिनती प्रदेश के युवा विधायकों में होती थी।
2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने उन्हें दोबारा उम्मीदवार बनाया, लेकिन इस बार समाजवादी पार्टी के आशुतोष मौर्य ने उन्हें करीब 1,834 मतों से हरा दिया।
इस हार के बाद बिसौली में भाजपा और सपा के बीच राजनीतिक समीकरण बदले। अब कुशाग्र का इस्तीफा सीट को फिर चर्चा में ले आया है।

सपा विधायक आशुतोष मौर्य की BJP से नजदीकी क्यों चर्चा में?

बिसौली के वर्तमान विधायक आशुतोष मौर्य समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुने गए थे।
2024 के राज्यसभा चुनाव में क्रॉस-वोटिंग के बाद उनकी भाजपा से नजदीकियों की चर्चा तेज हुई। हाल में भाजपा नेताओं के साथ उनकी गतिविधियों को भी संभावित दल-बदल से जोड़कर देखा जा रहा है।
मीडिया रिपोर्टों में आशंका जताई गई है कि भाजपा 2027 में मौर्य को उम्मीदवार बनाने पर विचार कर सकती है। लेकिन भाजपा ने अब तक ऐसी कोई आधिकारिक उम्मीदवार घोषणा नहीं की है।
क्या अब समाजवादी पार्टी में जाएंगे कुशाग्र सागर?
कुशाग्र सागर के भाजपा छोड़ने के बाद उनके समाजवादी पार्टी में शामिल होने की अटकलें तेज हो गई हैं।

राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि वह बिसौली की बदलती परिस्थितियों के कारण नया राजनीतिक विकल्प तलाश सकते हैं।

हालांकि बुधवार शाम तक कुशाग्र सागर ने अपनी अगली पार्टी के बारे में औपचारिक घोषणा नहीं की थी। समाजवादी पार्टी की ओर से भी उनके प्रवेश की पुष्टि सामने नहीं आई है।

इसलिए उनका सपा में शामिल होना फिलहाल संभावना है, तय घटना नहीं।

2027 से पहले बिसौली में क्या बदलेगा?

बिसौली विधानसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। यहाँ राजनीतिक दलों के उम्मीदवार चयन के साथ स्थानीय संगठन और मतदाताओं के बीच व्यक्तिगत जनाधार भी महत्वपूर्ण रहेगा।
यदि आने वाले दिनों में आशुतोष मौर्य भाजपा में शामिल होते हैं या कुशाग्र सागर किसी दूसरे दल का रुख करते हैं, तो इस सीट पर मुकाबले की तस्वीर बदल सकती है।
लेकिन फिलहाल दोनों संभावनाएँ राजनीतिक अटकलों के स्तर पर हैं।
प्रत्यक्षदर्शी का सवाल: क्या 2027 में भाजपा उम्मीदवार चुनते समय पुराने कार्यकर्ताओं की निष्ठा को प्राथमिकता देगी या चुनाव जीतने की संभावना को? बदायूं के इस इस्तीफे ने यही महत्वपूर्ण राजनीतिक सवाल सामने रखा है।

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