'वोट चोरी या कामचोरी?' राजनाथ सिंह का राहुल पर तंज, रायबरेली से बांग्लादेश तक क्या बोले?

लखनऊ में राजनाथ सिंह ने कांग्रेस पर चुनाव आयोग को कठपुतली बनाने का आरोप लगाया। राहुल गांधी से पूछा कि क्या वे सपा के बिना रायबरेली जीत सकते थे? CJP आंदोलन और बांग्लादेश की तर्ज पर सत्ता परिवर्तन की बात पर भी सवाल उठाए।

Rajnath Singh News: लखनऊ में राजनाथ सिंह ने राहुल गांधी से रायबरेली सीट पर सवाल किया। जानिए कांग्रेस, वोट चोरी, चुनाव आयोग और CJP आंदोलन पर क्या कहा।

प्रत्यक्षदर्शी समाचार | लखनऊ | 16 अक्टूबर 2026
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लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर सवाल उठाए।

खबर में खास

  • राजनाथ सिंह ने कांग्रेस की चुनावी हार पर 'वोट चोरी या कामचोरी' का सवाल उठाया।

  • राहुल गांधी से पूछा कि समाजवादी पार्टी के बिना क्या वे रायबरेली सीट जीत सकते थे?

  • कांग्रेस पर चुनाव आयोग का राजनीतिक इस्तेमाल करने का आरोप लगाया।

  • CJP आंदोलन और बांग्लादेश की तर्ज पर सत्ता परिवर्तन की बात को लेकर विपक्ष को घेरा।

राजनाथ सिंह का कांग्रेस पर हमला, राहुल गांधी से पूछा सवाल

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार, 16 अक्टूबर को कांग्रेस और राहुल गांधी पर कई सवाल उठाए। उन्होंने विपक्ष के वोट चोरी के आरोपों को लेकर कांग्रेस के चुनावी प्रदर्शन पर तंज कसा।
राजनाथ सिंह ने कहा कि कांग्रेस उत्तर प्रदेश में 37 वर्षों से सत्ता से बाहर है। उन्होंने सवाल उठाया कि इसकी वजह वोट चोरी है या कामचोरी?
रक्षा मंत्री ने राहुल गांधी की रायबरेली लोकसभा सीट का जिक्र करते हुए यह भी पूछा कि क्या समाजवादी पार्टी के समर्थन के बिना वे यह सीट जीत सकते थे?
उनके बयान ऐसे समय आए हैं, जब विपक्ष मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहा है।

'कांग्रेस ने चुनाव आयोग को कठपुतली बनाया था'

राजनाथ सिंह ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने सत्ता में रहते हुए चुनाव आयोग का राजनीतिक इस्तेमाल किया।
उन्होंने वर्ष 1993 में चुनाव आयोग में दो अतिरिक्त चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति का उदाहरण दिया।
रक्षा मंत्री ने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एन. गोपालस्वामी और पूर्व चुनाव आयुक्त नवीन चावला से जुड़े पुराने विवाद का भी उल्लेख किया।
उनका आरोप था कि कांग्रेस ने अतीत में संवैधानिक संस्थाओं को अपने राजनीतिक हितों के लिए इस्तेमाल किया और अब उन्हीं संस्थाओं की निष्पक्षता पर सवाल उठा रही है।
हालांकि, ये राजनाथ सिंह के राजनीतिक आरोप और ऐतिहासिक घटनाओं की उनकी व्याख्या हैं। वर्तमान चुनावी गड़बड़ी के आरोपों की सच्चाई का फैसला स्वतंत्र प्रमाण और कानूनी प्रक्रिया से होगा।

बांग्लादेश की तर्ज पर सत्ता परिवर्तन का आरोप

दिल्ली में CJP के नेतृत्व में चल रहे प्रदर्शनों को लेकर भी राजनाथ सिंह ने विपक्ष पर सवाल उठाए।
उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक नेता बांग्लादेश की घटनाओं से प्रेरित होकर भारत में सत्ता परिवर्तन करने की बात कर रहे हैं।
रक्षा मंत्री का दावा था कि कांग्रेस और उसके सहयोगी देश के युवाओं को रचनात्मक कार्यों के बजाय राजनीतिक टकराव में शामिल करने की कोशिश कर रहे हैं।
उन्होंने राहुल गांधी को अपनी राजनीतिक भूमिका पर आत्ममंथन करने की सलाह दी।
हालांकि, विपक्ष या प्रदर्शनकारी संगठनों की ओर से गैरकानूनी सत्ता परिवर्तन की साजिश होने का कोई स्वतंत्र प्रमाण इन बयानों से स्थापित नहीं होता।

प्रशांत भूषण ने सत्ता परिवर्तन पर क्या कहा था?

राजनाथ सिंह के बयान से एक दिन पहले, 15 अक्टूबर को वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में सत्ता परिवर्तन की इच्छा जताई थी।
उन्होंने कहा था कि लोकतंत्र में सरकार बदलने की मांग करना नागरिकों का अधिकार है।
प्रशांत भूषण ने यह भी तर्क दिया कि शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से सरकार के विरोध को आपराधिक साजिश नहीं माना जा सकता।
इसी पृष्ठभूमि में राजनाथ सिंह ने विरोध प्रदर्शनों और सत्ता परिवर्तन संबंधी बयानों की आलोचना की है।

गांधी नाम पर कांग्रेस को क्यों घेरा?

राजनाथ सिंह ने कांग्रेस के इतिहास का उल्लेख करते हुए 1975 के आपातकाल और अन्य विवादित घटनाओं का जिक्र किया।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने अपनी मौजूदा राजनीति के कारण गांधी नाम इस्तेमाल करने का नैतिक अधिकार खो दिया है।
यह उनका राजनीतिक आकलन है, कोई कानूनी निर्णय नहीं।
उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचा रहा है और युवाओं को राजनीतिक संघर्ष में उलझा रहा है।

चुनाव आयोग पर विपक्ष के आरोपों का क्या हुआ?

राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेता SIR प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और पात्र मतदाताओं के नाम हटाए जाने पर सवाल उठा रहे हैं।
15 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने SIR संबंधी याचिकाओं पर चुनाव आयोग से जवाब मांगा था।
नोटिस जारी होने का अर्थ आरोप सही साबित होना नहीं है। इसी तरह राजनीतिक बयानों से विपक्ष की किसी गैरकानूनी साजिश की पुष्टि भी नहीं होती।
फिलहाल राजनाथ सिंह की लखनऊ प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद कांग्रेस, राहुल गांधी और चुनाव आयोग को लेकर राजनीतिक बहस फिर तेज हुई है। अब महत्वपूर्ण बात यह होगी कि SIR संबंधी आरोपों पर चुनाव आयोग अदालत के सामने क्या जवाब रखता है।

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