Ladakh News: कार्यकाल पूरा होने से पहले कारगिल की निर्वाचित हिल काउंसिल भंग! अब अफसर संभालेंगे कमान, 21 नवंबर को चुनाव
लद्दाख प्रशासन ने 2023 में निर्वाचित कारगिल हिल काउंसिल भंग कर दी। नए जिलों के गठन और सदस्यों के इस्तीफे के बाद यह फैसला हुआ। 21 नवंबर को अलग से पंचायत चुनाव होंगे।
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लद्दाख में बड़ा प्रशासनिक बदलाव। कारगिल की निर्वाचित हिल काउंसिल भंग, अधिकार डिप्टी कमिश्नर को मिले। जानिए फैसले की वजह और नए चुनाव का पूरा कार्यक्रम।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | कारगिल/नई दिल्ली | 22 अक्टूबर 2026
लद्दाख में स्थानीय स्वशासन को लेकर बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक घटनाक्रम सामने आया है। केंद्रशासित प्रदेश के प्रशासन ने कारगिल की निर्वाचित स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद यानी LAHDC-Kargil को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया है।
यह परिषद वर्ष 2023 में चुनी गई थी और सामान्य परिस्थितियों में इसका पांच साल का कार्यकाल 2028 तक रहना था। लेकिन नए जिलों के गठन और परिषद के कई सदस्यों के इस्तीफे के बाद प्रशासन ने इसकी मौजूदा संरचना समाप्त करने का फैसला किया है।
इसके साथ ही लद्दाख में 21 नवंबर को पंचायत चुनाव कराने का कार्यक्रम भी घोषित किया गया है।
खबर में खास
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कारगिल की निर्वाचित हिल काउंसिल तत्काल प्रभाव से भंग।
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परिषद के मुख्य कार्यकारी पार्षद समेत 10 सदस्यों ने इस्तीफा दिया था।
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नए जिलों के गठन को प्रशासन ने फैसले का प्रमुख कारण बताया।
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फिलहाल डिप्टी कमिश्नर परिषद के प्रशासनिक अधिकार संभालेंगे।
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लद्दाख में 21 नवंबर को पंचायत चुनाव होंगे।
आखिर कारगिल हिल काउंसिल क्यों भंग हुई?
लद्दाख प्रशासन की ओर से 21 अक्टूबर को जारी आदेश में कहा गया कि केंद्रशासित प्रदेश में जिलों के पुनर्गठन के कारण पुरानी परिषद की क्षेत्रीय और प्रशासनिक संरचना अब उपयुक्त नहीं रह गई थी।
पहले कारगिल जिले में शामिल रहे द्रास, जांस्कर और संकू जैसे क्षेत्रों को नए जिलों के रूप में संगठित किया गया है।
इसके अतिरिक्त 20 अक्टूबर को परिषद के मुख्य कार्यकारी पार्षद, तीन कार्यकारी पार्षदों और छह अन्य पार्षदों ने इस्तीफा दे दिया था।
प्रशासन के अनुसार, बदली हुई परिस्थितियों में पुरानी परिषद को जारी रखना कानूनी और संगठनात्मक रूप से व्यावहारिक नहीं था।
अब किसके पास रहेंगे अधिकार?
परिषद भंग होने के बाद उसके अधिकार अस्थायी रूप से कारगिल के डिप्टी कमिश्नर और मुख्य कार्यकारी अधिकारी को सौंप दिए गए हैं।
प्रशासन ने कहा है कि यह व्यवस्था सार्वजनिक सेवाओं और विकास कार्यों को जारी रखने के लिए बनाई गई है।
नई स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषदों के गठन तक यही अंतरिम व्यवस्था लागू रहेगी।
इस बीच सवाल उठ रहा है कि निर्वाचित प्रतिनिधियों की जगह प्रशासनिक अधिकारियों के हाथ में स्थानीय फैसले कितने समय तक रहेंगे।
आठ जिलों में 100 निर्वाचित सीटों की योजना
लद्दाख प्रशासन ने आठ स्वायत्त हिल काउंसिलों के लिए कुल 100 निर्वाचित निर्वाचन क्षेत्रों की अधिसूचना जारी की है।
प्रस्तावित व्यवस्था में लेह के लिए 22, कारगिल के लिए 21, संकू के लिए 13 और चांगथांग के लिए 10 सीटें निर्धारित की गई हैं। नुब्रा, शाम और जांस्कर को नौ-नौ तथा द्रास को सात सीटें मिली हैं।
प्रशासन का कहना है कि नई व्यवस्था से अलग-अलग क्षेत्रों को स्थानीय स्तर पर प्रतिनिधित्व मिल सकेगा।
21 नवंबर को कौन-सा चुनाव होगा?
राज्य निर्वाचन आयोग ने लद्दाख में पंचायत चुनाव का कार्यक्रम घोषित किया है।
26 अक्टूबर को अधिसूचना जारी होगी। दो नवंबर तक नामांकन किया जा सकेगा, तीन नवंबर को जांच और पांच नवंबर तक नाम वापसी होगी।
मतदान 21 नवंबर को निर्धारित है और चुनावी प्रक्रिया 30 नवंबर तक पूरी करने की योजना है।
यह स्पष्ट करना जरूरी है कि 21 नवंबर का कार्यक्रम पंचायत चुनावों का है, नई हिल काउंसिलों के चुनाव का नहीं।
स्थानीय राजनीति में विरोध क्यों?
