UPI पर 0.4% चार्ज टला, जयराम रमेश के 'यू-टर्न' वाले आरोप की फिर चर्चा; जानें पूरा मामला

UPI पर ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा कारोबारी भुगतान पर प्रस्तावित 0.4% MDR अब दिवाली के बाद लागू होगा। कांग्रेस नेता जयराम रमेश पहले सरकार के रुख में बदलाव पर सवाल उठा चुके हैं। आम ग्राहकों पर सीधे शुल्क नहीं लगेगा।

UPI MDR News: दिवाली के बाद लागू होगा 0.4% व्यापारी शुल्क। जानिए जयराम रमेश ने सरकार पर यू-टर्न का आरोप क्यों लगाया और आम ग्राहकों पर क्या असर होगा।

UPI चार्ज पर सरकार का फैसला बदला, दिवाली तक राहत; जयराम रमेश के आरोप फिर चर्चा में

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UPI पर प्रस्तावित MDR शुल्क दिवाली के बाद तक टला, कांग्रेस नेता जयराम रमेश पहले सरकार के फैसले पर उठा चुके हैं सवाल।

प्रत्यक्षदर्शी समाचार | नई दिल्ली | 13 अक्टूबर 2026

UPI के जरिए डिजिटल भुगतान करने वाले करोड़ों लोगों और व्यापारियों के लिए मंगलवार को महत्वपूर्ण खबर सामने आई। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने चुनिंदा कारोबारी UPI लेनदेन पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को फिलहाल टाल दिया है। यह व्यवस्था 15 अक्टूबर से लागू होनी थी, लेकिन अब इसे दिवाली के बाद लागू किया जाएगा।
इस फैसले के साथ कांग्रेस नेता जयराम रमेश की पहले की गई आलोचना भी चर्चा में है। उन्होंने सितंबर में UPI पर शुल्क लगाने के फैसले को लेकर केंद्र सरकार पर रुख बदलने का आरोप लगाया था और पुराने सरकारी बयानों का हवाला देकर जवाब मांगा था।

खबर में खास

  • ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा UPI कारोबारी भुगतान पर 0.4% MDR फिलहाल टला।
  • 15 अक्टूबर से लागू होने वाला शुल्क अब दिवाली के बाद लागू होगा।

  • जयराम रमेश ने सितंबर में केंद्र सरकार पर UPI नीति में यू-टर्न लेने का आरोप लगाया था।

  • आम ग्राहकों के व्यक्तिगत UPI ट्रांसफर मुफ्त रहेंगे, नई तारीख अभी घोषित नहीं।

UPI पर 0.4% MDR का फैसला क्यों टला?

NPCI ने मंगलवार को बताया कि त्योहारों के मौसम को ध्यान में रखते हुए UPI एंड सर्विसेज स्टीयरिंग कमेटी ने शुल्क लागू करने की तारीख आगे बढ़ाई है।
दरअसल, दिवाली के दौरान बाजारों में खरीदारी और डिजिटल भुगतान बढ़ जाते हैं। व्यापारिक संगठनों ने इस समय नया शुल्क लागू करने से कारोबार प्रभावित होने की आशंका जताई थी।
व्यापारियों और भुगतान सेवा प्रदाताओं ने तैयारी के लिए अतिरिक्त समय देने की मांग भी की थी। अब NPCI नई तारीख अलग से घोषित करेगा।

जयराम रमेश ने सरकार पर यू-टर्न का आरोप क्यों लगाया था?

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने 16 सितंबर को UPI पर MDR लगाने के फैसले की आलोचना की थी। उन्होंने जून 2025 के वित्त मंत्रालय के उस बयान का उल्लेख किया था, जिसमें UPI पर MDR लगाए जाने की खबरों को गलत और भ्रामक बताया गया था।
रमेश ने सरकार के बदले हुए रुख पर सवाल उठाते हुए इसे यू-टर्न करार दिया था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नई व्यवस्था से अमेरिकी भुगतान कंपनियों को फायदा हो सकता है।
हालांकि, अमेरिकी दबाव में फैसला लिए जाने का आरोप स्वतंत्र रूप से प्रमाणित नहीं है। सरकार पहले इस तरह के आरोपों को खारिज कर चुकी है और UPI व्यवस्था को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाने के लिए नए शुल्क ढांचे को जरूरी बता चुकी है।
रमेश की सितंबर की टिप्पणी को 13 अक्टूबर का नया बयान नहीं माना जाना चाहिए।

₹2,000 से ज्यादा भुगतान पर कितना चार्ज लगेगा?

सितंबर में घोषित प्रस्तावित नियम के अनुसार, ₹2,000 से अधिक के पात्र व्यापारी भुगतान पर 0.4% MDR लगाया जाना था।
उदाहरण के लिए, किसी पात्र व्यापारी को ₹10,000 का UPI भुगतान मिलने पर ₹40 MDR बनता है। प्रस्तावित व्यवस्था में इस शुल्क की अधिकतम सीमा ₹300 रखी गई थी।
छोटे व्यापारियों और कुछ विशेष सेवाओं के लिए अलग छूट तथा शुल्क दरें भी प्रस्तावित थीं। दिवाली के बाद लागू होने वाले अंतिम नियमों की जानकारी नई अधिसूचना से स्पष्ट होगी।

क्या PhonePe और Google Pay इस्तेमाल करने वालों को पैसा देना होगा?

आम UPI उपयोगकर्ताओं को व्यक्तिगत लेनदेन पर अलग MDR नहीं देना होगा। दोस्तों या परिवार के सदस्यों को पैसा भेजने वाले P2P ट्रांसफर शुल्क-मुक्त रहेंगे।
इसी तरह ₹2,000 तक के सामान्य व्यापारी भुगतान भी प्रस्तावित MDR के दायरे से बाहर हैं।
सरकार का कहना है कि MDR व्यापारियों से संबंधित भुगतान प्रक्रिया का शुल्क है, ग्राहकों पर सीधे लगाया जाने वाला टैक्स नहीं।
हालांकि, विपक्षी दलों और कुछ व्यापारी संगठनों ने आशंका जताई है कि भविष्य में कारोबारी लागत बढ़ने का अप्रत्यक्ष असर वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों पर पड़ सकता है।

अब दिवाली के बाद क्या होगा?

NPCI ने MDR की प्रस्तावित व्यवस्था समाप्त नहीं की है, बल्कि केवल इसे लागू करने की तारीख आगे बढ़ाई है।
अब व्यापारियों और भुगतान सेवा प्रदाताओं को नई तारीख तथा अंतिम दिशानिर्देशों का इंतजार है।
फिलहाल आम ग्राहकों के लिए UPI भुगतान की मौजूदा सुविधा जारी रहेगी। वहीं सरकार के शुल्क संबंधी फैसले और उसके संभावित आर्थिक असर को लेकर राजनीतिक तथा कारोबारी बहस बनी हुई है।
 

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