UP Election 2027: शिक्षामित्रों को सरकारी शिक्षक बनाएंगे अखिलेश यादव! योगी सरकार दे रही ₹18,000 मानदेय, लेकिन राह में कानूनी अड़चन
यूपी चुनाव 2027 से पहले अखिलेश यादव ने शिक्षामित्रों को नियमित शिक्षक बनाकर सरकारी नौकरी देने का वादा किया। योगी सरकार मानदेय ₹18,000 कर चुकी है। जानिए सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले के कारण आगे क्या चुनौती है।
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अखिलेश यादव ने शिक्षामित्रों को नियमित शिक्षक बनाने का वादा किया है। योगी सरकार ने मानदेय ₹18 हजार किया है। जानिए 2017 के सुप्रीम कोर्ट फैसले के बाद नियमितीकरण में क्या कानूनी चुनौती है।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | लखनऊ | 22 अक्टूबर 2026
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले शिक्षामित्रों की नौकरी का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक चर्चा में है। समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 21 अक्टूबर को लखनऊ में कहा कि उनकी पार्टी की सरकार बनने पर शिक्षामित्रों को पूर्ण शिक्षक बनाकर सरकारी नौकरी दी जाएगी। यह अभी चुनावी वादा है, न कि लागू हो चुका सरकारी फैसला।
खबर में खास
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अखिलेश यादव ने शिक्षामित्रों को नियमित शिक्षक बनाने का वादा किया।
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योगी सरकार मानदेय ₹10,000 से बढ़ाकर ₹18,000 प्रतिमाह कर चुकी है।
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सितंबर-अक्टूबर के भुगतान के लिए ₹460.23 करोड़ जारी करने की जानकारी दी गई है।
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2017 का सुप्रीम कोर्ट फैसला नियमितीकरण के कानूनी सवाल को महत्वपूर्ण बनाता है।
अखिलेश यादव ने क्या घोषणा की?
कन्नौज सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने लखनऊ में पत्रकारों से बातचीत के दौरान शिक्षामित्रों के भविष्य पर बयान दिया। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी की सरकार बनी तो शिक्षामित्रों को पूर्ण शिक्षक का दर्जा देकर सरकारी नौकरी दी जाएगी।
उन्होंने इसके लिए अलग बजट प्रावधान करने और मौजूदा शिक्षकों की नौकरियां प्रभावित न होने देने की भी बात कही।
साथ ही उन्होंने शिक्षा विभाग के कुछ अधिकारियों पर चुनावी प्रक्रियाओं में पक्षपात के आरोप भी लगाए। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
योगी सरकार ने हाल में क्या किया?
शिक्षामित्रों के लिए मौजूदा व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव अप्रैल 2026 में हुआ था। योगी सरकार ने उनका मासिक मानदेय ₹10,000 से बढ़ाकर ₹18,000 करने की मंजूरी दी।
इसके बाद अक्टूबर में समग्र शिक्षा के तहत कार्यरत 1,27,841 शिक्षामित्रों के सितंबर और अक्टूबर के मानदेय के लिए ₹460.23 करोड़ जारी किए जाने की सूचना दी गई।
यह सरकारी आवंटन है; प्रत्येक व्यक्ति के खाते में भुगतान पहुंचने की पुष्टि अलग विषय है।
मानदेय और नियमित नौकरी में क्या अंतर है?
मानदेय में वृद्धि से मासिक भुगतान बढ़ता है, लेकिन इससे शिक्षामित्र अपने आप नियमित सरकारी शिक्षक नहीं बन जाते।
स्थायी नियुक्ति के लिए भर्ती नियम, न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता, शिक्षक पात्रता परीक्षा तथा लागू न्यायिक निर्णयों को ध्यान में रखना होगा।
इसलिए अखिलेश का बयान शिक्षामित्रों के लिए नई राजनीतिक प्रतिबद्धता है, तत्काल नौकरी का आदेश नहीं।
2017 के सुप्रीम कोर्ट फैसले का क्या महत्व है?
25 जुलाई 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश में शिक्षामित्रों को सहायक अध्यापक के रूप में समायोजित करने की पूर्व व्यवस्था को निरस्त करने वाले हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा था।
अदालत ने वैधानिक योग्यता और नियुक्ति प्रक्रिया को महत्वपूर्ण माना था। साथ ही पात्रता हासिल करने पर भविष्य की भर्तियों में अवसर और कुछ रियायतों की संभावना का उल्लेख किया था।
यही वजह है कि किसी भी नए नियमितीकरण प्रस्ताव के लिए कानूनी रूपरेखा स्पष्ट करना जरूरी होगा।
2027 के चुनाव से पहले किन बातों पर नजर?
