UP Election 2027: BJP को संजय निषाद की चेतावनी—आरक्षण पर फैसला नहीं तो 'दूसरा दरवाजा'! गठबंधन पर 75 जिलों से लेंगे राय
दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में संजय निषाद ने भाजपा से मछुआ समुदाय के SC आरक्षण पर फैसला मांगा। कहा, जवाब नहीं मिला तो दूसरे विकल्पों पर विचार करेंगे। गठबंधन पर निर्णय कोर कमेटी और 75 जिलों की राय से होगा।
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UP Election 2027 से पहले निषाद पार्टी प्रमुख संजय निषाद ने BJP से आरक्षण पर निर्णय मांगा और गठबंधन के दूसरे विकल्प खुले रखने का संकेत दिया। जानिए उनका बयान।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | लखनऊ/नई दिल्ली | 22 अक्टूबर 2026
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले भारतीय जनता पार्टी की सहयोगी निषाद पार्टी ने गठबंधन को लेकर नया राजनीतिक संकेत दिया है। योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री और निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद ने भाजपा से मछुआ समुदाय को अनुसूचित जाति (SC) के तहत आरक्षण देने की मांग पर जल्द निर्णय लेने को कहा है।
21 अक्टूबर को दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में आयोजित ‘दिल्ली चलो’ महासम्मेलन के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि भाजपा आरक्षण के मुद्दे पर संतोषजनक जवाब नहीं देती है, तो पार्टी दूसरे राजनीतिक विकल्पों पर विचार कर सकती है।
हालांकि, संजय निषाद ने भाजपा से गठबंधन तोड़ने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है।
खबर में खास
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दिल्ली की रैली में संजय निषाद ने भाजपा से आरक्षण पर जल्द फैसला मांगा।
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मांग पूरी नहीं होने पर दूसरे राजनीतिक विकल्प तलाशने का संकेत।
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2027 के गठबंधन पर कोर कमेटी और सभी 75 जिलों के कार्यकर्ताओं की राय ली जाएगी।
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अखिलेश यादव को गोरखपुर की किसी सीट से चुनाव लड़ने की चुनौती।
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फिलहाल निषाद पार्टी भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन में बनी हुई है।
भाजपा को क्या चेतावनी दी?
दिल्ली में आयोजित संवैधानिक सुरक्षा अधिकार महासम्मेलन में संजय निषाद ने कहा कि निषाद समाज लंबे समय से अपने अधिकारों की मांग कर रहा है।
उन्होंने भाजपा से स्पष्ट जवाब मांगा कि मछुआ समुदाय को अनुसूचित जाति के दायरे में शामिल करने की मांग पर सरकार की क्या योजना है।
उन्होंने कहा कि भाजपा केंद्र और उत्तर प्रदेश, दोनों जगह सत्ता में है। ऐसे में इस मुद्दे पर निर्णय लेने की जिम्मेदारी भी उसके सामने है।
संजय निषाद ने चेतावनी दी कि यदि आरक्षण पर रास्ता बंद हुआ, तो उनकी पार्टी अपने राजनीतिक विकल्प तय करने के लिए स्वतंत्र होगी
क्या NDA से अलग होगी निषाद पार्टी?
संजय निषाद के बयान के बाद भाजपा और निषाद पार्टी के भविष्य के गठबंधन को लेकर सवाल उठे हैं।
लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया है कि अंतिम निर्णय अकेले नहीं लिया जाएगा। पार्टी की कोर कमेटी और उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों के कार्यकर्ताओं तथा समर्थकों से राय ली जाएगी।
इसका मतलब है कि फिलहाल कोई नया गठबंधन तय नहीं हुआ है। दूसरे विकल्प तलाशने का बयान भविष्य की संभावित राजनीतिक रणनीति का संकेत है, अंतिम फैसला नहीं।
आरक्षण की मांग आखिर क्या है?
निषाद पार्टी मछुआ समुदाय से जुड़ी विभिन्न जातियों और उपजातियों को अनुसूचित जाति के तहत आरक्षण का लाभ देने की मांग करती रही है।
संजय निषाद का कहना है कि वर्षों से यह मुद्दा लंबित है और अब सरकार को स्पष्ट निर्णय लेना चाहिए।
हालांकि, अनुसूचित जातियों की संवैधानिक सूची में बदलाव एक निर्धारित कानूनी प्रक्रिया से होता है। किसी राजनीतिक दल की मांग अपने आप में सूची में शामिल किए जाने का कानूनी आधार नहीं बनती।
अखिलेश यादव को क्यों दी चुनौती?
दिल्ली के सम्मेलन में संजय निषाद ने समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव को गोरखपुर की किसी विधानसभा सीट से उनके खिलाफ चुनाव लड़ने की चुनौती भी दी।
उन्होंने 2018 के गोरखपुर लोकसभा उपचुनाव में अपने राजनीतिक संगठन की भूमिका का उल्लेख किया और दावा किया कि निषाद पार्टी के समर्थन का महत्व दूसरे दल भी समझते हैं।
हालांकि, किसी दल की चुनावी ताकत का अंतिम आकलन प्रमाणित चुनावी नतीजों से ही किया जा सकता है।
2027 से पहले भाजपा के लिए क्या सवाल?
