दिल्ली में विपक्ष के मार्च से दूर क्यों रहे ओवैसी? यूपी चुनाव में योगी-अखिलेश को दी चुनौती

CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ INDIA गठबंधन के मार्च में असदुद्दीन ओवैसी शामिल नहीं हुए। उन्होंने गठबंधन का हिस्सा न होने की वजह बताई। अब यूपी चुनाव 2027 को लेकर योगी आदित्यनाथ और अखिलेश यादव को चुनौती दी है।

दिल्ली के विपक्षी मार्च में क्यों नहीं गए असदुद्दीन ओवैसी? जानिए INDIA गठबंधन से दूरी, SIR पर उनका रुख और यूपी चुनाव 2027 की रणनीति।

दिल्ली के विरोध मार्च से ओवैसी ने क्यों बनाई दूरी? यूपी चुनाव 2027 में योगी-अखिलेश के खिलाफ खोला मोर्चा

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दिल्ली में विपक्ष के प्रदर्शन से दूरी और यूपी विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर अपने बयानों से चर्चा में AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | नई दिल्ली | 13 अक्टूबर 2026
देश की राजधानी दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव और कई विपक्षी नेता इन प्रदर्शनों में शामिल हुए हैं। लेकिन AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के INDIA गठबंधन के मार्च में शामिल नहीं होने पर भी सवाल उठे।
ओवैसी ने 6 अक्टूबर को स्पष्ट किया था कि उनकी पार्टी INDIA गठबंधन का हिस्सा नहीं है, इसलिए वह उसके विरोध मार्च में शामिल नहीं हुए। दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर ओवैसी लगातार राजनीतिक बयान दे रहे हैं। हाल ही में उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और अखिलेश यादव, दोनों को अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों से चुनाव लड़ने की चुनौती दी।

खबर में खास

  • दिल्ली में INDIA गठबंधन के मार्च में शामिल नहीं हुए असदुद्दीन ओवैसी।
  • ओवैसी ने कहा कि AIMIM विपक्षी गठबंधन का हिस्सा नहीं है।

  • मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया और SIR पर भी उठाए सवाल।

  • यूपी चुनाव 2027 से पहले योगी और अखिलेश को चुनाव लड़ने की चुनौती।

दिल्ली के प्रदर्शन में क्यों नहीं गए असदुद्दीन ओवैसी?

6 अक्टूबर को दिल्ली में INDIA गठबंधन के सांसदों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मार्च निकाला था। इसमें कई विपक्षी दलों के नेता शामिल हुए।
जब ओवैसी से उनके शामिल नहीं होने की वजह पूछी गई, तो उन्होंने कहा, 'बेगानी शादी में मेरा क्या काम?'
ओवैसी का कहना था कि AIMIM, INDIA गठबंधन का हिस्सा नहीं है। इसलिए वह गठबंधन के कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए।
हालांकि, उन्होंने चुनाव आयोग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विपक्ष की कुछ चिंताओं से सहमति जताई थी।

ज्ञानेश कुमार और SIR पर ओवैसी का क्या रुख है?

ओवैसी ने मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कानून में बदलाव की मांग की।
उनका कहना है कि मुख्य चुनाव आयुक्त के चयन वाली समिति में प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश को शामिल किया जाना चाहिए।
उन्होंने बिहार में SIR की प्रक्रिया की भी आलोचना की थी। ओवैसी ने आरोप लगाया कि यह प्रक्रिया पिछले दरवाजे से NRC लागू करने जैसी है।
हालांकि, यह ओवैसी का राजनीतिक आरोप है। SIR को NRC के समान बताने का कोई स्थापित कानूनी निष्कर्ष इस बयान से नहीं निकलता।

यूपी चुनाव में योगी और अखिलेश को क्या चुनौती दी?

दिल्ली के प्रदर्शनों के बीच ओवैसी की उत्तर प्रदेश में चुनावी गतिविधियाँ भी चर्चा में हैं।
12 अक्टूबर को दिए एक इंटरव्यू में ओवैसी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संभल विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने की चुनौती दी।
उन्होंने दावा किया कि यदि योगी संभल से चुनाव लड़ते हैं, तो AIMIM उनके खिलाफ चुनावी मुकाबला करेगी।
इसके साथ ही ओवैसी ने समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव को गोरखपुर से चुनाव लड़ने की चुनौती दी।
ओवैसी ने भाजपा और समाजवादी पार्टी पर आरोप लगाया कि दोनों दल एक-दूसरे के खिलाफ राजनीतिक बयानबाजी करते हैं, लेकिन महत्वपूर्ण सार्वजनिक मुद्दों पर पर्याप्त जवाब नहीं देते।

अखिलेश यादव से गठबंधन की बात कहां तक पहुंची?

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले AIMIM ने विपक्षी दलों के साथ गठबंधन की इच्छा जताई थी।
सितंबर में कानपुर की सभा में ओवैसी ने कहा था कि उनकी पार्टी भाजपा को तीसरी बार सत्ता में आने से रोकने के लिए दूसरे दलों के साथ चुनावी समझौता करने को तैयार है।
उन्होंने गठबंधन को लेकर 2 अक्टूबर तक इंतजार करने की बात भी कही थी।
हालांकि, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव अपने मौजूदा गठबंधन को जारी रखने की बात कर चुके हैं। AIMIM और सपा के बीच किसी नए चुनावी गठबंधन की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
इसे भी पढ़ें: UP चुनाव 2027 से पहले ओवैसी का गठबंधन का ऑफर, अखिलेश से पूछा सवाल

दिल्ली से दूरी, लेकिन यूपी में सक्रिय क्यों हैं ओवैसी?

दिल्ली में INDIA गठबंधन के मार्च में शामिल नहीं होने और उत्तर प्रदेश में चुनावी बयान देने को दो अलग राजनीतिक घटनाक्रमों के रूप में समझना जरूरी है।
ओवैसी ने विपक्षी गठबंधन से अपनी दूरी स्पष्ट की है, लेकिन मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया और SIR पर सवाल उठाना जारी रखा है।
दूसरी ओर, AIMIM उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी कर रही है। पार्टी स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने और संभावित गठबंधन, दोनों विकल्पों पर सार्वजनिक रूप से बात कर चुकी है।
फिलहाल ओवैसी का रुख स्पष्ट है कि AIMIM INDIA गठबंधन का हिस्सा नहीं है। साथ ही पार्टी यूपी चुनाव 2027 के लिए अपनी राजनीतिक गतिविधियाँ जारी रखे हुए है। अब गठबंधन, सीटों और उम्मीदवारों पर अगली आधिकारिक घोषणाएँ महत्वपूर्ण होंगी।

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