UP Election 2027: चुनाव से पहले टूट जाएगा NDA? कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी का दावा, योगी सरकार के दो मंत्रियों में जुबानी जंग!
कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने दावा किया कि यूपी विधानसभा चुनाव से पहले NDA टूट सकता है। उन्होंने मंत्री संजय निषाद और नरेंद्र कश्यप के बीच बयानबाजी का हवाला दिया। फिलहाल गठबंधन टूटने की कोई घोषणा नहीं हुई है।
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UP Election 2027 से पहले संजय निषाद और नरेंद्र कश्यप के बीच राजनीतिक बयानबाजी पर कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने NDA में टूट का दावा किया है। जानिए तीनों नेताओं ने क्या कहा।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | लखनऊ | 22 अक्टूबर 2026
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस के राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी ने दावा किया है कि विधानसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश में NDA के कई सहयोगी दल अलग हो सकते हैं।
गुरुवार को सामने आए अपने बयान में तिवारी ने योगी सरकार के दो मंत्रियों, संजय निषाद और नरेंद्र कश्यप के बीच मतभेदों का हवाला दिया। उनका कहना है कि एक ही मंत्रिमंडल के सदस्य सार्वजनिक रूप से एक-दूसरे पर सवाल उठा रहे हैं।
खबर में खास
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कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने NDA में टूट का राजनीतिक दावा किया।
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मंत्री नरेंद्र कश्यप ने संजय निषाद की आरक्षण संबंधी राजनीति पर सवाल उठाए।
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नरेंद्र कश्यप ने निषाद समाज में नाराजगी होने का दावा किया।
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संजय निषाद ने पहले BJP से आरक्षण पर निर्णय मांगा था।
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फिलहाल किसी NDA सहयोगी दल ने गठबंधन छोड़ने की घोषणा नहीं की है।
प्रमोद तिवारी ने क्या कहा?
कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव से पहले NDA के कई सहयोगी दल अलग हो सकते हैं।
उन्होंने भाजपा की राजनीतिक स्थिति पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि उसके साथ बने रहने से सहयोगी दलों को नुकसान हो सकता है।
तिवारी ने मंत्रिपरिषद की सामूहिक जिम्मेदारी का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना था कि जब दो मंत्री सार्वजनिक रूप से एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं, तो सरकार के भीतर मतभेदों पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
हालांकि, यह प्रमोद तिवारी का राजनीतिक आकलन है। गठबंधन टूटने का कोई औपचारिक फैसला सामने नहीं आया है।
नरेंद्र कश्यप ने संजय निषाद पर क्या आरोप लगाए?
इस विवाद में नया मोड़ तब आया, जब यूपी सरकार में मंत्री नरेंद्र कश्यप ने संजय निषाद की आरक्षण संबंधी मांग और उनके राजनीतिक रुख पर सवाल उठाए।
कश्यप ने दावा किया कि निषाद समाज के कुछ लोगों में संजय निषाद को लेकर नाराजगी है। उन्होंने संत कबीरनगर में लोकसभा चुनाव के दौरान संजय निषाद के बेटे की हार का उदाहरण भी दिया।
उन्होंने कहा कि संजय निषाद NDA के सहयोगी हैं और उन्हें अपनी मांग रखने का अधिकार है, लेकिन इस मुद्दे को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश कैबिनेट के सामने उठाना चाहिए।
नरेंद्र कश्यप के ये बयान उनके राजनीतिक आरोप हैं, पूरे निषाद समाज की राय के प्रमाण नहीं।
आरक्षण पर पहले क्या कह चुके हैं संजय निषाद?
21 अक्टूबर को दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में निषाद पार्टी ने बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया था।
इस दौरान पार्टी अध्यक्ष संजय निषाद ने मछुआ समुदाय को अनुसूचित जाति के अंतर्गत आरक्षण देने की मांग पर भाजपा से जवाब मांगा।
उन्होंने कहा था कि मांग पर संतोषजनक निर्णय नहीं होने की स्थिति में पार्टी दूसरे राजनीतिक विकल्पों पर विचार कर सकती है।
हालांकि, उन्होंने NDA छोड़ने की घोषणा नहीं की। गठबंधन पर आगे का निर्णय पार्टी की कोर कमेटी और प्रदेश के 75 जिलों से राय लेने के बाद करने की बात कही थी
क्या NDA में सचमुच संकट है?
