UPI पर 0.4% MDR को लेकर नया विवाद, सरकार बोली- कांग्रेस सांसदों ने नहीं किया था विरोध; कांग्रेस ने बताया पूरा मामला

UPI MDR पर सरकार ने कहा कि वित्त समिति की रिपोर्ट अपनाते समय मौजूद 5 कांग्रेस सांसदों ने formal dissent दर्ज नहीं कराई थी। कांग्रेस का जवाब है कि 15 अक्टूबर से लागू होने वाला specific 0.4% MDR proposal समिति के सामने था ही नहीं।

₹2,000 से ज्यादा के चुनिंदा merchant UPI payments पर 0.4% MDR को लेकर सरकार और कांग्रेस के बीच विवाद बढ़ गया है। सरकार ने संसदीय वित्त समिति की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि समिति ने tiered MDR/revenue framework की सिफारिश की थी और रिपोर्ट अपनाते समय मौजूद पी. चिदंबरम, मनीष तिवारी और गौरव गोगोई समेत पांच कांग्रेस सांसदों ने formal dissent दर्ज नहीं कराया। कांग्रेस सांसदों का जवाब है कि जिस specific 0.4% MDR व्यवस्था को अब लागू किया जा रहा है, उसकी दर, सीमा और exemption structure समिति के सामने चर्चा के लिए आया ही नहीं था।

प्रत्यक्षदर्शी समाचार | नई दिल्ली | 17 सितंबर 2026

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UPI MDR को लेकर सरकार और कांग्रेस ने संसदीय वित्त समिति की रिपोर्ट की अलग-अलग व्याख्या की है।

खबर में खास

  • UPI MDR पर सरकार-कांग्रेस में नया विवाद
  • सरकार ने वित्त समिति की रिपोर्ट का दिया हवाला
  • पांच कांग्रेस सांसदों की formal dissent दर्ज नहीं
  • कांग्रेस बोली- specific 0.4% प्रस्ताव समिति के सामने आया ही नहीं
UPI के जरिए होने वाले कुछ merchant payments पर नई MDR व्यवस्था को लेकर राजनीतिक विवाद अब संसदीय वित्त समिति तक पहुंच गया है।
सरकार का कहना है कि समिति पहले ही UPI के लिए tiered MDR/revenue framework की सिफारिश कर चुकी थी और रिपोर्ट अपनाते समय मौजूद कांग्रेस सांसदों की तरफ से कोई औपचारिक असहमति दर्ज नहीं हुई थी।
दूसरी तरफ कांग्रेस सांसदों ने कहा है कि सरकार अब जिस specific MDR structure को लागू करने जा रही है, उस पर समिति में चर्चा ही नहीं हुई थी।

सरकार ने किन 5 कांग्रेस सांसदों का नाम लिया?

सरकारी सूत्रों के मुताबिक 12 अगस्त को संसदीय वित्त समिति की रिपोर्ट अपनाई गई थी।

उस दौरान कांग्रेस के पांच सांसद मौजूद थे:

पी. चिदंबरम, मनीष तिवारी, गौरव गोगोई, किशोरी लाल और के. गोपीनाथ।

सरकार का कहना है कि समिति की प्रकाशित कार्यवाही में इन सांसदों की तरफ से recommendation के खिलाफ कोई formal dissent दर्ज नहीं है।

इसी आधार पर सरकार कांग्रेस से सवाल कर रही है कि जब पार्टी के सांसदों ने उस समय औपचारिक विरोध दर्ज नहीं कराया तो अब नए MDR का विरोध क्यों किया जा रहा है।

कांग्रेस ने क्या जवाब दिया?

यहीं इस खबर का सबसे महत्वपूर्ण फर्क है।
कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा कि सरकार जिस specific UPI MDR proposal को अब लागू कर रही है, वह संसदीय समिति के सामने रखा ही नहीं गया था।
मनीष तिवारी ने भी कहा कि समिति के सामने 0.4% rate, ₹2,000 threshold, fee ceiling और exemption slabs वाला मौजूदा specific framework नहीं रखा गया था।
इसलिए कांग्रेस का तर्क है कि broader tiered revenue model पर समिति की recommendation को मौजूदा specific MDR policy का समर्थन नहीं माना जा सकता।

फिर संसदीय समिति ने असल में क्या कहा था?

वित्त संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने UPI ecosystem को लंबे समय तक आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाने की जरूरत पर जोर दिया था।
समिति ने कहा था कि tiered MDR/revenue framework को आगे बढ़ाया जाना चाहिए ताकि payment service providers पूरी तरह सरकारी सहायता पर निर्भर न रहें।
रिपोर्ट में cybersecurity, fraud prevention और payment network infrastructure पर होने वाले खर्च का भी उल्लेख किया गया था।
रिपोर्ट में 2026-27 के लिए करीब ₹2,000 करोड़ के सरकारी allocation और industry की अनुमानित ₹20,700 करोड़ operational cost के बीच बड़े अंतर की ओर भी ध्यान दिलाया गया था।

दोनों पक्षों की बात में असली फर्क क्या है?

मामला आसान भाषा में समझिए:
सरकार का पक्ष:
संसदीय समिति ने tiered MDR/revenue framework की सिफारिश की और मौजूद कांग्रेस सांसदों ने formal dissent दर्ज नहीं कराया।
कांग्रेस का पक्ष:
समिति में general/tiered revenue model पर बात हुई थी, लेकिन अब लागू होने वाला specific 0.4% MDR structure उसके सामने नहीं रखा गया था।
यानी विवाद इस बात पर नहीं है कि समिति ने sustainable revenue model की बात की थी या नहीं। असली विवाद यह है कि क्या उस recommendation को सरकार की मौजूदा specific MDR policy के समर्थन के रूप में देखा जा सकता है।

₹2000 से ज्यादा UPI करने वाले ग्राहक को 0.4% देना होगा?

नहीं।
यह सबसे जरूरी बात है।
नई व्यवस्था के तहत 15 अक्टूबर 2026 से चुनिंदा merchant UPI transactions पर MDR लागू होना है। यह ग्राहक पर सीधे लगाया जाने वाला 0.4% consumer charge नहीं है।
Person-to-person यानी P2P UPI payments free रहेंगे।
इसलिए headline में “₹2000 से ऊपर UPI करने पर ग्राहक से 0.4% कटेगा” बिल्कुल न लिखें।

छोटे दुकानदारों का क्या होगा?

सरकार की घोषित व्यवस्था में छोटे कारोबारियों के लिए अलग सुरक्षा दी गई है।
UPI QR से महीने में ₹1 लाख तक payment प्राप्त करने वाले पात्र छोटे व्यापारियों को MDR से बाहर रखने की व्यवस्था बताई गई है। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य छोटे दुकानदारों और कम मूल्य वाले डिजिटल भुगतान को प्रभावित होने से बचाना है।

राहुल गांधी ने क्यों किया विरोध?

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने नई MDR व्यवस्था का विरोध करते हुए इसे “UPI Tax” कहा और इसे वापस लेने की मांग की।
उन्होंने सरकार पर अमेरिकी दबाव में फैसला लेने का आरोप भी लगाया है। सरकार ने विदेशी दबाव वाले आरोप को खारिज किया है और कहा है कि MDR ग्राहक पर लगाया जाने वाला tax नहीं है।
अब इसी विवाद में संसदीय वित्त समिति की पुरानी recommendation और उसमें कांग्रेस सांसदों की मौजूदगी नया राजनीतिक मुद्दा बन गई है।

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