UPI पर MDR वापस लेने की राहुल गांधी की मांग, PM मोदी पर साधा निशाना; जानें ₹2000 से ऊपर पेमेंट का नया नियम

₹2000 से ऊपर के चुनिंदा merchant UPI भुगतान पर 0.4% MDR को लेकर राहुल गांधी ने सरकार पर हमला करते हुए इसे वापस लेने की मांग की है। सरकार का कहना है कि MDR ग्राहक पर लगने वाला टैक्स नहीं है और P2P UPI पूरी तरह फ्री रहेगा।

UPI के नए MDR नियम को लेकर राहुल गांधी ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला तेज कर दिया है। राहुल ने इसे ‘UPI tax’ बताते हुए वापस लेने की मांग की और सरकार पर अमेरिकी दबाव में फैसला लेने का आरोप लगाया। वहीं वित्त मंत्रालय ने साफ किया है कि ₹2,000 से ऊपर के निर्धारित person-to-merchant UPI transactions पर 0.4% MDR लगेगा, लेकिन इसे ग्राहक से वसूलने की अनुमति नहीं है। व्यक्ति से व्यक्ति यानी P2P UPI transfer रकम चाहे जितनी हो, पूरी तरह मुफ्त रहेगा।

प्रत्यक्षदर्शी समाचार | नई दिल्ली | 16 सितंबर 2026

rahul-gandhi-upi-mdr-roll-back-demand-2000-payment-2026.jpg
राहुल गांधी ने नए UPI MDR framework को ‘UPI tax’ बताते हुए इसे वापस लेने की मांग की है।

खबर में खास

  • राहुल गांधी ने MDR को बताया ‘UPI tax’
  • ₹2,000 से ऊपर चुनिंदा merchant payments पर 0.4% MDR
  • ग्राहक से MDR वसूलने की अनुमति नहीं
  • P2P UPI किसी भी रकम पर पूरी तरह free
UPI पर नए Merchant Discount Rate (MDR) को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए नए MDR framework को वापस लेने की मांग की।
राहुल गांधी ने इसे “UPI tax” करार दिया और आरोप लगाया कि सरकार अमेरिकी दबाव के आगे झुक रही है। उन्होंने इस मुद्दे को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से भी जोड़ा।
हालांकि केंद्र सरकार का कहना है कि MDR कोई सरकारी टैक्स नहीं है और इसे UPI से भुगतान करने वाले ग्राहक से नहीं लिया जाएगा।

राहुल गांधी ने आज क्या कहा?

राहुल गांधी ने बुधवार को एक वीडियो संदेश जारी कर UPI के नए MDR framework पर सरकार को घेरा।
उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से इसे वापस लेने की मांग की और आरोप लगाया कि सरकार अमेरिकी हितों के सामने झुक रही है।
राहुल गांधी का तर्क है कि भले ही MDR सीधे दुकानदार से लिया जाए, लेकिन आखिरकार व्यापारी इसकी लागत वस्तुओं और सेवाओं की कीमत में जोड़ सकते हैं, जिससे अप्रत्यक्ष असर ग्राहक पर पड़ सकता है। यह राहुल गांधी और कांग्रेस का तर्क है; सरकार का कहना है कि MDR ग्राहकों पर नहीं डाला जा सकता।

क्या ₹2,000 से ऊपर UPI करते ही ग्राहक से पैसा कटेगा?

नहीं।
यह इस खबर का सबसे महत्वपूर्ण तथ्य है।
वित्त मंत्रालय के मुताबिक व्यक्ति से व्यक्ति यानी P2P UPI transaction पर कोई शुल्क नहीं लगेगा, चाहे रकम ₹2,000 हो, ₹20,000 हो या उससे ज्यादा।
नया MDR केवल निर्धारित Person-to-Merchant (P2M) transactions पर लागू है।

₹2,000 से ऊपर कितना MDR लगेगा?

वित्त मंत्रालय के अनुसार ₹2,000 से अधिक के निर्धारित merchant UPI transactions पर 0.4% MDR लागू होगा।
उदाहरण के लिए सामान्य दर लागू होने की स्थिति में ₹10,000 के merchant transaction पर 0.4% की गणना ₹40 होती है।
₹75,000 और उससे ऊपर के transactions के लिए MDR की अधिकतम सीमा ₹300 प्रति transaction रखी गई है।
यह नई व्यवस्था 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाली है।

ग्राहक देगा या दुकानदार?

सरकार के मुताबिक ग्राहक MDR नहीं देगा।
MDR merchant-payment ecosystem का शुल्क है और इसे banks, payment service providers तथा UPI application providers सहित संबंधित participants के बीच बांटा जाएगा।
बैंकों को यह सुनिश्चित करने की सलाह दी गई है कि merchants इस MDR को ग्राहकों पर न डालें। UPI apps को भी platform fee या hidden charge लगाने से प्रतिबंधित किया गया है।
इसलिए headline में “₹2,000 से ऊपर UPI करने पर ग्राहक को 0.4% charge देना होगा” लिखना गलत होगा।

छोटे दुकानदारों को भी राहत

सरकार के मुताबिक UPI QR के जरिए हर महीने ₹1 लाख तक payment प्राप्त करने वाले छोटे merchants zero-MDR व्यवस्था के तहत सभी transactions पर MDR से मुक्त रहेंगे।
वित्त मंत्रालय का दावा है कि नए framework के बाद भी करीब 96% merchant UPI transactions MDR से अप्रभावित रहेंगे।

पेट्रोल, रेलवे और मोबाइल बिल का अलग नियम

रेलवे, telecom, insurance, fuel और agricultural inputs जैसे निर्धारित क्षेत्रों में ₹2,000 से ऊपर के transaction पर सामान्य 0.4% के बजाय ₹5 flat MDR रखा गया है।
वहीं mutual funds, securities, stockbrokers और dealers से जुड़े capital-market payments पर 0.02% MDR होगा, जिसकी अधिकतम सीमा ₹300 है।

सरकार क्यों लाई MDR?

सरकार और NPCI का तर्क है कि UPI के लगातार विस्तार के लिए infrastructure, cybersecurity, fraud prevention और reliability पर निवेश जरूरी है।
MDR से मिलने वाली राशि payment ecosystem में शामिल संस्थाओं के बीच बांटी जाएगी। सरकार इसे UPI system को लंबे समय तक sustainable बनाने की व्यवस्था बता रही है।

राहुल गांधी इसे ‘टैक्स’ क्यों बता रहे?

राहुल गांधी का तर्क अलग है।
उनका कहना है कि अगर merchant को MDR देना पड़ेगा तो उसकी लागत आखिरकार वस्तुओं या सेवाओं की कीमत में शामिल होकर ग्राहक तक पहुंच सकती है।
उन्होंने इसे “UPI tax” बताते हुए वापस लेने की मांग की है और फैसले को अमेरिकी दबाव से जोड़ा है।
दूसरी तरफ वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट कहा है कि MDR न तो टैक्स है और न सरकार या NPCI द्वारा वसूला जाने वाला शुल्क
यानी इस विवाद में दो बातें अलग-अलग समझना जरूरी हैं—MDR लागू होना तथ्य है, जबकि इसे “UPI tax” कहना राहुल गांधी की राजनीतिक व्याख्या है।

About The Author

Advertisement

LatestNews

लखनऊ में युवती को कार से टक्कर मारने वाला शाहनवाज गिरफ्तार, ‘यश ठाकुर’ बनकर पहचान छिपाने का आरोप
UPI पर MDR वापस लेने की राहुल गांधी की मांग, PM मोदी पर साधा निशाना; जानें ₹2000 से ऊपर पेमेंट का नया नियम
सीने पर ‘Next PM Yogi Ji’ का टैटू, बिजनौर के ताबिश निसार बोले- दिखावे के लिए नहीं बनवाया
UP के 57 हजार पंचायत सहायकों को बड़ी राहत, मानदेय ₹6000 से बढ़कर ₹9000; प्रधान-सचिव नहीं हटा सकेंगे नौकरी से
सपा नेता पवन यादव की हत्या का 24 घंटे में खुलासा, 42 CCTV खंगालकर तीन गिरफ्तार; पुलिस ने बताई वजह
मेरठ सेंट्रल मार्केट में चला बुलडोजर, सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ध्वस्तीकरण; भारी फोर्स तैनात
बाइक मिलने के बाद iPhone के लिए मांगे ₹3 लाख, दादी-बुआ को पीटकर बनाया बंधक; बुलंदशहर का VIDEO वायरल