भारत पर 100% टैरिफ का खतरा? रूस से तेल खरीदने पर अमेरिका का नया बिल पास, अब ट्रंप के हाथ में फैसला
अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने रूस-ईरान प्रतिबंध बिल 262-159 वोट से पास कर दिया। यह राष्ट्रपति ट्रंप को रूसी ऊर्जा के बड़े खरीदार देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार दे सकता है। भारत भी संभावित रूप से प्रभावित देशों में है।
भारत और अमेरिका के व्यापारिक रिश्तों के बीच एक नया टैरिफ खतरा सामने आया है। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने रूस और ईरान पर प्रतिबंध कड़े करने वाला विधेयक पारित कर दिया है। इसके तहत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस से बड़ी मात्रा में तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल सकता है। भारत रूस से कच्चे तेल का बड़ा खरीदार है, इसलिए उस पर संभावित असर की चर्चा तेज हो गई है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि भारतीय सामान पर 100% टैरिफ अभी से लागू हो गया है।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | वॉशिंगटन/नई दिल्ली | 17 सितंबर 2026
अमेरिकी रूस प्रतिबंध विधेयक के बाद भारत पर 100% तक संभावित टैरिफ को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
खबर में खास
अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में 262-159 से बिल पास
रूसी ऊर्जा के बड़े खरीदारों पर 100% तक टैरिफ का प्रावधान
भारत और चीन पर संभावित असर की चर्चा
भारत पर अभी 100% टैरिफ लागू नहीं हुआ
भारत पर अमेरिकी टैरिफ को लेकर एक बार फिर हलचल बढ़ गई है। अमेरिका की प्रतिनिधि सभा ने रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के उद्देश्य से एक अहम प्रतिबंध विधेयक को मंजूरी दे दी है। Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026 नाम के इस विधेयक के पक्ष में 262 और विरोध में 159 वोट पड़े। अमेरिकी सीनेट इसे पिछले महीने 86-11 वोट से पारित कर चुकी है। अब विधेयक राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हस्ताक्षर के लिए पहुंच गया है।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह बिल?
इस बिल का मुख्य उद्देश्य रूस की तेल और गैस से होने वाली आमदनी पर दबाव बढ़ाना है।
विधेयक अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस से बड़ी मात्रा में ऊर्जा खरीदने वाले देशों से आने वाले सामान पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार दे सकता है।
भारत और चीन रूसी ऊर्जा के बड़े खरीदारों में शामिल हैं। भारत रूस के कच्चे तेल के प्रमुख खरीदारों में है, इसलिए बिल का भारत पर संभावित असर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
क्या भारत पर अब 100% टैरिफ लग गया?
नहीं। यही इस खबर की सबसे महत्वपूर्ण बात है।
अमेरिकी संसद से बिल पास होने का मतलब यह नहीं है कि भारत से अमेरिका जाने वाले सामान पर तत्काल 100% टैरिफ लागू हो गया।
विधेयक राष्ट्रपति ट्रंप को निर्धारित परिस्थितियों में ऐसा टैरिफ लगाने की शक्ति देता है। अंतिम कार्रवाई इस बात पर निर्भर करेगी कि कानून लागू होने के बाद अमेरिकी प्रशासन इन प्रावधानों का इस्तेमाल किस तरह करता है।
इसलिए सोशल मीडिया पर अगर इसे “अमेरिका ने भारत पर 100% टैरिफ लगा दिया” बताया जाए तो वह अधूरी जानकारी होगी।
भारत और चीन को अमेरिकी सांसद की चेतावनी
बिल पारित होने के बाद डेमोक्रेटिक सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने भारत और चीन को रूसी तेल और गैस की खरीद को लेकर चेतावनी दी।
उन्होंने दोनों देशों से रूस के बजाय दूसरे स्रोतों से तेल और गैस खरीदने को कहा।
यह अमेरिकी सांसद का बयान है और भारत सरकार की ऊर्जा नीति से अलग अमेरिकी राजनीतिक रुख को दर्शाता है।
पहले 500%, अब 100% तक टैरिफ
इस बिल का एक दिलचस्प पहलू यह भी है कि रूस से कारोबार करने वाले देशों के खिलाफ पहले प्रस्तावित प्रतिबंध इससे कहीं ज्यादा कठोर थे।
2025 के शुरुआती प्रस्ताव में 500% तक tariff का प्रावधान चर्चा में था। बाद में विधेयक में बदलाव किए गए और मौजूदा संस्करण में अधिकतम tariff authority को 100% तक सीमित किया गया।
इसलिए पुरानी रिपोर्ट देखकर इसे 500% tariff वाला नया बिल बताना गलत होगा।
कुछ देशों को मिल सकती है छूट
विधेयक में हर देश के खिलाफ समान तरीके से कार्रवाई करना अनिवार्य नहीं है।
इसमें उन देशों के लिए कुछ राहत/छूट के प्रावधान भी हैं जो रूसी ऊर्जा पर निर्भरता कम करने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति को भी कुछ परिस्थितियों में waiver से जुड़ी शक्तियां मिल सकती हैं।
यही कारण है कि भारत पर वास्तविक प्रभाव कानून बनने और उसके बाद अमेरिकी प्रशासन के फैसलों पर निर्भर करेगा।
भारत ने क्या कहा?
भारत ने अमेरिकी कदम पर प्रतिक्रिया देते हुए अपनी ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक हितों की रक्षा करने की बात कही है।
भारत का कहना है कि उसकी प्राथमिकता देश की बड़ी आबादी के लिए भरोसेमंद और किफायती ऊर्जा सुनिश्चित करना है और वह अपने ऊर्जा स्रोतों में विविधता बनाए रखेगा।
भारत ने यह भी आगाह किया है कि ऐसे tariff measures का द्विपक्षीय संबंधों पर असर पड़ सकता है।
भारत के लिए आगे क्या?
अब सबसे महत्वपूर्ण घटनाक्रम राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का फैसला होगा।
अगर बिल कानून बनता है, तो इसके बाद यह देखना होगा कि अमेरिकी प्रशासन भारत के रूसी तेल आयात को लेकर उपलब्ध tariff powers का इस्तेमाल करता है या किसी तरह की छूट/समझौते की गुंजाइश निकलती है।
फिलहाल सही स्थिति यही है—भारत पर नया 100% tariff अभी लागू नहीं हुआ है, लेकिन अमेरिकी विधेयक ने ऐसा tariff लगाने का रास्ता खोल दिया है।