UP चुनाव 2027: गोरखपुर में 62 सीटों का हिसाब लेंगे विनोद तावड़े, विधायकों-संगठन से फीडबैक; आजमगढ़-बस्ती पर नजर
BJP के UP चुनाव प्रभारी विनोद तावड़े दो दिन गोरखपुर में रहकर क्षेत्र की 62 विधानसभा सीटों की संगठनात्मक स्थिति पर फीडबैक लेंगे। सांसदों-विधायकों, जिलाध्यक्षों और पदाधिकारियों से अलग-अलग बैठकें होंगी।
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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच BJP के राष्ट्रीय महासचिव और प्रदेश चुनाव प्रभारी विनोद तावड़े गोरखपुर के दो दिवसीय दौरे पर हैं। तावड़े गोरखपुर क्षेत्र की 62 विधानसभा सीटों को लेकर संगठन के पदाधिकारियों, जिलाध्यक्षों, सांसदों, विधायकों और वरिष्ठ कार्यकर्ताओं से फीडबैक लेंगे। रिपोर्टों के मुताबिक उन सीटों पर खास ध्यान रहेगा जहां पिछले विधानसभा चुनाव में पार्टी का प्रदर्शन कमजोर रहा था, जबकि आजमगढ़ और बस्ती मंडल भी समीक्षा के केंद्र में रह सकते हैं।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | गोरखपुर | 17 सितंबर 2026
खबर में खास
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विनोद तावड़े का 17-18 सितंबर को गोरखपुर प्रवास
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गोरखपुर क्षेत्र की 62 विधानसभा सीटों पर समीक्षा
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सांसदों, विधायकों और संगठन पदाधिकारियों से संवाद
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आजमगढ़-बस्ती की कमजोर सीटों पर विशेष नजर की रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले BJP ने संगठनात्मक तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव प्रभारी विनोद तावड़े दो दिवसीय दौरे पर गोरखपुर पहुंचे हैं।
इस दौरे का मुख्य फोकस गोरखपुर क्षेत्र की 62 विधानसभा सीटों की संगठनात्मक स्थिति और जमीनी फीडबैक पर है। तावड़े अलग-अलग बैठकों में पार्टी पदाधिकारियों से लेकर सांसदों-विधायकों तक से संवाद करेंगे।
62 विधानसभा सीटों का लिया जाएगा फीडबैक
गोरखपुर क्षेत्र में प्रशासनिक रूप से 10 और BJP के संगठनात्मक ढांचे के हिसाब से 12 जिले शामिल बताए गए हैं।
तावड़े के दो दिवसीय प्रवास के दौरान इन क्षेत्रों की विधानसभा सीटों को लेकर स्थानीय नेताओं से फीडबैक लिया जाना है। संगठन की मौजूदा स्थिति, कार्यकर्ताओं की सक्रियता और जनप्रतिनिधियों के साथ समन्वय जैसे विषय बैठकों का हिस्सा होंगे।
सांसद-विधायकों से अलग बैठक
18 सितंबर को रानीडीहा स्थित BJP के क्षेत्रीय कार्यालय में बैठकों का महत्वपूर्ण दौर प्रस्तावित है।
क्षेत्रीय पदाधिकारियों, जिलाध्यक्षों और जिला महामंत्रियों से संवाद के बाद तावड़े सांसदों, विधायकों और विधान परिषद सदस्यों के साथ भी अलग बैठक करेंगे।
इसके बाद पूर्व सांसदों, पूर्व विधायकों और दूसरे वरिष्ठ नेताओं से भी संवाद का कार्यक्रम है।
इसका उद्देश्य अलग-अलग स्तरों से क्षेत्र की राजनीतिक और संगठनात्मक स्थिति का फीडबैक जुटाना है।
आजमगढ़ और बस्ती पर क्यों नजर?
रिपोर्टों के मुताबिक तावड़े का ध्यान उन क्षेत्रों पर अधिक रह सकता है जहां पिछले चुनाव में BJP का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर रहा था।
विशेष रूप से आजमगढ़ और बस्ती मंडल को लेकर समीक्षा की बात सामने आई है। स्थानीय पदाधिकारियों और नेताओं से वहां की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों के बारे में फीडबैक लिया जा सकता है।
हालांकि किन सीटों को BJP ने आधिकारिक तौर पर “कमजोर सीट” की श्रेणी में रखा है, इसकी कोई अंतिम सार्वजनिक सूची इन रिपोर्टों में नहीं दी गई है।
2022 में क्या था BJP का प्रदर्शन?
रिपोर्टों के मुताबिक गोरखपुर संगठनात्मक क्षेत्र की 62 विधानसभा सीटों में BJP ने 2022 के विधानसभा चुनाव में 46 सीटें जीती थीं। यानी पार्टी का प्रदर्शन इस क्षेत्र में मजबूत रहा था, लेकिन आजमगढ़ और बस्ती जैसे कुछ हिस्सों में चुनौतियां बनी रहीं।
2024 के लोकसभा चुनाव के बाद पार्टी इस पूरे क्षेत्र में अपने संगठनात्मक और सामाजिक समीकरणों की भी समीक्षा कर रही है।
मीडिया और सोशल मीडिया टीम से भी बैठक
तावड़े के कार्यक्रम में सिर्फ विधानसभा सीटों और जनप्रतिनिधियों की बैठक ही शामिल नहीं है।
क्षेत्रीय और जिला स्तर की मीडिया एवं सोशल मीडिया टीम के साथ भी अलग बैठक प्रस्तावित है। इसमें पार्टी के कार्यक्रमों और संगठनात्मक गतिविधियों को डिजिटल माध्यमों के जरिए जनता तक पहुंचाने के तरीकों पर चर्चा होगी।
पहले दिन ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम
17 सितंबर को PM नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के मौके पर चल रहे सेवा कार्यक्रमों के तहत तावड़े सहजनवा विधानसभा क्षेत्र स्थित अटल आवासीय विद्यालय में ‘आशीर्वाद का दीया’ और मिष्ठान वितरण कार्यक्रम में भी शामिल होंगे।
इसके बाद दूसरे दिन संगठनात्मक बैठकों का मुख्य दौर चलेगा और 18 सितंबर की शाम तावड़े के अयोध्या रवाना होने का कार्यक्रम है।
क्या विधायकों के टिकट पर भी होगा फैसला?
फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टिंग से यह कहना जल्दबाजी होगी कि इस गोरखपुर दौरे में किसी विधायक का टिकट काटने या उम्मीदवार तय करने पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
दौरे का पुष्ट फोकस संगठनात्मक समीक्षा, 62 सीटों की स्थिति और स्थानीय नेताओं व जनप्रतिनिधियों से फीडबैक लेना है। आगे उम्मीदवार चयन में ऐसे फीडबैक का उपयोग किस तरह होगा, यह पार्टी की बाद की प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।
