वडोदरा में फिर गूंजा PM मोदी का ‘नाराज फूफा जी’ वाला तंज, बोले—देश आगे बढ़ता रहा और ये हर काम में कमी निकालते रहे
‘नाराज फूफा जी’ का उदाहरण देकर प्रधानमंत्री मोदी ने विपक्ष को घेरा, कहा—कुछ लोग देश की प्रगति से कभी खुश नहीं हो सकते
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वडोदरा के ‘नमो फॉर विकसित भारत’ कार्यक्रम में एक बार फिर ‘नाराज फूफा जी’ वाली टिप्पणी दोहराई। उन्होंने कहा कि देश विकास के रास्ते पर आगे बढ़ता रहा, लेकिन कुछ लोग हर काम का विरोध करते हुए उसमें कमी निकालते रहे।
वडोदरा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के वडोदरा में आयोजित ‘नमो फॉर विकसित भारत’ कार्यक्रम के मंच से विपक्ष पर जमकर निशाना साधा। विकास परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने एक बार फिर ‘नाराज फूफा जी’ का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि देश लगातार आगे बढ़ रहा है, लेकिन कुछ लोग ऐसे हैं जिन्हें किसी भी विकास कार्य से खुशी नहीं होती।
पीएम मोदी ने कहा कि सरकार कोई नया काम शुरू करे तो ये ‘नाराज फूफा जी’ तुरंत पूछने लगते हैं कि इसकी जरूरत क्या थी। प्रधानमंत्री के इस चुटीले अंदाज पर कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने तालियां बजाईं और सोशल मीडिया पर भी उनका बयान चर्चा में आ गया।
‘नाराज फूफा जी’ पर PM मोदी ने क्या कहा?
प्रधानमंत्री मोदी ने विपक्ष का नाम लिए बिना कहा कि कुछ लोग कभी खुश नहीं हो सकते। उन्होंने पारिवारिक समारोह का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस प्रकार शादी में सारी व्यवस्था अच्छी होने के बाद भी ‘नाराज फूफा जी’ कोई न कोई कमी निकाल लेते हैं, उसी प्रकार कुछ लोग सरकार के हर काम का विरोध करते हैं।
पीएम मोदी के मुताबिक, ऐसे लोगों का स्थायी सवाल होता है—“इसकी क्या जरूरत थी?” उन्होंने कहा कि नई सड़क बने, रेलवे लाइन तैयार हो, स्टेशन आधुनिक बनाए जाएं या कोई दूसरी विकास परियोजना शुरू हो, ये लोग हर बार विरोध का कारण खोज लेते हैं।
देश आगे बढ़ा, ‘नाराज फूफा जी’ विरोध करते रहे
प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले वर्षों में भारत ने सड़क, रेल, ऊर्जा, डिजिटल तकनीक और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में तेज प्रगति की है। इसके बावजूद ‘नाराज फूफा जी’ की भूमिका निभाने वाले लोग कभी इन उपलब्धियों से खुश नहीं हुए।
उन्होंने दावा किया कि उनकी सरकार ने उन परियोजनाओं को पूरा किया, जो पिछली सरकारों के दौरान वर्षों तक कागजों और सरकारी फाइलों में अटकी रहीं। पीएम मोदी ने इसे पहले की कार्यसंस्कृति और वर्तमान सरकार की गति के बीच अंतर बताया।
फ्रेट कॉरिडोर का जिक्र कर ‘नाराज फूफा जी’ पर निशाना
वडोदरा के कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि लगभग 2,800 किलोमीटर से अधिक लंबे फ्रेट कॉरिडोर की कल्पना वर्ष 2004 में की गई थी, लेकिन 2014 तक इसकी फाइलें एक टेबल से दूसरी टेबल तक घूमती रहीं।
प्रधानमंत्री के अनुसार, यदि परियोजना पुरानी रफ्तार से आगे बढ़ती तो इसे पूरा होने में कई पीढ़ियां लग जातीं। मोदी ने कहा कि उनकी सरकार ने कार्यप्रणाली बदली और परियोजना को तेजी से पूरा किया।
वडोदरा दौरे के दौरान प्रधानमंत्री ने करीब ₹35,000 करोड़ से अधिक की विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इनमें पश्चिमी डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के तीन सेक्शन, नई रेल परियोजनाएं, हाईवे और गुजरात से संबंधित दूसरे विकास कार्य शामिल हैं।
‘नाराज फूफा जी’ को ट्रक वालों की चिंता क्यों होगी?
डबल-स्टैक कंटेनर ट्रेन का उदाहरण देते हुए पीएम मोदी ने कहा कि एक मालगाड़ी एक साथ 250 से अधिक ट्रकों के बराबर सामान पहुंचा सकती है। इससे माल परिवहन तेज होगा, सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव घटेगा और लॉजिस्टिक्स की लागत कम करने में मदद मिल सकती है।
इसके बाद प्रधानमंत्री ने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि ‘नाराज फूफा जी’ अब यह सवाल उठा सकते हैं कि ट्रक वालों का क्या होगा और ट्रक कहां जाएंगे।
हालांकि प्रधानमंत्री ने कहा कि ट्रकों की जरूरत समाप्त नहीं होगी। माल को रेलवे टर्मिनल तक पहुंचाने और वहां से शहरों, बाजारों तथा कारखानों तक ले जाने के लिए ट्रक परिवहन की भूमिका बनी रहेगी।
दिल्ली के बाद वडोदरा में भी ‘नाराज फूफा जी’
इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली विश्वविद्यालय के श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स के शताब्दी समारोह में भी ‘नाराज फूफा जी’ वाला बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि देश में कुछ लोग हर नए काम का विरोध करना अपना पसंदीदा काम बना चुके हैं।
अब वडोदरा के मंच से इसी टिप्पणी को दोहराकर पीएम मोदी ने साफ कर दिया कि आने वाले समय में भाजपा विकास परियोजनाओं की आलोचना करने वाले विपक्ष को ‘नाराज फूफा जी’ के राजनीतिक नैरेटिव से घेर सकती है।
विपक्ष ने ‘नाराज फूफा जी’ वाले तंज पर किया पलटवार
प्रधानमंत्री के बयान पर कांग्रेस और दूसरे विपक्षी दलों ने भी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने आरोप लगाया कि सरकार अपनी कमियों को छिपाने के लिए विपक्ष को नए-नए नाम दे रही है।
विपक्ष का कहना है कि सरकार से बेरोजगारी, महंगाई, पेपर लीक और विकास परियोजनाओं के खर्च पर सवाल पूछना नकारात्मकता नहीं, बल्कि लोकतंत्र में विपक्ष की जिम्मेदारी है। वहीं भाजपा का कहना है कि विपक्ष सकारात्मक कार्यों को स्वीकार करने के बजाय हर परियोजना का विरोध करता है।
सियासत में कितना चलेगा ‘नाराज फूफा जी’ वाला नैरेटिव?
पीएम मोदी अपने भाषणों में आम बोलचाल के उदाहरणों के माध्यम से राजनीतिक संदेश देने के लिए जाने जाते हैं। ‘नाराज फूफा जी’ वाली टिप्पणी भी इसी रणनीति का हिस्सा दिखाई देती है। इसके जरिए वह विकास का विरोध करने के आरोप में विपक्ष को घेरने की कोशिश कर रहे हैं।
अब सवाल यह है कि ‘नाराज फूफा जी’ वाला तंज जनता के बीच भाजपा के पक्ष में माहौल बनाएगा या विपक्ष इसे महंगाई और रोजगार जैसे मुद्दों से ध्यान हटाने का तरीका साबित करने में सफल होगा।
