राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ पर ₹10 लाख की फीस से विवाद, कांग्रेस ने अटल बिहारी वाजपेयी का दिया उदाहरण
इंदौर में राहुल गांधी के 19 सितंबर के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को लेकर विवाद बढ़ गया है। कांग्रेस ने अनुमति में देरी और करीब ₹10 लाख फीस लेने पर सवाल उठाते हुए अटल बिहारी वाजपेयी के दौर का उदाहरण दिया है।
इंदौर में 19 सितंबर को राहुल गांधी का ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम होना है। कांग्रेस ने कार्यक्रम स्थल की अनुमति और करीब ₹10 लाख की फीस को लेकर प्रशासन पर सवाल उठाए हैं। पार्टी नेता मुकेश नायक ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के विपक्ष में रहने के दौर का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय सरकार और प्रशासन विपक्ष के कार्यक्रमों में सहयोग करते थे। इससे पहले कांग्रेस को जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम की अनुमति नहीं मिली थी, जिसके बाद रीजनल पार्क के सामने जमीन ली गई।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | इंदौर | 16 सितंबर 2026
राहुल गांधी के इंदौर कार्यक्रम के आयोजन स्थल और किराये को लेकर कांग्रेस ने प्रशासन पर सवाल उठाए हैं।
खबर में खास
19 सितंबर को इंदौर में राहुल गांधी का कार्यक्रम
कांग्रेस ने करीब ₹10 लाख फीस पर उठाए सवाल
अनुमति में देरी का भी लगाया आरोप
अटल बिहारी वाजपेयी के दौर का दिया उदाहरण
इंदौर में राहुल गांधी के प्रस्तावित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को लेकर कांग्रेस और प्रशासन के बीच विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है।
राहुल गांधी 19 सितंबर को इंदौर में छात्रों और युवाओं से संवाद करने वाले हैं।
कार्यक्रम से पहले कांग्रेस ने आयोजन स्थल की अनुमति और उसके लिए ली गई रकम को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
कांग्रेस ने प्रशासन पर क्या आरोप लगाया?
मध्य प्रदेश कांग्रेस के मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक ने इंदौर प्रेस क्लब में पत्रकारों से बातचीत के दौरान आरोप लगाया कि राहुल गांधी के कार्यक्रम की अनुमति देने में प्रशासन ने जानबूझकर देरी की।
उन्होंने करीब ₹10 लाख की फीस लिए जाने पर भी सवाल उठाया।
नायक ने पूछा कि क्या इंदौर में इससे पहले किसी राजनीतिक दल या बड़े नेता के कार्यक्रम के लिए इतनी रकम ली गई है।
यह कांग्रेस की ओर से लगाया गया आरोप है।
आखिर ₹10 लाख किस बात के लिए दिए गए?
इस मामले में एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है।
कांग्रेस पहले राहुल गांधी का कार्यक्रम जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में करना चाहती थी।
लेकिन वहां कार्यक्रम की अनुमति नहीं मिली।
इसके बाद कांग्रेस ने इंदौर विकास प्राधिकरण यानी IDA से रीजनल पार्क के सामने करीब 12,000 वर्ग मीटर जमीन तीन दिनों के लिए ली।
इसके लिए करीब ₹10.08 लाख किराया तय किया गया और कांग्रेस ने यह रकम जमा की।
यानी इसे सीधे प्रशासन द्वारा लगाई गई “जुर्माना फीस” कहना सही नहीं होगा; उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक रकम वैकल्पिक आयोजन स्थल के किराये से जुड़ी है।
कांग्रेस ने क्यों याद दिलाया वाजपेयी का दौर?
मुकेश नायक ने मौजूदा विवाद के बीच पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का उदाहरण दिया।
उन्होंने कहा कि जब वाजपेयी विपक्ष में थे और उनके कार्यक्रम आयोजित होते थे, तब सरकार और स्थानीय प्रशासन सहयोग करता था और लोकतांत्रिक मर्यादाओं का पालन किया जाता था।
कांग्रेस इसी उदाहरण के जरिए मौजूदा प्रशासन के रवैये पर सवाल उठा रही है।
राहुल गांधी को पहले स्टेडियम क्यों नहीं मिला?
कांग्रेस शुरुआत में 12 सितंबर को इंदौर के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में कार्यक्रम करना चाहती थी।
इंदौर के मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा था कि मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के पुराने आदेश के कारण स्टेडियम का इस्तेमाल केवल खेल आयोजनों या राज्य स्तरीय सरकारी कार्यक्रमों के लिए किया जा सकता है।
इसके बाद कार्यक्रम की तारीख बदलकर 19 सितंबर कर दी गई और वैकल्पिक जगह ली गई।
कांग्रेस ने नई जगह का नाम रखा ‘भारत जोड़ो मैदान’
रीजनल पार्क के सामने मिली जमीन को कांग्रेस ने ‘भारत जोड़ो मैदान’ नाम दिया है।
कांग्रेस का दावा है कि राहुल गांधी के कार्यक्रम के लिए करीब 1.5 लाख छात्रों ने registration कराया है।
यह संख्या कांग्रेस का दावा है; इसे स्वतंत्र रूप से सत्यापित registration count नहीं माना जाना चाहिए।
क्या है राहुल गांधी का ‘छात्रों की गूंज’ अभियान?
‘छात्रों की गूंज’ राहुल गांधी का छात्रों और युवाओं से संवाद का अभियान है।
इसके जरिए राहुल गांधी पेपर लीक, महंगी शिक्षा, सरकारी भर्तियों में कथित गड़बड़ी और बेरोजगारी जैसे मुद्दे उठा रहे हैं।
इंदौर से पहले कोटा, देहरादून, प्रयागराज और पुणे में इस अभियान के कार्यक्रम हो चुके हैं।
19 सितंबर से पहले तेज हुई राजनीति
राहुल गांधी के इंदौर पहुंचने से पहले कार्यक्रम स्थल और फीस का मुद्दा राजनीतिक विवाद बन गया है।
कांग्रेस प्रशासन के रवैये पर सवाल उठा रही है, जबकि स्टेडियम की अनुमति नहीं देने के पीछे हाई कोर्ट के पुराने आदेश का हवाला दिया गया है।
अब 19 सितंबर को होने वाले राहुल गांधी के कार्यक्रम में शिक्षा, रोजगार, पेपर लीक और सरकारी भर्ती जैसे छात्र मुद्दों पर क्या कहा जाता है, इस पर भी नजर रहेगी।