SIR विवाद: Form-6 किसने बदला? SC ने रिकॉर्ड मांगा, कहा—‘हमने बदलाव मंजूर नहीं किया’

CEC ज्ञानेश कुमार से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत की टिप्पणी; अदालत देखेगी Form-6 में बदलाव किसने किया और फैसला सर्वसम्मति या बहुमत से हुआ था या नहीं

SIR विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट ने Form-6 को लेकर अहम टिप्पणी की है। CJI सूर्यकांत ने साफ किया कि अदालत ने किसी modified Form-6 को मंजूरी नहीं दी थी। कोर्ट ने चुनाव आयोग से रिकॉर्ड पेश करने को कहा है ताकि यह देखा जा सके कि बदलाव किसने किया और संबंधित फैसले आयोग ने सर्वसम्मति, बहुमत या किसी अन्य तरीके से लिए थे।

Form-6 पर अब रिकॉर्ड देखेगा सुप्रीम कोर्ट

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सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि modified Form-6 को उसने मंजूरी नहीं दी और संबंधित रिकॉर्ड चुनाव आयोग से मांगा है।

प्रत्यक्षदर्शी समाचार | राष्ट्रीय डेस्क | 5 अक्टूबर 2026

खबर में खास

  • Supreme Court ने कहा—Modified Form-6 को हमने मंजूरी नहीं दी
  • अदालत ने पूछा—Form-6 में बदलाव आखिर किसने किया?
  • चुनाव आयोग से संबंधित फैसलों का रिकॉर्ड मांगा गया
  • कोर्ट देखेगा फैसला सर्वसम्मति या बहुमत से हुआ था या नहीं
  • मामला SIR के दौरान नए मतदाताओं के पंजीकरण से जुड़े Form-6 declaration का
  • नए declaration में पुराने SIR electoral roll से जुड़ी जानकारी मांगी जा रही है
  • दो चुनाव आयुक्तों की कथित आपत्तियां भी याचिका का हिस्सा
  • CJI ने कहा कि गैरकानूनी काम सामने आया तो उसके परिणाम होंगे
  • CEC ज्ञानेश कुमार को फिलहाल suspend करने का अंतरिम आदेश नहीं दिया गया
  • केंद्र और चुनाव आयोग से जवाब मांगा गया है

Form-6 पर सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी

नई दिल्ली: मतदाता सूची के Special Intensive Revision यानी SIR को लेकर जारी विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट ने नए मतदाताओं के पंजीकरण में इस्तेमाल होने वाले Form-6 पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने सोमवार को साफ किया कि सुप्रीम कोर्ट ने किसी modified Form-6 को मंजूरी नहीं दी है। अदालत ने चुनाव आयोग से संबंधित रिकॉर्ड पेश करने को भी कहा है। 
मामले की सुनवाई CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की तीन सदस्यीय पीठ कर रही है। 

कोर्ट ने पूछा—Form-6 किसने बदला?

सुनवाई का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा उस समय सामने आया जब अदालत के सामने SIR के दौरान इस्तेमाल किए जा रहे Form-6 और उससे जुड़े declaration में बदलाव का मुद्दा रखा गया।
CJI ने स्पष्ट किया:

“Modified Form-6 को हमने मंजूरी नहीं दी।”

इसके बाद अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड आने पर वह यह देखना चाहेगी कि आखिर Form-6 में बदलाव किसने किया था। 
यही सवाल अब इस मामले की अगली सुनवाई का प्रमुख हिस्सा बन सकता है।

आखिर Form-6 होता क्या है?

Form-6 का इस्तेमाल सामान्य तौर पर नए मतदाता के रूप में नाम जुड़वाने के लिए किया जाता है।
चुनाव आयोग के आधिकारिक voter portal पर भी 18 साल या उससे अधिक उम्र के पात्र नागरिकों के लिए नए voter registration में Form-6 भरने की व्यवस्था है। Voter Services
SIR वाले राज्यों में इसके साथ एक अलग declaration form भी उपलब्ध कराया गया है। आयोग के आधिकारिक SIR दस्तावेजों में Form-6 के साथ prescribed declaration form जमा करने की व्यवस्था का उल्लेख है। Election Commission of India

विवाद किस बदलाव पर है?

विवाद मुख्य Form-6 के साथ जोड़े गए SIR declaration से जुड़ा है।
इसमें नए मतदाता से यह बताने को कहा जाता है कि उसका नाम या उसके माता-पिता का नाम पहले हुए intensive revision की electoral roll में दर्ज था या नहीं।
इसी अतिरिक्त declaration की वैधानिक प्रक्रिया को लेकर अदालत में सवाल उठाए गए हैं।

दो चुनाव आयुक्तों की आपत्ति का भी मुद्दा

याचिका में दावा किया गया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने Form-6 से जुड़े बदलावों पर आपत्ति जताई थी।

रिपोर्ट के अनुसार उनकी आपत्ति का आधार यह था कि Registration of Electors Rules, 1960 के तहत निर्धारित form में इस तरह का बदलाव सिर्फ प्रशासनिक निर्देश से नहीं किया जा सकता और इसके लिए नियमों में उचित कानूनी संशोधन की जरूरत हो सकती है। 

हालांकि इन आपत्तियों और अंतिम निर्णय प्रक्रिया की वास्तविक स्थिति अब अदालत मांगे गए रिकॉर्ड देखकर जांचेगी।

कोर्ट देखेगा—फैसला अकेले हुआ या पूरे आयोग ने लिया?

सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से फैसलों का रिकॉर्ड पेश करने को कहा है।
अदालत यह पता लगाना चाहती है कि जिन फैसलों को याचिकाओं में चुनौती दी गई है, उन्हें CEC ने अकेले लिया था या तीन सदस्यीय आयोग ने सर्वसम्मति अथवा बहुमत से मंजूरी दी थी।
CJI ने सुनवाई में यह भी कहा कि अगर आयोग के सदस्यों के बीच सर्वसम्मति नहीं बनती है तो फैसला बहुमत के आधार पर होना चाहिए। 

‘गैरकानूनी हुआ तो नतीजे होंगे’

सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने एक और महत्वपूर्ण टिप्पणी की।
उन्होंने संकेत दिया कि अगर जांच में कोई कार्रवाई कानून के अनुरूप नहीं पाई जाती है तो उसके परिणाम भी हो सकते हैं। AajTak
लेकिन यहां ध्यान रखना जरूरी है कि सुप्रीम कोर्ट ने अभी यह फैसला नहीं दिया है कि Form-6 का बदलाव गैरकानूनी था।
अदालत पहले रिकॉर्ड और चुनाव आयोग का पक्ष देखेगी।

क्या कोर्ट फैसले रद्द भी कर सकता है?

सुनवाई के दौरान अदालत ने संकेत दिया कि रिकॉर्ड देखने के बाद अगर पता चलता है कि किसी फैसले के लिए जरूरी सामूहिक निर्णय प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया था तो उस फैसले पर दोबारा विचार किया जा सकता है।
इसका मतलब यह नहीं है कि कोई निर्णय अभी रद्द हो गया है।
फिलहाल कोर्ट ने केवल रिकॉर्ड और जवाब मांगा है।

चुनाव आयोग ने पहले क्या कहा था?

26 सितंबर को चुनाव आयोग ने SIR declaration को लेकर अपना पक्ष रखा था।
उसमें कहा गया था कि Form-6 से जुड़ा declaration SIR प्रक्रिया के लिए है और बिहार SIR से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी संदर्भ दिया गया था। 
अब CJI की टिप्पणी ने स्पष्ट कर दिया है कि modified Form-6 को सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी नहीं दी गई थी। 
यही कारण है कि आने वाली सुनवाई में इस मुद्दे से जुड़ा रिकॉर्ड महत्वपूर्ण रहेगा।

SIR वाले राज्यों में declaration अभी कहां लागू है?

चुनाव आयोग के voter portal पर SIR-2026 के लिए नए मतदाता पंजीकरण के साथ Form-6 और अलग Declaration Form दोनों विकल्प उपलब्ध हैं। 
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक जिन राज्यों में SIR पूरा हो चुका है वहां अतिरिक्त declaration को सामान्य enrollment प्रक्रिया से हटा दिया गया है, जबकि जहां SIR जारी है वहां यह व्यवस्था लागू है। 

याचिका में 14 फैसलों पर सवाल

अदालत के सामने मौजूद एक याचिका में चुनाव आयोग के 14 कथित एकतरफा फैसलों को चुनौती दी गई है।
याचिकाकर्ता का आरोप है कि इन फैसलों में आवश्यक सामूहिक प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। इस मामले में स्वतंत्र जांच और जिम्मेदारी तय करने समेत कई मांगें की गई हैं। 
ये फिलहाल याचिकाकर्ता के आरोप हैं, अदालत के स्थापित निष्कर्ष नहीं।

ज्ञानेश कुमार के निलंबन पर क्या हुआ?

इसी सुनवाई से जुड़े दूसरे महत्वपूर्ण मुद्दे में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को तत्काल निलंबित करने की मांग की गई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने बिना दूसरे पक्ष को सुने ऐसा अंतरिम आदेश जारी करने से इनकार कर दिया है।
कोर्ट ने चुनाव आयोग और संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर उनका जवाब मांगा है।
इसलिए यह कहना गलत होगा कि ज्ञानेश कुमार को क्लीन चिट मिल गई है या पूरा मामला खारिज हो गया है।

अब आगे क्या होगा?

अब इस मामले में सबसे अहम चीज चुनाव आयोग का रिकॉर्ड और उसका जवाब होगा।
सुप्रीम कोर्ट इसके आधार पर देखेगा:
Form-6 में बदलाव किसने किया?
क्या पूरे आयोग ने इसे मंजूरी दी थी?
क्या कोई मतभेद दर्ज किया गया था?
और क्या अपनाई गई प्रक्रिया मौजूदा चुनावी कानून और नियमों के अनुरूप थी?
इन सवालों के जवाब के बाद ही अदालत आगे की कार्रवाई पर फैसला करेगी।
SIR और Form-6 का विवाद अब सिर्फ राजनीतिक आरोपों तक सीमित नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि modified Form-6 को उसने मंजूरी नहीं दी थी और अब वह रिकॉर्ड देखकर यह जानना चाहता है कि बदलाव किसने किया तथा फैसले की प्रक्रिया क्या थी। इसलिए अगली सुनवाई में चुनाव आयोग की ओर से पेश होने वाले रिकॉर्ड इस मामले की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होंगे।

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