महिला पत्रकारों के आरोपों पर राहुल गांधी ने अमित शाह को घेरा, बोले—CCTV सार्वजनिक करो; जांच Crime Branch को
जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान तीन महिला पत्रकारों ने पुलिसकर्मियों पर यौन उत्पीड़न और बदसलूकी के आरोप लगाए; दिल्ली पुलिस ने शिकायतें Crime Branch को भेजीं, राहुल गांधी ने साकेत थाने का CCTV भी सार्वजनिक करने की मांग की
दिल्ली में महिलाओं और पत्रकारों के साथ कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर राहुल गांधी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और दिल्ली पुलिस पर सवाल उठाए हैं। जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान तीन महिला पत्रकारों ने पुलिसकर्मियों पर यौन उत्पीड़न और बदसलूकी के आरोप लगाए हैं। उनकी शिकायतें Crime Branch को जांच के लिए भेजी गई हैं। राहुल गांधी ने साकेत पुलिस स्टेशन का पूरा CCTV फुटेज सार्वजनिक करने और दोषी पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग की है।
महिला पत्रकारों के आरोपों पर बढ़ा विवाद, राहुल ने मांगा CCTV
महिला पत्रकारों की शिकायतों को Crime Branch को भेजे जाने के बीच राहुल गांधी ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | राष्ट्रीय डेस्क | 5 अक्टूबर 2026
खबर में खास
जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान तीन महिला पत्रकारों ने पुलिसकर्मियों पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए
शिकायतें Crime Branch को जांच के लिए भेजी गईं
जांच में CCTV फुटेज और उपलब्ध वीडियो की पड़ताल की जा रही है
राहुल गांधी ने महिलाओं और पत्रकारों के साथ कथित व्यवहार पर सवाल उठाए
गृह मंत्री अमित शाह से जवाब मांगा
साकेत थाने का पूरा CCTV सार्वजनिक करने की मांग
सितंबर की साकेत घटना का भी राहुल गांधी ने किया जिक्र
साकेत मामले में दो महिला पत्रकारों ने मारपीट के आरोप लगाए थे
दिल्ली पुलिस ने साकेत मामले के आरोपों को पहले गलत और भ्रामक बताया था
जंतर-मंतर के मामले में पुलिस ने शिकायतों को जांच के लिए Crime Branch के पास भेजा है
महिला पत्रकारों के आरोपों के बाद राहुल गांधी ने उठाए सवाल
नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान महिलाओं और पत्रकारों के साथ कथित पुलिस व्यवहार को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने दिल्ली पुलिस पर सवाल उठाते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से जवाब मांगा है।
राहुल गांधी का आरोप है कि विरोध प्रदर्शन के दौरान महिला प्रदर्शनकारियों और पत्रकारों के साथ गलत व्यवहार किया गया। उन्होंने महिला पत्रकारों के कैमरे छीने जाने और उन्हें कथित तौर पर खींचे जाने जैसे आरोपों का भी जिक्र किया। ये राहुल गांधी की ओर से लगाए गए आरोप हैं और इनकी जांच जारी है।
तीन महिला पत्रकारों ने क्या आरोप लगाए?
मामला 3 अक्टूबर को दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए प्रदर्शन से जुड़ा है।
इस दौरान तीन महिला पत्रकारों ने दिल्ली पुलिस के कर्मचारियों और अधिकारियों पर यौन उत्पीड़न और गलत व्यवहार के आरोप लगाए।
एक शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन की रिपोर्टिंग करते समय एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने उन्हें गलत तरीके से छुआ और धक्का दिया। अन्य शिकायतों में भी हिरासत और पुलिस कार्रवाई के दौरान कथित बदसलूकी का आरोप लगाया गया है।
अभी ये आरोप जांच के अधीन हैं और किसी पुलिसकर्मी के खिलाफ दोष सिद्ध नहीं हुआ है।
Crime Branch को सौंपी गई जांच
दिल्ली पुलिस ने कहा है कि तीनों महिलाओं की शिकायतें प्राप्त हुई हैं और मामले को Crime Branch के पास निष्पक्ष जांच के लिए भेजा गया है।
जांच में संबंधित लोगों के बयान दर्ज करने के साथ CCTV और दूसरे उपलब्ध वीडियो फुटेज की जांच की जा रही है। पुलिस ने घटना से जुड़ा वीडियो रखने वाले लोगों से भी जांच एजेंसी के साथ सामग्री साझा करने की अपील की है।
FIR को लेकर क्यों हो रहा प्रदर्शन?
महिला पत्रकारों की शिकायत के बाद विवाद का एक प्रमुख मुद्दा FIR दर्ज करने की मांग भी है।
सोमवार को कई पत्रकार, कार्यकर्ता और प्रदर्शनकारी संसद मार्ग पुलिस स्टेशन के बाहर पहुंचे और FIR दर्ज करने तथा मामले की जांच की मांग की। पुलिस ने वहां मौजूद कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में भी लिया।
राहुल गांधी ने भी सवाल उठाया कि महिला पत्रकार की शिकायत पर FIR क्यों नहीं दर्ज की गई।
राहुल गांधी ने अमित शाह से क्या पूछा?
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि दिल्ली में सवाल उठाने वाली महिलाओं के खिलाफ कार्रवाई का एक पैटर्न दिखाई दे रहा है।
उन्होंने इस मामले को सीधे केंद्रीय गृह मंत्रालय से जोड़ते हुए अमित शाह से जवाब मांगा, क्योंकि दिल्ली पुलिस केंद्रीय गृह मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में आती है।
राहुल गांधी ने मांग की कि आरोपों की निष्पक्ष जांच हो और यदि कोई पुलिसकर्मी दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाए।
साकेत पुलिस स्टेशन का CCTV क्यों मांगा?
राहुल गांधी ने मौजूदा जंतर-मंतर विवाद के साथ सितंबर में सामने आए एक पुराने मामले का भी जिक्र किया।
उस मामले में महिला पत्रकार शाहीन खान और नफीसा खान ने आरोप लगाया था कि उन्हें दिल्ली के साकेत पुलिस स्टेशन ले जाया गया और वहां उनके साथ मारपीट और गलत व्यवहार किया गया।
राहुल गांधी ने अब मांग की है कि साकेत पुलिस स्टेशन का पूरा CCTV फुटेज सार्वजनिक किया जाए, ताकि घटना को लेकर उठे सवालों की स्थिति साफ हो सके।
साकेत मामले पर पुलिस का क्या पक्ष था?
यहां पुलिस का पक्ष भी महत्वपूर्ण है।
सितंबर में जब दोनों महिला पत्रकारों ने साकेत थाने में मारपीट के आरोप लगाए थे, तब दिल्ली पुलिस ने इन आरोपों को “factually incorrect and misleading” बताया था।
पुलिस का कहना था कि दोनों महिलाओं ने VVIP route के पास अपना वाहन खड़ा किया था और निर्देशों का पालन नहीं किया, जिसके बाद कार्रवाई की गई।
इसलिए साकेत मामले में राहुल गांधी के आरोपों को पुलिस का स्थापित अपराध मानना सही नहीं होगा—दोनों पक्षों के दावे अलग हैं।
जंतर-मंतर पर आखिर प्रदर्शन किस बात को लेकर था?
3 अक्टूबर को दिल्ली में प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची की Special Intensive Revision यानी SIR प्रक्रिया को लेकर किया जा रहा था।
प्रदर्शनकारियों ने SIR और मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाए थे।
दिल्ली पुलिस के मुताबिक इलाके में BNSS की धारा 163 के तहत प्रतिबंध लागू थे और प्रदर्शन के लिए आवश्यक अनुमति नहीं थी। पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारियों को क्षेत्र खाली करने के निर्देश दिए गए थे।
महिला पत्रकार भी हुईं हिरासत में
3 अक्टूबर के प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिया गया था।
पुलिस कार्रवाई के दौरान पत्रकारों और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की की भी तस्वीरें सामने आई थीं। तीन महिला पत्रकारों का आरोप है कि इसी कार्रवाई के दौरान उनके साथ यौन उत्पीड़न और गलत व्यवहार हुआ।
मामले की गंभीरता को देखते हुए शिकायतों की जांच जिला स्तर से हटाकर Crime Branch को दी गई है।
सोमवार को फिर पुलिस स्टेशन के बाहर प्रदर्शन
5 अक्टूबर को यह विवाद एक बार फिर तब बढ़ा जब पत्रकार और कार्यकर्ता संसद मार्ग पुलिस स्टेशन के बाहर पहुंचे।
उनकी मांग थी कि महिलाओं की शिकायतों पर FIR दर्ज की जाए और कथित तौर पर जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
इस दौरान 17 लोगों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई, जिनमें पत्रकार और एक शिकायतकर्ता भी शामिल थीं। पुलिस के मुताबिक इलाके में प्रतिबंध लागू थे और लोगों से वहां से हटने के लिए कहा गया था।
अब जांच में क्या होगा?
Crime Branch के सामने अब मुख्य तौर पर चार चीजें महत्वपूर्ण होंगी:
पहला—प्रदर्शन स्थल और आसपास के CCTV फुटेज में क्या दिखाई देता है?
दूसरा—महिला पत्रकारों के आरोपों की पुष्टि उपलब्ध वीडियो या गवाहों से होती है या नहीं?
तीसरा—पुलिस कार्रवाई तय नियमों के अनुसार हुई या नहीं?
चौथा—शिकायतों के आधार पर किसी पुलिस अधिकारी के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने की जरूरत बनती है या नहीं?
पुलिस ने कहा है कि जांच निष्पक्ष तरीके से की जाएगी।
जंतर-मंतर पर महिला पत्रकारों के आरोप अब राजनीतिक विवाद के साथ पुलिस जांच का विषय भी बन चुके हैं। राहुल गांधी ने सीधे गृह मंत्री अमित शाह से जवाब और CCTV सार्वजनिक करने की मांग की है, जबकि दिल्ली पुलिस ने शिकायतें Crime Branch को सौंप दी हैं। अब इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण चीज जांच में सामने आने वाला CCTV, दूसरे वीडियो और गवाहों के बयान होंगे, जिनसे आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी।