‘14 बार असहमति तानाशाही नहीं, चेक-बैलेंस है’; राहुल गांधी के ‘वोट चोरी’ आरोप पर संबित पात्रा का पलटवार
चुनाव आयोग के दो आयुक्तों द्वारा कथित रूप से 14 बार आपत्ति दर्ज कराने की रिपोर्ट पर सियासी घमासान तेज हो गया है। राहुल गांधी के गंभीर आरोपों के बाद BJP नेता संबित पात्रा ने आयोग का बचाव किया है।
संबित पात्रा ने कहा कि चुनाव आयुक्तों के बीच सवाल और असहमति लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है। इसे तानाशाही या वोट चोरी का प्रमाण बताना गलत है। राहुल गांधी ने इस मामले को संविधान पर हमला और देशद्रोह बताया था।
14 बार असहमति तानाशाही नहीं, चेक-बैलेंस है’; राहुल गांधी के ‘वोट चोरी’ आरोप पर संबित पात्रा का पलटवार
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | राष्ट्रीय डेस्क | 23 सितंबर 2026
खबर में खास
- चुनाव आयोग के अंदर कथित मतभेद पर बढ़ा राजनीतिक विवाद
- राहुल गांधी ने BJP और चुनाव आयोग पर लगाए गंभीर आरोप
- संबित पात्रा बोले—असहमति लोकतांत्रिक चेक-बैलेंस का हिस्सा
- चुनाव आयोग ने कहा—SIR सहित सभी अंतिम फैसले सर्वसम्मति से हुए
चुनाव आयोग और Special Intensive Revision यानी SIR को लेकर जारी विवाद में BJP नेता संबित पात्रा ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर पलटवार किया है। पात्रा ने कहा कि चुनाव आयुक्तों के बीच सवाल, सुझाव या किसी मुद्दे पर असहमति होना लोकतांत्रिक व्यवस्था में चर्चा और आंतरिक चेक-बैलेंस की निशानी है। इसे तानाशाही या चुनाव आयोग की विफलता बताना गलत है।
संबित पात्रा का यह बयान उस रिपोर्ट के बाद आया है, जिसमें दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में चुनाव आयोग के विभिन्न फैसलों पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्ति दर्ज कराई थी।
राहुल गांधी ने लगाया ‘वोट चोरी’ का आरोप
इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने चुनाव आयोग, BJP और RSS पर गंभीर आरोप लगाए। राहुल गांधी ने कहा कि कथित ‘वोट चोरी’ देश के नागरिकों और संविधान पर सीधा हमला है।
उन्होंने आरोप लगाया कि यदि चुनाव आयोग के भीतर दो आयुक्त लगातार फैसलों पर सवाल उठा रहे थे, तो यह मामला बेहद गंभीर है। राहुल गांधी ने इसे देशद्रोह तक बताते हुए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई।
हालांकि, ये सभी आरोप राहुल गांधी और कांग्रेस की ओर से लगाए गए हैं। चुनाव आयोग और BJP ने इन्हें खारिज करते हुए आयोग की चुनावी प्रक्रिया का बचाव किया है।
संबित पात्रा ने कांग्रेस को घेरा
राहुल गांधी के बयान पर जवाब देते हुए संबित पात्रा ने कहा कि विपक्षी दल चुनाव में हार मिलने के बाद संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल खड़े करने लगते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार बनने के बाद लगातार कमजोर हो रहे विपक्ष ने अब चुनाव आयोग को निशाना बनाना शुरू कर दिया है।
पात्रा ने कहा कि किसी संस्था के भीतर अधिकारियों द्वारा सवाल उठाना या सुझाव देना सामान्य प्रक्रिया है। तीनों चुनाव आयुक्तों के बीच किसी विषय पर चर्चा या अलग राय को तानाशाही बताना गलत है। उनके अनुसार, आंतरिक बातचीत और मतभेद संस्थागत चेक-बैलेंस का प्रमाण हैं।
चुनाव आयोग ने क्या सफाई दी?
मामला बढ़ने के बाद चुनाव आयोग ने भी अपनी स्थिति स्पष्ट की। आयोग ने कहा कि SIR सहित उसके सभी अंतिम फैसले मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से लिए गए थे।
आयोग के अनुसार, चुनावी प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए अधिकारियों और आयुक्तों द्वारा सवाल एवं सुझाव दिए जाना सामान्य कार्यप्रणाली का हिस्सा है। किसी फैसले से पहले हुई चर्चा को औपचारिक असहमति या अंतिम निर्णय का विरोध नहीं माना जाना चाहिए।
आयोग ने यह भी कहा कि उसके सभी आधिकारिक आदेश और प्रशासनिक निर्देश तय कानूनी प्रक्रिया के अनुसार जारी किए गए हैं। आयोग ने अपने कामकाज और अंतिम फैसलों में मतभेद होने के दावों को खारिज किया है।
14 आपत्तियों के दावे पर विवाद
रिपोर्ट में दावा किया गया कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने, Form 6 में बदलाव तथा चुनावी डाटा को नियंत्रित करने जैसे मामलों पर सवाल उठाए थे।
इसी दावे को आधार बनाकर विपक्ष चुनाव आयोग से विस्तृत जवाब और अधिक पारदर्शिता की मांग कर रहा है। कांग्रेस का कहना है कि आयोग को केवल अंतिम फैसलों को सर्वसम्मति वाला बताने के बजाय आयुक्तों द्वारा उठाए गए हर सवाल का जवाब देना चाहिए।
दूसरी तरफ BJP का तर्क है कि किसी फैसले से पहले अधिकारियों द्वारा सवाल उठाना संवैधानिक संस्था की सामान्य कार्यप्रणाली है और इसे चुनाव में गड़बड़ी का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
अब पारदर्शिता पर टिका पूरा विवाद
SIR और मतदाता सूची को लेकर पहले से जारी राजनीतिक विवाद के बीच चुनाव आयोग के अंदर कथित आपत्तियों की रिपोर्ट ने मामले को और गरमा दिया है। विपक्ष इसे आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल बता रहा है, जबकि BJP इसे सामान्य चर्चा को राजनीतिक विवाद बनाने का प्रयास कह रही है।
राहुल गांधी के ‘वोट चोरी’ और देशद्रोह जैसे गंभीर आरोपों के बाद विवाद अब केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रहा। चुनाव आयोग की सफाई और संबित पात्रा के पलटवार के बावजूद विपक्ष 14 कथित लिखित आपत्तियों की पूरी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग कर रहा है। अब देश की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आयोग इन सवालों पर कोई विस्तृत दस्तावेज जारी करता है या विवाद और तेज होता है।
