PM मोदी-स्विस राष्ट्रपति की बड़ी बैठक: रक्षा-परमाणु ऊर्जा से टेक्नोलॉजी तक नई सहमति, TEPA पर भी फोकस

नई दिल्ली में हुई द्विपक्षीय वार्ता में व्यापार, निवेश, विज्ञान, टेक्नोलॉजी, रक्षा सहयोग, न्यूक्लियर एनर्जी और मोबिलिटी पर चर्चा; भारत-EFTA व्यापार समझौते के एक साल पूरे होने पर भी हुई समीक्षा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली में स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाइ परमेलिन के साथ द्विपक्षीय बैठक की। दोनों नेताओं ने व्यापार, निवेश, विज्ञान, टेक्नोलॉजी, इनोवेशन, मोबिलिटी, रक्षा सहयोग और न्यूक्लियर एनर्जी समेत कई क्षेत्रों में संबंध मजबूत करने पर चर्चा की। यह यात्रा भारत-EFTA व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौते के लागू होने की पहली वर्षगांठ के मौके पर हो रही है।

भारत-स्विट्जरलैंड साझेदारी में व्यापार से रक्षा तक नया फोकस

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और स्विस राष्ट्रपति गाइ परमेलिन ने व्यापार, निवेश, टेक्नोलॉजी, रक्षा और ऊर्जा सहयोग पर चर्चा की।

प्रत्यक्षदर्शी समाचार | राष्ट्रीय डेस्क | 5 अक्टूबर 2026

खबर में खास

  • PM नरेंद्र मोदी ने स्विस राष्ट्रपति गाइ परमेलिन से की मुलाकात
  • नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में हुई द्विपक्षीय वार्ता
  • व्यापार और निवेश बढ़ाने पर चर्चा
  • विज्ञान, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन में सहयोग पर जोर
  • सैन्य आदान-प्रदान और defence production में नई संभावनाओं की पहचान
  • nuclear energy cooperation को और गहरा करने पर सहमति
  • शिक्षा, रिसर्च, मोबिलिटी और लोगों के बीच संपर्क भी एजेंडे में
  • भारत-EFTA TEPA लागू होने की पहली वर्षगांठ पर हुई समीक्षा
  • TEPA के तहत EFTA देशों का भारत में 15 साल में $100 अरब निवेश बढ़ाने का लक्ष्य
  • इसी निवेश से 10 लाख direct jobs के निर्माण में सहयोग का लक्ष्य

मोदी-परमेलिन की दिल्ली में बड़ी बैठक

नई दिल्ली: भारत और स्विट्जरलैंड ने व्यापार और निवेश से लेकर रक्षा, विज्ञान, टेक्नोलॉजी और परमाणु ऊर्जा तक अपने रिश्तों को और आगे बढ़ाने की दिशा में बातचीत तेज कर दी है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाइ परमेलिन के साथ द्विपक्षीय बैठक की। दोनों नेताओं ने भारत-स्विट्जरलैंड संबंधों के अलग-अलग क्षेत्रों की समीक्षा की और भविष्य में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की।

किन-किन मुद्दों पर हुई बात?

बैठक में व्यापार, निवेश, विज्ञान, टेक्नोलॉजी, इनोवेशन, मोबिलिटी और लोगों के बीच संपर्क जैसे मुद्दों पर बातचीत हुई।
इसके साथ ही दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रमों पर भी विचार साझा किए और बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की। FONES

रक्षा क्षेत्र में क्या नया?

बैठक का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रक्षा सहयोग भी रहा।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दोनों देशों ने military exchanges यानी सैन्य स्तर के आदान-प्रदान और defence production में सहयोग की नई संभावनाओं की पहचान की है। 
इसका मतलब यह है कि आने वाले समय में प्रशिक्षण, रक्षा उद्योग और दूसरे संबंधित क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग का दायरा बढ़ सकता है।
हालांकि अभी किसी विशेष defence contract की घोषणा सामने नहीं आई है।

न्यूक्लियर एनर्जी पर भी बनी सहमति

भारत और स्विट्जरलैंड के बीच परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग को और गहरा करने पर भी सहमति बनी है।
यह मुद्दा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत आने वाले वर्षों में अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए nuclear energy की क्षमता बढ़ाने पर जोर दे रहा है। बैठक में दोनों देशों ने इस क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की।

टेक्नोलॉजी और इनोवेशन पर क्यों जोर?

भारत और स्विट्जरलैंड के बीच विज्ञान और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में लंबे समय से सहयोग रहा है।
दोनों देशों ने joint research, innovation, skill development और capacity building को आगे बढ़ाने की बात दोहराई है। फरवरी 2026 में हुई पिछली उच्चस्तरीय मुलाकात में भी टेक्नोलॉजी, शिक्षा और talent mobility को प्रमुख क्षेत्रों के रूप में चिन्हित किया गया था। Prime Minister of India
अब मौजूदा बातचीत में भी इन क्षेत्रों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया है।

इस यात्रा में TEPA इतना महत्वपूर्ण क्यों?

स्विस राष्ट्रपति की भारत यात्रा ऐसे समय हो रही है जब India-EFTA Trade and Economic Partnership Agreement यानी TEPA को लागू हुए एक साल पूरा हो रहा है।
यह समझौता भारत और चार EFTA देशों—स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, आइसलैंड और लिकटेंस्टीन—के बीच है। यह 1 अक्टूबर 2025 से लागू हुआ था। Ministry of Commerce and Industry
स्विट्जरलैंड EFTA में भारत का एक प्रमुख आर्थिक साझेदार है।

$100 अरब निवेश का बड़ा लक्ष्य

TEPA की सबसे महत्वपूर्ण शर्तों में से एक भारत में निवेश से जुड़ी है।
समझौते के तहत EFTA देशों ने भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का स्तर अगले 15 वर्षों में कुल $100 अरब तक बढ़ाने की दिशा में काम करने का लक्ष्य रखा है। इसमें पहले 10 वर्षों में $50 अरब और उसके बाद अगले पांच वर्षों में अतिरिक्त $50 अरब का लक्ष्य है। 
यह रकम भारतीय मुद्रा में कई लाख करोड़ रुपये बैठती है।

10 लाख नौकरियों का भी लक्ष्य

TEPA के तहत निवेश बढ़ने के साथ भारत में 10 लाख direct jobs पैदा करने में मदद का लक्ष्य भी रखा गया है।
यह रोजगार लक्ष्य EFTA देशों से आने वाले प्रत्यक्ष विदेशी निवेश से जुड़ा हुआ है और इसके लिए 15 साल की अवधि तय की गई है। 
इसलिए मौजूदा भारत-स्विट्जरलैंड बैठक सिर्फ कूटनीतिक मुलाकात नहीं, बल्कि उस बड़े आर्थिक ढांचे की समीक्षा से भी जुड़ी है जिसका सीधा संबंध निवेश और रोजगार से है।

किन क्षेत्रों को फायदा हो सकता है?

TEPA के तहत कई क्षेत्रों में निवेश और व्यापार बढ़ने की संभावना है।
इनमें healthcare, pharmaceuticals, engineering, renewable energy, financial services, food processing, education और maritime sector जैसे क्षेत्र शामिल हैं। Ministry of Commerce and Industry
भारत का लक्ष्य है कि समझौते से manufacturing और Make in India से जुड़े क्षेत्रों को भी फायदा मिले।

स्विस राष्ट्रपति की तीन दिन की भारत यात्रा

गाइ परमेलिन 5 से 7 अक्टूबर तक भारत की राजकीय यात्रा पर हैं।
यह उनकी भारत की पहली state visit है, हालांकि वह इसी साल फरवरी में भी भारत आए थे। इस यात्रा में वह राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और भारत सरकार के अन्य वरिष्ठ प्रतिनिधियों से भी मुलाकात करेंगे। FONES

7 अक्टूबर को TEPA Summit

इस यात्रा के दौरान EFTA देशों के प्रतिनिधियों के साथ TEPA से जुड़े कार्यक्रम भी होने हैं।
इसका उद्देश्य समझौते के पहले वर्ष की प्रगति की समीक्षा करना और निवेश, व्यापार, शिक्षा, रिसर्च तथा नई तकनीकों में आगे के अवसर तलाशना है। FONES

भारत के लिए इस बैठक का मतलब क्या?

इस बैठक का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि भारत और स्विट्जरलैंड अपने संबंधों को सिर्फ पारंपरिक व्यापार तक सीमित नहीं रखना चाहते।
अब बातचीत का दायरा high technology, defence production, nuclear energy, research, innovation और skilled mobility जैसे क्षेत्रों तक बढ़ रहा है।
साथ ही $100 अरब निवेश और 10 लाख रोजगार वाला TEPA framework आने वाले वर्षों में दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों का बड़ा आधार बन सकता है। 

मोदी-परमेलिन की यह बैठक भारत-स्विट्जरलैंड रिश्तों को व्यापार से आगे रक्षा, न्यूक्लियर एनर्जी, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन तक ले जाने की कोशिश का हिस्सा है। सबसे बड़ी नजर अब TEPA पर रहेगी, जिसके तहत अगले 15 वर्षों में भारत में $100 अरब निवेश बढ़ाने और 10 लाख प्रत्यक्ष रोजगार के निर्माण में सहयोग का लक्ष्य रखा गया है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि इन बड़े लक्ष्यों को जमीन पर उतारने के लिए दोनों पक्ष कौन-से नए कदम उठाते हैं।

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