UP Voter List: 'पिता का नाम B.Com, कहीं राम ने यादव को मारा'—संजय सिंह ने उठाए सवाल, CEO ने मानी गलती; BJP एजेंट होने का आरोप

यूपी विधान परिषद चुनाव की मतदाता सूची में असामान्य प्रविष्टियों पर राजनीतिक विवाद। AAP सांसद ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी के बयान की आलोचना की, जबकि चुनाव प्रशासन ने तकनीकी त्रुटियों की जाँच और फर्जी वोटर स्लिप पर कार्रवाई की बात कही।

UP Voter List विवाद में संजय सिंह ने अजीब नामों और पिता के विवरण में गलतियों का मुद्दा उठाया। मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने त्रुटियां स्वीकार कीं और जाँच की जानकारी दी।

प्रत्यक्षदर्शी समाचार | लखनऊ | 27 अक्टूबर 2026
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कथित स्कूल मंजूरी घोटाले में पूर्व DMK मंत्री अनबिल महेश को 6 नवंबर तक न्यायिक हिरासत में भेजा गया।

खबर में खास

  • संजय सिंह ने मतदाता सूची में 'राम ने यादव को मारा' जैसी असामान्य प्रविष्टियां होने का दावा किया।
  • उन्होंने आरोप लगाया कि एक मतदाता के पिता का नाम 'B.Com' दर्ज किया गया।

  • मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने कुछ असामान्य प्रविष्टियां होने की बात स्वीकार की।

  • CEO के सोशल मीडिया जवाब पर संजय सिंह ने आपत्ति जताई और उन्हें भाजपा एजेंट की तरह व्यवहार करने वाला बताया।

  • निर्वाचन प्रशासन ने तकनीकी गलतियों की जाँच और सोशल मीडिया पर प्रसारित कथित फर्जी वोटर स्लिप की पहचान करने की बात कही।

वोटर लिस्ट में अजीब नामों से शुरू हुआ विवाद

उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची की शुद्धता को लेकर चल रही राजनीतिक बहस के बीच आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद और उत्तर प्रदेश प्रभारी संजय सिंह ने चुनाव प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।
लखनऊ में सोमवार, 26 अक्टूबर को पार्टी मुख्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान संजय सिंह ने आरोप लगाया कि विधान परिषद चुनाव की मतदाता सूची में कई लोगों के नाम और उनके परिजनों के विवरण गलत तरीके से दर्ज किए गए हैं।
उन्होंने दावा किया कि किसी प्रविष्टि में 'राम ने यादव को मारा' लिखा हुआ है, जबकि दूसरी जगह एक व्यक्ति के पिता का नाम 'B.Com' दर्ज दिखाई देता है।
संजय सिंह ने कहा कि ऐसी गलतियां सामने आने के बाद निर्वाचन अधिकारियों की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।

'राम ने यादव को मारा' कैसे लिखा गया?

विवाद की शुरुआत एक मतदाता के नाम 'रामहित यादव' से जुड़ी कथित त्रुटि से हुई।
रिपोर्टों के अनुसार, अंग्रेजी में दर्ज नाम के गलत हिंदी रूपांतरण के कारण वह एक वाक्य जैसा दिखाई देने लगा।
इस मामले में संजय सिंह ने निर्वाचन आयोग से पूछा कि मतदाता सूची तैयार करते समय ऐसे गलत नाम अंतिम रिकॉर्ड तक कैसे पहुंच गए।
उन्होंने अन्य असामान्य प्रविष्टियों का भी उल्लेख किया। हालांकि सोशल मीडिया पर सामने आए प्रत्येक दस्तावेज की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने क्या जवाब दिया?

उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जवाब देते हुए विधान परिषद की मतदाता सूची में एक और असामान्य प्रविष्टि होने की बात स्वीकार की।
उन्होंने 'राम ने शर्मा को मारा' जैसी प्रविष्टि का उदाहरण दिया और कहा कि कंप्यूटर या सॉफ्टवेयर जातिवादी नहीं होते।
रिणवा ने यह भी स्वीकार किया कि गलती हुई है। उनके जवाब में जातिगत और सांप्रदायिक आरोपों का उल्लेख करते हुए व्यंग्यात्मक टिप्पणी भी की गई थी।
बाद में निर्वाचन प्रशासन ने बताया कि इन गलतियों के कारणों की जाँच की जा रही है और भविष्य में ऐसी स्थिति रोकने के लिए कदम उठाए जाएंगे।

संजय सिंह ने BJP एजेंट होने का आरोप क्यों लगाया?

मुख्य निर्वाचन अधिकारी के जवाब के बाद संजय सिंह ने उनकी भाषा पर आपत्ति जताई।
AAP सांसद ने आरोप लगाया कि रिणवा एक संवैधानिक जिम्मेदारी निभाने के बजाय भाजपा के पक्ष में व्यवहार कर रहे हैं।
उन्होंने मुख्य निर्वाचन अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की।
यह संजय सिंह का राजनीतिक आरोप है। इससे मुख्य निर्वाचन अधिकारी के किसी राजनीतिक दल के लिए काम करने का आरोप सिद्ध नहीं होता।
निर्वाचन प्रशासन ने संबंधित तकनीकी त्रुटियों को स्वीकार किया है, लेकिन जातिगत पक्षपात के आरोप को खारिज किया है।

चुनाव प्रशासन ने फर्जी वोटर स्लिप पर क्या कहा?

विवाद बढ़ने के बाद मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने एक अतिरिक्त स्पष्टीकरण जारी किया।
उसके अनुसार, हाल के विधान परिषद चुनाव में मतदाता सूची की कुछ प्रविष्टियां असामान्य थीं और उनके कारणों की पड़ताल की जा रही है।
साथ ही कार्यालय ने बताया कि सोशल मीडिया पर कुछ कथित फर्जी वोटर स्लिप भी प्रसारित हुई हैं।
निर्वाचन प्रशासन ने चेतावनी दी कि फर्जी दस्तावेज तैयार करने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होगी।
अधिकारियों ने मीडिया और नागरिकों से अपील की कि वायरल वोटर स्लिप को सही मानने से पहले संबंधित निर्वाचन कार्यालय से पुष्टि कर लें।

यूपी चुनाव 2027 से पहले क्यों महत्वपूर्ण है मामला?

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव अगले वर्ष प्रस्तावित हैं। ऐसे में मतदाता सूची में नाम, पिता का नाम और दूसरे पहचान संबंधी विवरण सही होना जरूरी है।
विवाद ने मतदाता सूची तैयार करने वाले सॉफ्टवेयर, डेटा एंट्री और अंतिम सत्यापन प्रक्रिया की विश्वसनीयता को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
लेकिन गलत नाम दर्ज होने, फर्जी वोटर स्लिप प्रसारित होने और किसी वास्तविक मतदाता का नाम गलत तरीके से हटाए जाने की घटनाएं अलग-अलग हैं। प्रत्येक की स्वतंत्र जाँच आवश्यक है।
फिलहाल मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने असामान्य प्रविष्टियां होने की बात स्वीकार की है और जाँच का आश्वासन दिया है। संजय सिंह ने जवाबदेही और कार्रवाई की मांग की है।
अब देखना होगा कि जाँच में किन त्रुटियों की पुष्टि होती है और सुधार के लिए कौन से कदम उठाए जाते हैं।

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