अयोध्या राम मंदिर की जमीन का फिर होगा सर्वे? सुप्रीम कोर्ट में नई याचिका, 2019 के फैसले से मिलान की मांग; 2 नवंबर को सुनवाई

याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से राम मंदिर परिसर की सीमाओं और जमीन की स्वतंत्र जाँच कराने की मांग की है। दान का हिसाब सार्वजनिक करने और CAG ऑडिट की मांग भी उठाई गई।

Ayodhya Ram Mandir Supreme Court News: अयोध्या राम मंदिर की जमीन के स्वतंत्र सर्वे की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल हुई है। 2 नवंबर को सुनवाई प्रस्तावित है। जानिए 2019 के फैसले, मंदिर की जमीन और दान के ऑडिट से जुड़ी मांगें।

प्रत्यक्षदर्शी समाचार | नई दिल्ली/अयोध्या | 31 अक्टूबर 2026
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अयोध्या राम मंदिर की जमीन की सीमाओं के स्वतंत्र सत्यापन की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है।

खबर में खास

  • अयोध्या राम मंदिर की जमीन का स्वतंत्र सर्वे कराने की मांग सुप्रीम कोर्ट पहुँची।
  • याचिका में 2019 के फैसले में तय जमीन और वर्तमान मंदिर परिसर की सीमाओं का मिलान कराने को कहा गया।

  • 2 नवंबर को प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ के समक्ष सुनवाई सूचीबद्ध।

  • मंदिर से जुड़े मूल नक्शे, जमीन के रिकॉर्ड और निर्माण संबंधी दस्तावेज सुरक्षित रखने की मांग।

  • चढ़ावे और दान का डिजिटल विवरण तथा CAG ऑडिट कराने का अनुरोध भी शामिल।
उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित राम मंदिर की जमीन को लेकर एक नई कानूनी कार्यवाही सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर यह जाँच कराने की मांग की गई है कि वर्तमान राम मंदिर उसी जमीन पर बना है या नहीं, जिसके संबंध में सर्वोच्च न्यायालय ने 9 नवंबर 2019 को ऐतिहासिक फैसला सुनाया था।
शनिवार, 31 अक्टूबर को सामने आई PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, श्री राम जन्मभूमि केस ट्रस्ट की ओर से दाखिल याचिका में मंदिर परिसर की जमीन का स्वतंत्र सर्वे कराने और उसकी सीमाओं का स्पष्ट निर्धारण करने की मांग की गई है।
इस याचिका पर 2 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई सूचीबद्ध है।

राम मंदिर की जमीन की दोबारा जाँच क्यों मांगी गई?

याचिकाकर्ता ने अदालत से अनुरोध किया है कि वह विशेषज्ञों की एक स्वतंत्र समिति या आयोग बनाए।
यह समिति राजस्व रिकॉर्ड, जमीन के नक्शे, वास्तविक सीमाओं और भौगोलिक विवरण के आधार पर पता लगाए कि वर्तमान मंदिर परिसर की स्थिति 2019 के न्यायिक फैसले में निर्धारित भूमि से मेल खाती है या नहीं।
याचिका में सर्वेक्षण, राजस्व और पुरातत्व क्षेत्र के विशेषज्ञों को शामिल करने का सुझाव दिया गया है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि याचिका दाखिल होना किसी जमीन संबंधी गड़बड़ी का प्रमाण नहीं है। अभी अदालत ने ऐसा कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है कि मंदिर गलत जमीन पर बना है।

2019 में सुप्रीम कोर्ट ने क्या फैसला दिया था?

9 नवंबर 2019 को पाँच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने अयोध्या भूमि विवाद में सर्वसम्मति से निर्णय सुनाया था।
अदालत ने विवादित 2.77 एकड़ भूमि मंदिर निर्माण के लिए गठित किए जाने वाले ट्रस्ट को सौंपने का रास्ता साफ किया था।
साथ ही केंद्र सरकार को सुन्नी वक्फ बोर्ड के लिए अयोध्या में वैकल्पिक पाँच एकड़ जमीन उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया था।
अब नई याचिका का उद्देश्य उस फैसले से संबंधित जमीन की सीमाओं का स्वतंत्र सत्यापन कराना बताया गया है।

राम मंदिर के दान का CAG ऑडिट भी मांगा

याचिका में जमीन के अलावा मंदिर में आने वाले दान और चढ़ावे से जुड़ी पारदर्शिता का मुद्दा भी उठाया गया है।
याचिकाकर्ता ने मंदिर से संबंधित दान, चढ़ावे और रसीदों का नियमित डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने तथा उसे सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है।
इसके अतिरिक्त भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) से खातों का वार्षिक ऑडिट कराने की मांग की गई है।
ये सभी याचिकाकर्ता की मांगें हैं। अदालत ने इन्हें स्वीकार करने का अंतिम आदेश नहीं दिया है।

राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से क्या मांगा गया?

याचिका में संबंधित अधिकारियों और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को मंदिर परिसर से जुड़े मूल नक्शे, सर्वेक्षण रिपोर्ट, भूमि अभिलेख और निर्माण संबंधी रिकॉर्ड सुरक्षित रखने तथा अदालत के सामने पेश करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।
यहाँ दोनों नामों का अंतर महत्वपूर्ण है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार याचिका श्री राम जन्मभूमि केस ट्रस्ट ने दाखिल की है, जबकि रिकॉर्ड प्रस्तुत करने की मांग श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट सहित संबंधित पक्षों से की गई है।

2 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट में क्या होगा?

सोमवार 2 नवंबर को इस मामले की सुनवाई प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ के समक्ष सूचीबद्ध है।
अदालत याचिका पर प्रारंभिक विचार कर सकती है। सर्वे का आदेश होगा या नहीं, यह न्यायिक कार्यवाही के बाद ही स्पष्ट होगा।
यह विषय अयोध्या भूमि विवाद के ऐतिहासिक और सार्वजनिक महत्व से जुड़ा है, इसलिए अगली सुनवाई पर ध्यान रहेगा।
अब मुख्य सवाल है—क्या सुप्रीम कोर्ट स्वतंत्र सर्वे कराने का आदेश देगा या याचिका पर कोई अन्य निर्देश जारी करेगा?

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