राहुल गांधी की कांग्रेस से किरेन रिजिजू के 5 सवाल! पूछा—2014 में सिर्फ 44 सीटें क्यों मिलीं? SIR और ज्ञानेश कुमार पर भी चुनौती

नवंबर को विपक्ष की दिल्ली रैली से पहले केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस के पुराने चुनावी नतीजों, मुख्य चुनाव आयुक्त और मतदाता सूची पुनरीक्षण को लेकर पाँच सवाल उठाए।

Kiren Rijiju Congress News: केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने 31 अक्टूबर 2026 को कांग्रेस से पाँच सवाल पूछे। उन्होंने 2014 की 44 लोकसभा सीटों, 2024 की हार, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और SIR विवाद का उल्लेख किया। जानिए सभी पाँच सवाल और राजनीतिक विवाद का पूरा मामला।

प्रत्यक्षदर्शी समाचार | नई दिल्ली | 31 अक्टूबर 2026
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केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने 31 अक्टूबर 2026 को कांग्रेस से चुनावी नतीजों और मतदाता सूची पुनरीक्षण पर पाँच सवाल पूछे।

खबर में खास

  • केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने शनिवार को X पर कांग्रेस से पाँच सवाल पूछे।
  • 2014 में कांग्रेस की 44 सीटों और 2024 के चुनावी नतीजों का उल्लेख किया।

  • मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और SIR पर विपक्ष के आरोपों को लेकर सवाल उठाए।

  • मतदाता सूची से मृत, स्थानांतरित और डुप्लिकेट नाम हटाने की प्रक्रिया पर कांग्रेस का रुख पूछा।

  • 1 नवंबर को दिल्ली में प्रस्तावित INDIA गठबंधन की रैली से पहले बयान आया।
देश में चुनाव आयोग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस को नई चुनौती दी है। शनिवार, 31 अक्टूबर को उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पाँच सवाल पूछते हुए पार्टी से जवाब माँगा।
रिजिजू ने 2014 और 2024 के लोकसभा चुनावों के परिणामों का उल्लेख किया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब अलग-अलग समय पर अलग मुख्य चुनाव आयुक्त थे, तब कांग्रेस को चुनावी हार क्यों मिली।
उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब कांग्रेस सहित INDIA गठबंधन के दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और SIR प्रक्रिया को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

रिजिजू ने कांग्रेस से कौन-से पाँच सवाल पूछे?

केंद्रीय मंत्री ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कांग्रेस के सामने ये सवाल रखे:
  1. जब 2014 में चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार के कार्यकाल में हुई थी, तब पार्टी केवल 44 लोकसभा सीटें क्यों जीत पाई?
  2. जब 2024 के लोकसभा चुनाव के समय ज्ञानेश कुमार मुख्य चुनाव आयुक्त नहीं थे, तब कांग्रेस लगातार तीसरा लोकसभा चुनाव क्यों हारी?

  3. क्या कांग्रेस के मौजूदा मुख्यमंत्री इस्तीफा देंगे और 2014 से 2026 के बीच चुनाव जीतकर सरकारें बनाने के लिए माफी माँगेंगे?

  4. क्या मतदाता सूची से मृत व्यक्तियों, स्थानांतरित मतदाताओं, दोहरी प्रविष्टियों और कानूनी रूप से अपात्र लोगों के नाम हटाए जाने चाहिए या नहीं?

  5. क्या 1950 के दशक से लेकर 2002–2004 तक के पिछले विशेष गहन मतदाता सूची पुनरीक्षण भी अवैध थे?

ये रिजिजू द्वारा पूछे गए राजनीतिक सवाल हैं। इनके आधार पर मौजूदा SIR प्रक्रिया में उठाई गई शिकायतों का स्वतः समाधान नहीं माना जा सकता।

ज्ञानेश कुमार को लेकर क्यों उठाया 2024 का मुद्दा?

रिजिजू ने अपने बयान में 2024 के लोकसभा चुनाव और मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति के समय का उल्लेख किया।
ज्ञानेश कुमार मार्च 2024 में चुनाव आयुक्त बने थे, जबकि फरवरी 2025 में उन्हें मुख्य चुनाव आयुक्त नियुक्त किया गया। इसलिए 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान वह मुख्य चुनाव आयुक्त नहीं थे।
केंद्रीय मंत्री ने इसी तथ्य को आधार बनाकर कांग्रेस के आरोपों पर सवाल उठाए। हालांकि, यह अपने आप में मौजूदा मतदाता सूची विवाद के प्रत्येक आरोप की जाँच का विकल्प नहीं है।

कांग्रेस और विपक्ष का क्या कहना है?

कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने SIR की प्रक्रिया, मतदाता सूची से नाम हटाए जाने और चुनाव आयोग के कामकाज की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाए हैं।
विपक्ष का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और किसी भी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से नहीं हटाया जाना चाहिए।
दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने अपने निर्णयों की प्रक्रिया का बचाव किया है। अक्टूबर में सुप्रीम कोर्ट में दिए गए जवाब में आयोग ने कहा कि SIR से संबंधित निर्णय तीन सदस्यीय आयोग की सहमति से लिए गए थे।

1 नवंबर की रैली से पहले बढ़ी बयानबाजी

INDIA गठबंधन ने 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में रैली का कार्यक्रम घोषित किया है। इसमें मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की माँग और मतदाता सूची से संबंधित आरोप प्रमुख मुद्दे हैं।
राहुल गांधी और विपक्षी दल चुनाव आयोग से जवाबदेही की माँग कर रहे हैं, जबकि भाजपा के नेता विपक्ष के आरोपों और चुनावी नतीजों की उसकी व्याख्या पर सवाल उठा रहे हैं।

अब आगे क्या?

इस विवाद में सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न मतदाता सूची की सटीकता और प्रत्येक पात्र नागरिक के मतदान अधिकार की सुरक्षा है।
राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं, लेकिन किसी मतदाता का नाम गलत तरीके से हटाए जाने या चुनावी अनियमितता की शिकायत का निर्णय संबंधित रिकॉर्ड, निर्धारित कानूनी प्रक्रिया और स्वतंत्र जाँच के आधार पर ही किया जाना चाहिए।
अब सवाल है कि कांग्रेस रिजिजू के पाँच सवालों का क्या जवाब देती है और चुनाव आयोग को लेकर विपक्ष के आरोपों पर आगे कौन-से तथ्य सामने आते हैं?

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