'हमारे राम तो अखिलेश यादव हैं!' सपा सांसद वीरेंद्र सिंह का बड़ा बयान, अमित शाह के 'अंगद का पैर' पर किया पलटवार

अमित शाह ने यूपी में भाजपा सरकार को अंगद के पैर जैसा अडिग बताया था। जवाब में चंदौली से सपा सांसद वीरेंद्र सिंह ने रामायण का उदाहरण देते हुए अखिलेश यादव को 'हमारे राम' कहा।

UP Politics 2026: सपा सांसद वीरेंद्र सिंह ने 31 अक्टूबर को अखिलेश यादव की तुलना भगवान राम से की। अमित शाह के अंगद वाले बयान और SIR पर संसद में बहस की चुनौती के जवाब में उन्होंने यह टिप्पणी की। जानिए पूरा मामला।

प्रत्यक्षदर्शी समाचार | नई दिल्ली/लखनऊ | 31 अक्टूबर 2026
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समाजवादी पार्टी के सांसद वीरेंद्र सिंह ने 31 अक्टूबर 2026 को अमित शाह के बयान पर प्रतिक्रिया दी।

खबर में खास

  • सपा सांसद वीरेंद्र सिंह ने अखिलेश यादव को 'हमारे राम' कहा।
  • उन्होंने रामायण के अंगद प्रसंग का उल्लेख करते हुए अमित शाह के बयान पर प्रतिक्रिया दी।

  • शाह ने 30 अक्टूबर को यूपी में भाजपा सरकार को अंगद के पैर जैसा अडिग बताया था।

  • दोनों पक्षों के बीच मतदाता सूची के SIR और संसद में चर्चा को लेकर भी मतभेद हैं।
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच राजनीतिक बयानबाजी जारी है। इस बीच शनिवार, 31 अक्टूबर को चंदौली से समाजवादी पार्टी के सांसद वीरेंद्र सिंह ने एक ऐसी टिप्पणी की, जिसमें उन्होंने पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव की तुलना भगवान राम से कर दी।
उनका यह बयान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की ओर से दिए गए 'अंगद का पैर' वाले राजनीतिक उदाहरण के जवाब में आया है।
वीरेंद्र सिंह ने कहा कि अंगद भगवान राम की सेना का हिस्सा थे और आज के राजनीतिक संदर्भ में उनके लिए राम उनके राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव हैं।
वीरेंद्र सिंह ने आखिर क्या कहा?
सपा सांसद ने रामायण के प्रसंग का जिक्र करते हुए कहा कि अंगद भगवान राम की सेना में थे। इसके बाद उन्होंने अखिलेश यादव को 'हमारे राम' बताया।
इस टिप्पणी के जरिए वीरेंद्र सिंह ने अमित शाह के राजनीतिक उदाहरण का जवाब देने का प्रयास किया। उनका बयान एक व्यक्तिगत राजनीतिक तुलना के रूप में सामने आया है।
फिलहाल इस टिप्पणी को समाजवादी पार्टी की आधिकारिक वैचारिक घोषणा मानने का कोई आधार उपलब्ध नहीं है।

अमित शाह ने क्यों दिया था 'अंगद का पैर' वाला उदाहरण?

30 अक्टूबर को लखनऊ में भाजपा प्रदेश कार्यसमिति को संबोधित करते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि उत्तर प्रदेश में भाजपा सरकार अंगद के पैर की तरह स्थापित है, जिसे कोई हिला नहीं सकता।
उन्होंने 2027 में भाजपा के फिर सरकार बनाने का विश्वास भी जताया था। साथ ही समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा था कि सपा आने वाले 30 वर्षों तक प्रदेश में सरकार नहीं बना पाएगी।
यह शाह का राजनीतिक दावा था, न कि किसी चुनाव परिणाम की स्थापित स्थिति।

रामायण के अंगद का राजनीतिक संदर्भ क्या है?

रामायण के प्रचलित प्रसंग के अनुसार, अंगद भगवान राम के दूत बनकर रावण की सभा में गए थे। वहाँ उनके पैर को हिलाने की चुनौती का उल्लेख मिलता है।
अमित शाह ने इस उदाहरण का इस्तेमाल भाजपा सरकार की मजबूती बताने के लिए किया था। वहीं वीरेंद्र सिंह ने रामायण के उसी पात्र का उल्लेख करके अपनी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की तुलना भगवान राम से की।
इस तरह एक धार्मिक-ऐतिहासिक प्रसंग के जरिए दोनों नेताओं की अलग-अलग राजनीतिक टिप्पणियाँ सामने आई हैं।

SIR पर संसद में बहस की चुनौती भी विवाद की वजह

यह बयान ऐसे समय आया है जब विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने हैं।
अमित शाह ने लखनऊ की बैठक में राहुल गांधी और अखिलेश यादव को मतदाता सूची से जुड़े आरोपों पर संसद में चर्चा की चुनौती दी थी। उन्होंने कहा था कि भाजपा इस विषय पर चर्चा के लिए तैयार है।
दूसरी ओर विपक्षी दल SIR प्रक्रिया, मतदाता सूची से नाम हटाए जाने और चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर सवाल उठा रहे हैं। हालांकि, विपक्ष के आरोपों को बिना स्वतंत्र जाँच के प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता।

पहले भी भगवान राम को लेकर बयान दे चुके हैं वीरेंद्र सिंह

यह पहली बार नहीं है जब चंदौली के सपा सांसद वीरेंद्र सिंह ने अपनी राजनीतिक बात समझाने के लिए भगवान राम का उल्लेख किया है।
जनवरी 2026 में भी उन्होंने भगवान राम के वनवास और समाजवादी विचारधारा को लेकर टिप्पणी की थी। उस बयान पर भाजपा नेताओं और कुछ धार्मिक प्रतिनिधियों ने आपत्ति जताई थी।
हालांकि, आज का बयान उससे अलग है। इस बार उन्होंने सीधे अखिलेश यादव की तुलना भगवान राम से की है।
अब किस बात पर नजर रहेगी?
उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच संगठन, मतदाता सूची, कानून-व्यवस्था और सरकार के कामकाज को लेकर सार्वजनिक बहस जारी है।
वीरेंद्र सिंह की नई टिप्पणी पर भाजपा या समाजवादी पार्टी नेतृत्व की अलग आधिकारिक प्रतिक्रिया की पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
अब सवाल है कि सपा सांसद की इस राजनीतिक तुलना पर दोनों पार्टियों के वरिष्ठ नेता क्या प्रतिक्रिया देते हैं और क्या बहस फिर चुनावी मुद्दों की ओर लौटती है?

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