यूपी में 26 वोटरों के नाम काटने की कोशिश? सपा की शिकायत पर BLO के खिलाफ FIR, चुनाव आयोग ने बताया पूरा सच

सुल्तानपुर में नंदलाल के कथित फर्जी हस्ताक्षरों वाले फॉर्म-7 से 26 नाम हटाने का मामला सामने आया। चुनाव अधिकारी बोले—एक भी नाम नहीं कटा, बीएलओ पर कार्रवाई हुई।

UP Voter List: सुल्तानपुर में 26 वोटरों के नाम हटाने के फॉर्म-7 पर विवाद। सपा की शिकायत के बाद BLO पर FIR, आयोग ने कहा—किसी का नाम नहीं कटा।

यूपी में 26 वोटरों के नाम काटने की कोशिश? सपा की शिकायत पर BLO के खिलाफ FIR, चुनाव आयोग ने बताया पूरा सच

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सपा की शिकायत पर सुल्तानपुर में फॉर्म-7 आवेदनों की जांच और बीएलओ के खिलाफ एफआईआर की कार्रवाई।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | लखनऊ/सुल्तानपुर | 27 अक्टूबर 2026
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 से पहले मतदाता सूची को लेकर उठ रहे सवालों के बीच सुल्तानपुर से एक महत्वपूर्ण मामला सामने आया है। यहां 26 मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाने के लिए जमा किए गए फॉर्म-7 आवेदनों पर कथित फर्जी हस्ताक्षरों का विवाद सामने आने के बाद संबंधित बूथ लेवल अधिकारी (BLO) के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है।
समाजवादी पार्टी ने आरोप लगाया था कि नंदलाल नाम के व्यक्ति के कथित फर्जी हस्ताक्षरों का इस्तेमाल कर मतदाताओं के नाम हटवाने की कोशिश की गई। शिकायत के बाद निर्वाचन अधिकारियों ने जांच कराई।
हालांकि, चुनाव प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इन आवेदनों के आधार पर किसी भी मतदाता का नाम सूची से नहीं हटाया गया।

खबर में खास

  • सुल्तानपुर सदर विधानसभा क्षेत्र के बूथ नंबर 96 से जुड़ा मामला।
  • 26 मतदाताओं के नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 जमा किए गए थे।

  • सपा ने 15 अक्टूबर को कथित फर्जी हस्ताक्षरों का आरोप लगाया था।

  • चुनाव प्रशासन के मुताबिक एक भी आवेदन पर नाम हटाने की कार्रवाई नहीं हुई।

  • बीएलओ को चुनावी जिम्मेदारियों से हटाकर संबंधित मामले में एफआईआर दर्ज कराई गई।

क्या है नंदलाल और 26 वोटरों का पूरा मामला?

सुल्तानपुर जिले की सदर विधानसभा सीट के बूथ संख्या 96, प्राथमिक विद्यालय अर्जुनपुर के कक्ष संख्या एक से यह मामला जुड़ा है।
निर्वाचन अधिकारियों को मिली रिपोर्ट के अनुसार, यहां नंदलाल नाम के व्यक्ति के हस्ताक्षर वाले फॉर्म-7 आवेदन बीएलओ के पास जमा कराए गए थे। इन आवेदनों के जरिए मतदाता सूची से 26 लोगों के नाम हटाने का अनुरोध किया गया था।
समाजवादी पार्टी ने 15 अक्टूबर को प्रेस वार्ता में आरोप लगाया कि नंदलाल के फर्जी हस्ताक्षरों का उपयोग करके मतदाताओं के नाम कटवाने की साजिश की गई।
इसके बाद उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने सुल्तानपुर के जिला निर्वाचन अधिकारी से रिपोर्ट मांगी और सदर विधानसभा क्षेत्र के निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी से मामले की जांच कराई।

जांच में क्या सामने आया?

जांच के मुताबिक संबंधित फॉर्म-7 आवेदन अधूरे थे। इनमें आवेदन करने वाले व्यक्ति का नाम, मतदाता पहचान पत्र संख्या और मोबाइल नंबर जैसी आवश्यक जानकारियां दर्ज नहीं थीं।
इसी कारण बीएलओ ने इन आवेदनों पर नाम हटाने की आगे की कार्रवाई नहीं की।
लेकिन चुनाव प्रशासन ने यह भी पाया कि आवेदक की पहचान की पुष्टि किए बिना अधूरे फॉर्म प्राप्त करना चुनावी जिम्मेदारी के निर्वहन में लापरवाही थी।
यही वजह है कि संबंधित बीएलओ को चुनाव से जुड़ी सभी जिम्मेदारियों से हटा दिया गया। विभागीय कार्रवाई की संस्तुति भी की गई है।

बीएलओ के खिलाफ कब और कहां दर्ज हुई FIR?

उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के मुताबिक 24 अक्टूबर को गोसाईंगंज थाने में संबंधित बीएलओ के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई।
रिपोर्टों के अनुसार, इसमें भारतीय न्याय संहिता की धारा 336(3), 340(2) और 318(4) का उल्लेख है। ये धाराएं दस्तावेजों की जालसाजी, जाली दस्तावेजों के उपयोग और धोखाधड़ी से संबंधित हैं।
एफआईआर दर्ज होने का अर्थ दोष सिद्ध होना नहीं है। कथित फर्जी हस्ताक्षर किसने किए और आवेदन किसकी ओर से तैयार कराए गए, इसकी अंतिम जिम्मेदारी जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी।

क्या सचमुच 26 लोगों के वोट काट दिए गए?

इस मामले का सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यही है कि चुनाव प्रशासन के अनुसार इन 26 आवेदनों में से एक भी नाम हटाने के लिए स्वीकृत नहीं हुआ।
इसलिए यह कहना कि सुल्तानपुर में 26 लोगों के वोट काट दिए गए, उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के आधार पर गलत होगा।
मामला कथित फर्जी हस्ताक्षरों के इस्तेमाल से मतदाताओं के नाम हटवाने के प्रयास और आवेदन स्वीकार करने की प्रक्रिया में लापरवाही का है।

आखिर क्या होता है फॉर्म-7?

भारतीय निर्वाचन आयोग के नियमों के अनुसार फॉर्म-7 का उपयोग मतदाता सूची में दर्ज किसी नाम को हटाने के अनुरोध या किसी नाम के शामिल किए जाने पर आपत्ति के लिए किया जाता है।
इसके लिए निर्धारित कारण और संबंधित विवरण देना आवश्यक होता है। आवेदन करने वाले व्यक्ति को अपने दावे की जिम्मेदारी भी लेनी होती है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य मतदाता सूची को सही रखना है, लेकिन इसका गलत इस्तेमाल किसी पात्र मतदाता का नाम हटवाने की कोशिश के लिए नहीं होना चाहिए।

सपा की शिकायत और चुनाव आयोग की कार्रवाई के राजनीतिक मायने

समाजवादी पार्टी लगातार मतदाता सूची को लेकर सवाल उठा रही है। सुल्तानपुर का यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां राजनीतिक चर्चा का प्रमुख विषय बनी हुई हैं।
सपा की शिकायत के बाद प्रशासनिक जांच और एफआईआर दर्ज होना महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। हालांकि, अभी यह साबित नहीं हुआ है कि कथित फर्जीवाड़े के पीछे किसी राजनीतिक दल का हाथ था।
यह मामला चुनावी व्यवस्था के सामने एक आवश्यक सवाल रखता है—यदि किसी मतदाता का नाम हटाने के लिए आवेदन दिया जाता है, तो आवेदक की पहचान और दस्तावेजों की जांच कितनी सख्ती से की जा रही है?

वोटर लिस्ट में अपना नाम कैसे जांचें?

मतदाता भारतीय निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट Voters' Services Portal पर जाकर अपना नाम और निर्वाचन संबंधी विवरण जांच सकते हैं।
किसी गलत प्रविष्टि या नाम हटने की स्थिति में संबंधित निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी अथवा आयोग के निर्धारित माध्यम से शिकायत और सुधार की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।
फिलहाल सुल्तानपुर मामले में सबसे अहम बात यही है—26 मतदाताओं के नाम हटाने के आवेदन मिले थे, लेकिन चुनाव प्रशासन के अनुसार किसी का नाम नहीं काटा गया। अब जांच से यह स्पष्ट होना बाकी है कि कथित फर्जी हस्ताक्षरों के पीछे कौन जिम्मेदार था।

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