UP चुनाव 2027: CM योगी का 'जिन्ना' को लेकर बड़ा बयान! बोले—'जातिवाद और जिन्नावाद का मिलकर मुकाबला करना होगा', कांग्रेस पर भी निशाना
सरदार पटेल की 151वीं जयंती पर लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राष्ट्रीय एकता, जातिवाद और जिन्ना की विचारधारा का मुद्दा उठाया। नेहरू की कश्मीर नीति और अनुच्छेद 370 को लेकर कांग्रेस की आलोचना की।
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CM Yogi Jinnah Statement: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 31 अक्टूबर को लखनऊ में सरदार पटेल जयंती पर कहा कि जिन्ना को आदर्श मानने वाले पटेल के सच्चे अनुयायी नहीं हो सकते। उन्होंने जातिवाद और क्षेत्रवाद को राष्ट्रीय एकता के लिए चुनौती बताया और कश्मीर मुद्दे पर कांग्रेस की आलोचना की।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | लखनऊ | 31 अक्टूबर 2026
खबर में खास
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मुख्यमंत्री योगी ने 31 अक्टूबर को लखनऊ में सरदार पटेल जयंती कार्यक्रम को संबोधित किया।
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जिन्ना को आदर्श मानने वालों और पटेल की विरासत को लेकर राजनीतिक टिप्पणी की।
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जातिवाद, क्षेत्रवाद और भाषावाद को राष्ट्रीय एकता के लिए चुनौती बताया।
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नेहरू की कश्मीर नीति और अनुच्छेद 370 को लेकर कांग्रेस पर सवाल उठाए।
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उनके बयान की विस्तृत रिपोर्ट दोपहर 2:44 बजे तक सामने आ चुकी थी।
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार, 31 अक्टूबर को राष्ट्रीय एकता और सरदार वल्लभभाई पटेल की विरासत को लेकर एक महत्वपूर्ण राजनीतिक बयान दिया। लखनऊ में सरदार पटेल की 151वीं जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने जातिवाद, क्षेत्रवाद और जिन्ना की विचारधारा का जिक्र करते हुए राष्ट्रीय एकता पर जोर दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जो लोग मोहम्मद अली जिन्ना को अपना आदर्श मानते हैं, वे सरदार वल्लभभाई पटेल के सच्चे अनुयायी नहीं हो सकते। उन्होंने कहा कि पटेल के आदर्शों का अनुसरण करने के लिए देश की एकता, सुरक्षा और संप्रभुता को सर्वोपरि रखना आवश्यक है।
यह बयान राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर आया है। मुख्यमंत्री के संबोधन में इतिहास, राष्ट्रवाद और वर्तमान राजनीतिक मुद्दों का उल्लेख रहा।
जातिवाद और जिन्नावाद पर क्या बोले मुख्यमंत्री?
लखनऊ के जीपीओ स्थित पटेल पार्क में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि समाज जब जाति, क्षेत्र और भाषा के आधार पर बँटता है, तब उसकी एकता कमजोर होती है।
उन्होंने इसकी तुलना शरीर की प्रतिरोधक क्षमता से करते हुए कहा कि जिस तरह कमजोर प्रतिरोधक क्षमता बीमारी का खतरा बढ़ाती है, उसी तरह सामाजिक विभाजन देश को कमजोर करता है।
योगी ने जातिवाद, क्षेत्रवाद और जिन्नावाद का सामूहिक मुकाबला करने की अपील की। हालांकि, उन्होंने किस विशेष राजनीतिक नेता को जिन्ना का अनुयायी बताया, इसका स्पष्ट नाम संबंधित बयान में नहीं दिया गया।
नेहरू और कांग्रेस पर भी उठाए सवाल
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने जम्मू-कश्मीर के इतिहास का उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की नीतियों के कारण कश्मीर का मुद्दा जटिल हुआ।
योगी ने अनुच्छेद 370 का जिक्र करते हुए कांग्रेस की आलोचना की और इसके प्रावधान हटाए जाने के फैसले को सरदार पटेल की राष्ट्रीय एकता की सोच से जोड़ा।
यह मुख्यमंत्री की राजनीतिक और ऐतिहासिक व्याख्या है। कश्मीर के इतिहास तथा तत्कालीन संवैधानिक निर्णयों को लेकर अलग-अलग ऐतिहासिक दृष्टिकोण मौजूद हैं।
पटेल की जयंती पर क्यों उठा राजनीतिक मुद्दा?
मुख्यमंत्री ने सरदार वल्लभभाई पटेल को स्वतंत्र भारत के एकीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला नेता बताया। उन्होंने रियासतों के भारत में विलय और राष्ट्रीय एकता की उनकी भूमिका को याद किया।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने पटेल की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की और उपस्थित लोगों को राष्ट्रीय एकता की शपथ दिलाई।
उन्होंने कहा कि देश की एकता को मजबूत बनाए रखना सभी नागरिकों की जिम्मेदारी है।
रोजगार के मुद्दे पर भी दिया संदेश
मुख्यमंत्री ने इस दौरान उत्तर प्रदेश के युवाओं और रोजगार का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने राज्य के प्रत्येक जिले में कौशल प्रशिक्षण और रोजगार से जुड़ी सुविधाओं का विस्तार करने की सरकारी योजना का उल्लेख किया।
इसी दिन मुख्यमंत्री ने ₹1,725 करोड़ की सरदार वल्लभभाई पटेल कौशल प्रशिक्षण एवं रोजगार क्षेत्र विकास योजना का शुभारंभ किया। इसके पहले चरण में लखनऊ, कानपुर, गोरखपुर, झांसी और गौतमबुद्ध नगर शामिल हैं।
UP चुनाव 2027 से पहले बयान के क्या मायने?
उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा और विपक्षी दलों के बीच राष्ट्रीय एकता, जातीय राजनीति, रोजगार और विकास जैसे मुद्दों पर सार्वजनिक बहस चल रही है।
मुख्यमंत्री के इस बयान में भी राष्ट्रवाद और इतिहास से जुड़े सवाल प्रमुख रहे। हालांकि, केवल इस भाषण के आधार पर किसी विशेष चुनावी रणनीति या मतदाताओं की प्रतिक्रिया का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मुख्यमंत्री की टिप्पणी पर विपक्षी दलों की ओर से क्या आधिकारिक प्रतिक्रिया आती है और आने वाले दिनों में राजनीतिक चर्चा किन मुद्दों पर केंद्रित रहती है।
इस बयान के बाद एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक सवाल है—सरदार पटेल की विरासत, सामाजिक एकता और रोजगार जैसे मुद्दों पर राजनीतिक दल कौन-से ठोस प्रस्ताव जनता के सामने रखते हैं?
