उमर अब्दुल्ला की पार्टी में नाराज विधायकों ने खोला मोर्चा! 18 विधायकों की बैठक के बाद कैबिनेट बदलने की मांग, अनुच्छेद 370 का मुद्दा भी उठा

उमर अब्दुल्ला की पार्टी में नाराज विधायकों ने खोला मोर्चा! 18 विधायकों की बैठक के बाद कैबिनेट बदलने की मांग, अनुच्छेद 370 का मुद्दा भी उठा

Omar Abdullah NC MLAs News: जम्मू-कश्मीर में उमर अब्दुल्ला के कैबिनेट विस्तार के बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायकों की बैठक हुई। रिपोर्ट के अनुसार 18 विधायकों ने मंत्रिमंडल में बदलाव, सलाहकार को हटाने और अनुच्छेद 370 तथा राज्य के दर्जे का मुद्दा उठाया।

प्रत्यक्षदर्शी समाचार | श्रीनगर | 31 अक्टूबर 2026
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जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के मंत्रिमंडल विस्तार के बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायकों ने नई मांगें उठाई हैं।

खबर में खास

  • नेशनल कॉन्फ्रेंस के करीब 18 विधायकों की शुक्रवार को श्रीनगर में बैठक हुई।
  • मंत्रिमंडल में दो वर्ष पूरे कर चुके मंत्रियों को बदलने की मांग सामने आई।

  • मुख्यमंत्री के सलाहकार नासिर असलम वानी को हटाने की मांग भी रिपोर्ट में शामिल।

  • जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल कराने और अनुच्छेद 370 पर प्रयास तेज करने की मांग।

  • विधायकों की संख्या को लेकर अलग-अलग मीडिया रिपोर्टों में अंतर है।
जम्मू-कश्मीर में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के हालिया मंत्रिमंडल विस्तार के बाद सत्ताधारी नेशनल कॉन्फ्रेंस के भीतर असंतोष खुलकर सामने आ रहा है। शुक्रवार, 30 अक्टूबर को श्रीनगर में पार्टी के विधायकों की बैठक हुई, जिसके बाद शनिवार को उनकी मांगों का विस्तृत विवरण सामने आया।
स्थानीय समाचार एजेंसी कश्मीर न्यूज ऑब्जर्वर (KNO) के अनुसार, विधायकों ने मंत्रिमंडल में बदलाव, पार्टी के चुनावी वादों को समयबद्ध तरीके से लागू करने और जम्मू-कश्मीर के राज्य का दर्जा बहाल कराने की दिशा में राजनीतिक प्रयास तेज करने की मांग वाला ज्ञापन तैयार किया है।

18 विधायकों की बैठक में क्या हुआ?

 यह बैठक लोलाब विधानसभा क्षेत्र के विधायक कैसर जमशेद लोन के श्रीनगर स्थित आवास पर हुई।
विधायकों ने हाल में किए गए मंत्रिमंडल विस्तार में वरिष्ठता, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और संगठन के भीतर निर्णय लेने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए।
हालांकि, बैठक में शामिल विधायकों की संख्या पर मीडिया रिपोर्टें अलग हैं। कुछ रिपोर्टों में 18, कुछ में 19 और NDTV में 24 तक विधायकों के समर्थन का उल्लेख है। अंतर का एक कारण ऑनलाइन शामिल विधायकों तथा निर्दलीय समर्थकों की गिनती हो सकती है। कोई एक आधिकारिक संख्या स्थापित नहीं हुई है।

किन मंत्रियों को हटाने की मांग?

बैठक से जुड़ी रिपोर्टों में बताया गया कि कुछ विधायक चाहते हैं कि सरकार गठन के बाद से मंत्री पद संभाल रहे नेताओं की जगह नए चेहरों को अवसर दिया जाए।
मुख्यमंत्री के सलाहकार नासिर असलम वानी को हटाने की मांग भी सामने आई है।
द न्यू इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में विधायक नजीर अहमद गुरेजी ने बैठक होने की पुष्टि की, लेकिन इसका राजनीतिक महत्व कम बताते हुए कहा कि उन्हें भोजन के लिए आमंत्रित किया गया था। उन्होंने मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलने से निराशा स्वीकार की, मगर मंत्री पद मांगने से इनकार किया।

27 अक्टूबर के कैबिनेट विस्तार से क्यों नाराजगी?

उमर अब्दुल्ला ने 27 अक्टूबर को मंत्रिमंडल का विस्तार किया था। इसमें अली मोहम्मद सागर, मीर सैफुल्लाह, शमीमा फिरदौस और अल्ताफ अहमद वानी को मंत्री बनाया गया।
इस फेरबदल में निर्दलीय विधायक सतीश शर्मा को मंत्रिपरिषद से बाहर किया गया था।
इसके बाद कुछ वरिष्ठ नेताओं ने मंत्री पद के वितरण और क्षेत्रीय संतुलन को लेकर असंतोष जताया। वरिष्ठ विधायक मुबारक गुल और अब्दुल मजीद लारमी की नाराजगी भी रिपोर्ट की गई है।

अनुच्छेद 370 और राज्य के दर्जे की मांग भी उठी

नई रिपोर्ट का महत्वपूर्ण पहलू यह है कि विधायकों की मांगें केवल मंत्री पद तक सीमित नहीं हैं।
KNO के अनुसार, ज्ञापन में जम्मू-कश्मीर के राज्य का दर्जा बहाल कराने, अनुच्छेद 370 को लेकर राजनीतिक प्रयास तेज करने और नेशनल कॉन्फ्रेंस के 2024 के चुनावी घोषणापत्र को समयसीमा के भीतर लागू करने की मांग शामिल है।
समाचार एजेंसी के सूत्रों ने ज्ञापन पार्टी नेतृत्व के आवास पर भेजे जाने की बात कही है। हालांकि, पार्टी नेतृत्व ने इसकी प्राप्ति की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

क्या उमर अब्दुल्ला की सरकार पर संकट है?

नाराजगी और विधायकों की बैठक की खबरों के बावजूद यह कहना जल्दबाजी होगी कि सरकार गिरने वाली है।
अभी इन विधायकों द्वारा सरकार से औपचारिक समर्थन वापस लेने या किसी नए राजनीतिक गठबंधन की घोषणा का पुष्ट प्रमाण सामने नहीं आया है।
अब नजर इस बात पर होगी कि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और पार्टी अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला मांगपत्र पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।
मुख्य सवाल यह है कि नेशनल कॉन्फ्रेंस नेतृत्व मंत्रिमंडल में दोबारा बदलाव करेगा या असंतुष्ट विधायकों से बातचीत के जरिए समाधान निकालेगा?

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