UP Politics: 1 नवंबर को लखनऊ में योगी की पदयात्रा की तैयारी, दिल्ली में राहुल-खरगे की महारैली; SIR पर BJP-कांग्रेस आमने-सामने

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर विपक्ष की 'वोट बचाओ, देश बचाओ' रैली के जवाब में भाजपा 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' अभियान चलाएगी। अमित शाह हैदराबाद और करनाल के कार्यक्रमों में शामिल होंगे।

UP Politics में 1 नवंबर को लखनऊ में योगी आदित्यनाथ की पदयात्रा प्रस्तावित है। उसी दिन दिल्ली में कांग्रेस की महारैली होगी। जानिए SIR विवाद पर दोनों दलों की तैयारियां।

प्रत्यक्षदर्शी समाचार | लखनऊ/नई दिल्ली | 27 अक्टूबर 2026
pd-news-yogi-lucknow-padyatra-opposition-rally-27oct2026-featured.webp (2)
SIR विवाद के बीच 1 नवंबर को लखनऊ में भाजपा और दिल्ली में विपक्ष के राजनीतिक कार्यक्रमों की तैयारी।

खबर में खास

  • 1 नवंबर को लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पदयात्रा प्रस्तावित है।
  • उसी दिन दिल्ली के रामलीला मैदान में कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों की रैली की तैयारी है।

  • भाजपा का देशव्यापी अभियान 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' नाम से संचालित किया जाएगा।

  • 2 नवंबर को हैदराबाद और 5 नवंबर को करनाल में अमित शाह के कार्यक्रम प्रस्तावित हैं।

  • दोनों पक्षों के बीच विवाद का मुख्य विषय मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया है।

दिल्ली में विपक्ष की रैली, लखनऊ में योगी की तैयारी

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर भाजपा और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव तेज हो रहा है।
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में 'वोट बचाओ, देश बचाओ' रैली आयोजित करने की योजना बनाई है।
इस बीच भाजपा ने भी इसी मुद्दे पर देशव्यापी जनसंपर्क अभियान तैयार किया है। , 1 नवंबर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लखनऊ में पार्टी के प्रस्तावित कार्यक्रम का नेतृत्व करेंगे।
भाजपा इस अभियान के माध्यम से मतदाता सूची पुनरीक्षण को लेकर विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे आरोपों का जवाब जनता के बीच देने की तैयारी में है।

राहुल गांधी और कांग्रेस की क्या मांग है?

कांग्रेस ने SIR की प्रक्रिया में मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर सवाल उठाए हैं।
पार्टी ने कथित चुनावी अनियमितताओं की स्वतंत्र जाँच, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR प्रक्रिया की समीक्षा की मांग उठाई है।
इन्हीं मांगों को लेकर कांग्रेस ने दिल्ली में रैली का कार्यक्रम तय किया है। रिपोर्टों में राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के कार्यक्रम से जुड़ने की जानकारी दी गई है।
हालांकि विपक्ष द्वारा लगाए गए चुनावी गड़बड़ी के आरोप अपने आप सिद्ध तथ्य नहीं हैं। संबंधित मामलों में चुनाव आयोग का पक्ष और न्यायिक प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण हैं।

BJP ने क्या जवाबी रणनीति बनाई?

भाजपा ने 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' अभियान के तहत पदयात्राओं और जनसंपर्क कार्यक्रमों की योजना बनाई है।
पार्टी का आरोप है कि विपक्ष मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया को गलत तरीके से प्रस्तुत कर रहा है।
 भाजपा केंद्रीय मंत्रियों, मुख्यमंत्रियों और अन्य वरिष्ठ नेताओं को इन कार्यक्रमों में शामिल करने की तैयारी कर रही है।
उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, जबकि दूसरे राज्यों में पार्टी के अन्य प्रमुख नेताओं के कार्यक्रम प्रस्तावित हैं। अभी इन कार्यक्रमों को संपन्न हो चुकी पदयात्राएं नहीं माना जाना चाहिए।

अमित शाह कहां-कहां करेंगे पदयात्रा?

भाजपा की योजनाओं में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दो कार्यक्रम विशेष रूप से शामिल हैं।
तेलंगाना भाजपा अध्यक्ष एन. रामचंदर राव ने 2 नवंबर को हैदराबाद में अमित शाह की भागीदारी वाली पदयात्रा की जानकारी दी है।
इसके बाद 5 नवंबर को हरियाणा के करनाल में भी अमित शाह के कार्यक्रम की तैयारी है।
पार्टी के मुताबिक, इन आयोजनों में मतदाता सूची की शुद्धता और विपक्ष के आरोपों को लेकर अपना पक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।

1 नवंबर की तारीख पर भी BJP-कांग्रेस में विवाद

भाजपा ने विपक्ष की दिल्ली रैली के लिए 1 नवंबर की तारीख चुने जाने पर भी सवाल उठाए हैं।
 भाजपा ने 1984 के सिख विरोधी दंगों की बरसी, दिल्ली में संभावित कानून-व्यवस्था की स्थिति और व्यापारिक गतिविधियों पर असर जैसे मुद्दे उठाए हैं।
वहीं कांग्रेस अपनी प्रस्तावित रैली को मतदाता अधिकारों और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता के सवाल से जोड़ रही है।
रैली के आयोजन को लेकर दोनों दलों के तर्क अलग हैं। फिलहाल आयोजन के बाद किसी तरह की अव्यवस्था या चुनावी प्रक्रिया प्रभावित होने का दावा करना उचित नहीं होगा।

अब 1 नवंबर को क्या देखना महत्वपूर्ण होगा?

आने वाले दिनों में लखनऊ और दिल्ली के दोनों कार्यक्रमों की अंतिम प्रशासनिक अनुमति, स्थल, समय और नेताओं की भागीदारी पर स्पष्ट जानकारी सामने आना महत्वपूर्ण होगा।
इसके अलावा चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट में SIR से जुड़े मामलों पर आने वाले निर्णय भी राजनीतिक चर्चा को प्रभावित कर सकते हैं।
फिलहाल स्थिति यह है कि 1 नवंबर के लिए दोनों पक्षों ने राजनीतिक कार्यक्रमों की तैयारी की है। इनमें से कोई कार्यक्रम अभी आयोजित नहीं हुआ है।

About The Author

Advertisement

LatestNews

2027 चुनाव से पहले BJP की दिल्ली में बड़ी बैठक! नितिन नबीन ने बुलाए राष्ट्रीय महासचिव, यूपी समेत 5 राज्यों और 'वोट चोरी' विवाद पर मंथन
ममता सरकार के पूर्व मंत्री इंद्रनील सेन गिरफ्तार! दुर्गा पूजा पास मामले में ₹50–60 करोड़ की कथित गड़बड़ी, CM सुवेंदु अधिकारी ने ममता पर भी लगाए आरोप
CJI सूर्यकांत पर टिप्पणी के बाद संजय राउत ने मांगी बिना शर्त माफी! सुप्रीम कोर्ट ने फिर भी 17 नवंबर को बुलाया, राहुल गांधी और चुनाव आयोग से जुड़ा पूरा विवाद
यूपी में आंदोलन किया तो सरकारी नौकरी नहीं मिलेगी? योगी सरकार के नए आदेश पर सपा-कांग्रेस का विरोध, जानिए FIR का पूरा नियम
'कांग्रेस 200 सीटें मांगे तो जीरो याद दिला देना!' अखिलेश यादव को ओपी राजभर की सलाह, राहुल गांधी और सपा-कांग्रेस गठबंधन पर निशाना
यूपी MLC चुनाव में 50 साल पुराना शिक्षक संघ का दबदबा खत्म! BJP-सपा ने जीतीं सभी 6 शिक्षक सीटें, बड़े शिक्षक नेताओं को हार
PM मोदी ने पूछा—कांग्रेस कितनी सीटें जीती? अगले ही दिन नागपुर से आया जवाब! कांग्रेस ने 3,271 वोटों से बचाई MLC सीट