यूपी MLC चुनाव में 50 साल पुराना शिक्षक संघ का दबदबा खत्म! BJP-सपा ने जीतीं सभी 6 शिक्षक सीटें, बड़े शिक्षक नेताओं को हार

उत्तर प्रदेश के शिक्षक MLC चुनावों में बड़ा राजनीतिक बदलाव सामने आया है। माध्यमिक शिक्षक संघ के अलग-अलग गुटों का कोई प्रत्याशी नहीं जीत सका। करीब पांच दशक तक प्रभावशाली रहे शर्मा गुट का भी विधान परिषद में प्रत्यक्ष प्रतिनिधित्व समाप्त हो गया है।

UP MLC Election 2026: शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की छह सीटों में भाजपा ने चार और समाजवादी पार्टी ने दो जीतीं। माध्यमिक शिक्षक संघ के उम्मीदवार एक भी सीट नहीं जीत सके। जानिए कैसे बदली शिक्षक राजनीति और ओमप्रकाश शर्मा के संगठन का पुराना प्रभाव क्यों घटा।

प्रत्यक्षदर्शी समाचार | लखनऊ | 29 अक्टूबर 2026
pd-news-up-mlc-teachers-union-sharma-group-29oct2026-og.webp
उत्तर प्रदेश के छह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में भाजपा और समाजवादी पार्टी के उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की।

खबर में खास

  • यूपी की छह शिक्षक MLC सीटों पर भाजपा और समाजवादी पार्टी की जीत।
  • भाजपा को चार और सपा को दो शिक्षक निर्वाचन सीटें मिलीं।

  • माध्यमिक शिक्षक संघ के किसी गुट का अपना प्रत्याशी चुनाव नहीं जीत सका।

  • शिक्षक संघ के नेता ओमप्रकाश शर्मा लगातार आठ बार विधान परिषद सदस्य रहे थे।

  • गोरखपुर-फैजाबाद सीट पर शिक्षक संगठन से जुड़े निर्दलीय राजीव यादव ने कड़ा मुकाबला किया, लेकिन हार गए।
उत्तर प्रदेश विधान परिषद चुनाव 2026 के नतीजों ने राज्य की शिक्षक राजनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव सामने रखा है। कभी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में निर्णायक भूमिका निभाने वाले माध्यमिक शिक्षक संघ के अलग-अलग गुट इस बार एक भी सीट नहीं जीत सके।
29 अक्टूबर को प्रकाशित चुनावी रिपोर्टों के अनुसार, छह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में से चार पर भारतीय जनता पार्टी और दो पर समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी विजयी हुए। सबसे महत्वपूर्ण बदलाव उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ के शर्मा गुट से जुड़ा है, जिसका करीब पांच दशक पुराना प्रत्यक्ष प्रतिनिधित्व अब विधान परिषद में नहीं रहेगा।

ओमप्रकाश शर्मा का 48 साल पुराना राजनीतिक रिकॉर्ड

उत्तर प्रदेश की शिक्षक राजनीति में ओमप्रकाश शर्मा का नाम लंबे समय तक प्रभावशाली रहा। वह 1972 से मेरठ-सहारनपुर शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से लगातार आठ बार विधान परिषद पहुंचे।
लगभग 48 वर्षों तक वह शिक्षक संगठनों की राजनीति में प्रमुख चेहरा रहे। लेकिन 2020 में भाजपा के श्रीचंद शर्मा ने उन्हें चुनाव में पराजित कर दिया था। इसके बाद जनवरी 2021 में उनका निधन हो गया।
अब 2026 के चुनाव में उनके संगठन का कोई प्रतिनिधि जीत नहीं सका

बड़े शिक्षक नेताओं को कितने वोट मिले?

इस चुनाव में माध्यमिक शिक्षक संघ के कई गुटों के प्रमुख पदाधिकारी खुद मैदान में उतरे, लेकिन उन्हें अपेक्षित सफलता नहीं मिली।
शिक्षक संगठन प्रत्याशियों के प्राप्त मत
चेतनारायण सिंह — वाराणसी 3,471
सोहन लाल वर्मा — लखनऊ 1,940
जितेंद्र कुमार पटेल — वाराणसी 1,088
राजीव यादव — गोरखपुर-फैजाबाद 14,580
स्रोत: अमर उजाला, 29 अक्टूबर 2026। राजीव यादव निर्दलीय लड़े और शिक्षक संगठन से जुड़े थे।
 

ध्रुव त्रिपाठी BJP में गए, राजीव यादव से कड़ा मुकाबला

गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक सीट पर निवर्तमान एमएलसी ध्रुव कुमार त्रिपाठी इस बार भाजपा के प्रत्याशी बने। इससे पहले वह शिक्षक संघ से जुड़े रहे थे।
उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार राजीव यादव को केवल 307 वोटों के अंतर से हराया।
वहीं वाराणसी शिक्षक सीट पर पूर्व शिक्षक संघ पदाधिकारी डॉ. प्रमोद मिश्रा भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़े, लेकिन सपा के लाल बिहारी यादव से पराजित हुए।

शिक्षक संघों की पकड़ क्यों कमजोर हुई?

माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेशीय मंत्री नरेंद्र वर्मा के अनुसार, 2008 के आसपास वित्तविहीन विद्यालयों के शिक्षकों की मतदाता भागीदारी बढ़ने और बाद में राजनीतिक दलों की सक्रियता के कारण पुराने शिक्षक संगठनों का चुनावी प्रभाव कम होने लगा।
इसके अलावा शिक्षक संघों के अलग-अलग गुटों में बंटने को भी चुनावी प्रदर्शन कमजोर होने का कारण बताया जा रहा है।
हालांकि, शिक्षक संघ के प्रतिनिधियों की हार का अर्थ यह नहीं है कि विधान परिषद में शिक्षक पृष्ठभूमि वाले सभी सदस्य समाप्त हो गए हैं। कानपुर खंड शिक्षक क्षेत्र से निर्वाचित निर्दलीय राजबहादुर सिंह चंदेल पहले से सदन में हैं।

2027 से पहले क्या है राजनीतिक महत्व?

यह चुनाव दिखाता है कि शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में राजनीतिक दलों की संगठित भागीदारी महत्वपूर्ण हो गई है। पहले शिक्षक संगठनों के अपने उम्मीदवार प्रमुख मुकाबले में रहते थे, जबकि इस बार छह सीटों पर भाजपा और सपा के प्रत्याशियों को जीत मिली।
लेकिन शिक्षक MLC निर्वाचन क्षेत्रों का मतदाता वर्ग सामान्य विधानसभा क्षेत्रों से अलग होता है। इसलिए इन नतीजों से 2027 के विधानसभा चुनाव का परिणाम निर्धारित नहीं किया जा सकता।
अब प्रमुख सवाल यह है कि शिक्षक संगठन आगे स्वतंत्र राजनीतिक प्रतिनिधित्व कैसे बनाए रखेंगे और निर्वाचित दलगत उम्मीदवार शिक्षकों की मांगों को विधान परिषद में किस तरह उठाएंगे।

About The Author

Advertisement

LatestNews

2027 चुनाव से पहले BJP की दिल्ली में बड़ी बैठक! नितिन नबीन ने बुलाए राष्ट्रीय महासचिव, यूपी समेत 5 राज्यों और 'वोट चोरी' विवाद पर मंथन
ममता सरकार के पूर्व मंत्री इंद्रनील सेन गिरफ्तार! दुर्गा पूजा पास मामले में ₹50–60 करोड़ की कथित गड़बड़ी, CM सुवेंदु अधिकारी ने ममता पर भी लगाए आरोप
CJI सूर्यकांत पर टिप्पणी के बाद संजय राउत ने मांगी बिना शर्त माफी! सुप्रीम कोर्ट ने फिर भी 17 नवंबर को बुलाया, राहुल गांधी और चुनाव आयोग से जुड़ा पूरा विवाद
यूपी में आंदोलन किया तो सरकारी नौकरी नहीं मिलेगी? योगी सरकार के नए आदेश पर सपा-कांग्रेस का विरोध, जानिए FIR का पूरा नियम
'कांग्रेस 200 सीटें मांगे तो जीरो याद दिला देना!' अखिलेश यादव को ओपी राजभर की सलाह, राहुल गांधी और सपा-कांग्रेस गठबंधन पर निशाना
यूपी MLC चुनाव में 50 साल पुराना शिक्षक संघ का दबदबा खत्म! BJP-सपा ने जीतीं सभी 6 शिक्षक सीटें, बड़े शिक्षक नेताओं को हार
PM मोदी ने पूछा—कांग्रेस कितनी सीटें जीती? अगले ही दिन नागपुर से आया जवाब! कांग्रेस ने 3,271 वोटों से बचाई MLC सीट