UP Election 2027: अखिलेश यादव ने BJP के पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप की बेटी कीर्ति को बिथरी चैनपुर से सपा प्रत्याशी बनाया। जानिए 2022 का वोट गणित।
BJP के पूर्व सांसद की बेटी को अखिलेश ने दिया टिकट! बिथरी चैनपुर से कीर्ति कश्यप मैदान में, बदलेगा बरेली का गणित?
समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पूर्व भाजपा सांसद धर्मेंद्र कश्यप की बेटी कीर्ति कश्यप को बरेली की बिथरी चैनपुर विधानसभा सीट से 2027 चुनाव के लिए उम्मीदवार घोषित किया।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | लखनऊ/बरेली | 28 अक्टूबर 2026
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले समाजवादी पार्टी ने बरेली की राजनीति में बड़ा चुनावी फैसला लिया है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा के पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप की बेटी कीर्ति कश्यप को बिथरी चैनपुर विधानसभा सीट से उम्मीदवार घोषित कर दिया है।
इस फैसले की खास बात यह है कि कीर्ति कश्यप अपने पिता के साथ मंगलवार, 27 अक्टूबर को ही समाजवादी पार्टी में शामिल हुई थीं। इसके बाद सपा ने उन्हें अगले विधानसभा चुनाव के लिए प्रत्याशी बनाने की घोषणा कर दी।
बिथरी चैनपुर विधानसभा सीट पर पिछले दो चुनावों से भाजपा जीतती रही है। ऐसे में सपा के इस फैसले को केवल एक उम्मीदवार की घोषणा नहीं, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में नए सामाजिक और राजनीतिक समीकरण बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
खबर में खास
अखिलेश यादव ने कीर्ति कश्यप को बिथरी चैनपुर विधानसभा सीट से सपा उम्मीदवार घोषित किया।
कीर्ति भाजपा के पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप की बेटी हैं।
धर्मेंद्र कश्यप 2014 और 2019 में आंवला से भाजपा सांसद रहे हैं।
2022 में बिथरी चैनपुर सीट भाजपा ने 15,841 वोटों से जीती थी।
सपा ने पहले अयोध्या से पवन पांडे को उम्मीदवार बनाने की घोषणा की थी।
आंवला विधानसभा सीट पर सपा में दावेदारी को लेकर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है।
सपा में शामिल होते ही कीर्ति कश्यप को मिला टिकट
मंगलवार को लखनऊ स्थित समाजवादी पार्टी मुख्यालय में अखिलेश यादव की मौजूदगी में पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप और उनकी बेटी कीर्ति कश्यप ने पार्टी की सदस्यता ग्रहण की।
इस दौरान अखिलेश यादव ने बिथरी चैनपुर विधानसभा सीट से कीर्ति को चुनाव मैदान में उतारने की घोषणा की।
अखिलेश यादव ने दावा किया कि धर्मेंद्र कश्यप और उनकी बेटी के सपा में आने से बरेली, रुहेलखंड और पूरे उत्तर प्रदेश में उनकी पार्टी के पीडीए अभियान को मजबूती मिलेगी।
उन्होंने यह भी कहा कि कीर्ति कश्यप आगामी चुनाव में भाजपा को हराने का काम करेंगी।
हालांकि, यह सपा अध्यक्ष का राजनीतिक दावा है। चुनावी परिणाम उम्मीदवारों, दलों और मतदाताओं के अंतिम फैसले पर निर्भर करेगा।
बिथरी चैनपुर में 2022 का चुनावी गणित क्या था?
बिथरी चैनपुर विधानसभा क्षेत्र बरेली जिले की महत्वपूर्ण सीटों में शामिल है। इस सीट पर वर्ष 2022 में भाजपा के डॉ. राघवेंद्र शर्मा ने जीत दर्ज की थी।
उनके मुकाबले समाजवादी पार्टी ने अगम कुमार मौर्य को उम्मीदवार बनाया था।
2022 के विधानसभा चुनाव में प्रमुख उम्मीदवारों को मिले वोट इस प्रकार थे:
उम्मीदवार
पार्टी
वोट
डॉ. राघवेंद्र शर्मा
भाजपा
1,15,417
अगम कुमार मौर्य
सपा
99,576
आशीष पटेल
बसपा
22,727
तौफीक
एआईएमआईएम
2,858
भाजपा की जीत का अंतर 15,841 वोट रहा। इस परिणाम से स्पष्ट है कि पिछली बार सपा ने यहां मजबूत मुकाबला किया था, लेकिन जीत हासिल नहीं कर सकी।
अखिलेश ने कीर्ति कश्यप को ही क्यों चुना?
कीर्ति कश्यप के चयन के पीछे एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संदर्भ उनके पिता धर्मेंद्र कश्यप का बरेली और आंवला क्षेत्र से पुराना जुड़ाव है।
धर्मेंद्र कश्यप भाजपा के टिकट पर 2014 और 2019 में आंवला लोकसभा सीट से सांसद निर्वाचित हुए थे। इससे पहले वह समाजवादी पार्टी में भी रह चुके हैं।
वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्हें सपा के नीरज मौर्य से हार मिली थी।
अब पिता और बेटी के समाजवादी पार्टी में आने के बाद सपा नेतृत्व को उम्मीद है कि उनके राजनीतिक संपर्कों और स्थानीय पहचान से बिथरी चैनपुर सहित आसपास के क्षेत्रों में पार्टी को लाभ होगा।
लेकिन धर्मेंद्र कश्यप का व्यक्तिगत राजनीतिक प्रभाव उनकी बेटी के पक्ष में कितना वोट स्थानांतरित कर पाएगा, यह फिलहाल अनुमान का विषय है।
सपा के पुराने उम्मीदवार अगम कुमार मौर्य का क्या होगा?
वर्ष 2022 में बिथरी चैनपुर से सपा के अगम कुमार मौर्य उम्मीदवार थे। उन्हें लगभग एक लाख वोट मिले थे।
अब 2027 के लिए कीर्ति कश्यप के नाम की घोषणा होने से सपा की ओर से इस सीट पर उम्मीदवार बदलने की स्थिति बन गई है।
हालांकि, अगम कुमार मौर्य को संगठन में आगे क्या जिम्मेदारी दी जाएगी, इस बारे में उपलब्ध विश्वसनीय रिपोर्टों में कोई स्पष्ट आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
ऐसे में यह कहना सही नहीं होगा कि वह पार्टी से नाराज हैं या सपा छोड़ने की तैयारी कर रहे हैं।
यह फैसला बताता है कि सपा नेतृत्व पिछले चुनाव के मुकाबले नया प्रत्याशी उतारकर क्षेत्र में अलग राजनीतिक समीकरण बनाना चाहता है।
आंवला सीट पर सपा में दावेदारी का मामला अभी बाकी
कीर्ति कश्यप की सीट तय होने के साथ ही बरेली जिले की दूसरी सीट आंवला को लेकर भी चर्चा जारी है।
हिन्दुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, आंवला विधानसभा सीट पर वीरपाल सिंह यादव और महिपाल सिंह यादव के बीच दावेदारी को लेकर मंगलवार को बैठक में बातचीत हुई।
रिपोर्ट में बताया गया कि अखिलेश यादव ने दोनों नेताओं के बीच सहमति बनाने की कोशिश की, लेकिन तत्काल कोई अंतिम निर्णय नहीं हो सका।
सूत्रों के हवाले से यह संभावना भी जताई गई कि यहां अन्य पिछड़ा वर्ग से किसी नए चेहरे पर विचार किया जा सकता है।
हालांकि, समाजवादी पार्टी ने आंवला सीट के लिए अभी किसी नए उम्मीदवार की आधिकारिक घोषणा नहीं की है।
अयोध्या के बाद बरेली, सपा ने उम्मीदवार घोषित करने में दिखाई तेजी
समाजवादी पार्टी ने 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर कुछ सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा शुरू कर दी है।
इससे पहले अखिलेश यादव अयोध्या विधानसभा सीट से पूर्व विधायक पवन पांडे को प्रत्याशी बनाने की घोषणा कर चुके हैं।
अब बिथरी चैनपुर सीट से कीर्ति कश्यप के नाम की घोषणा हुई है।
दोनों घोषणाएं बताती हैं कि सपा कुछ निर्वाचन क्षेत्रों में पहले से उम्मीदवार तय करके उन्हें प्रचार और संगठनात्मक तैयारी के लिए समय देना चाहती है।
हालांकि, अभी उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों के लिए पार्टी की कोई संपूर्ण उम्मीदवार सूची जारी नहीं हुई है।
भाजपा के सामने क्या चुनौती होगी?
बिथरी चैनपुर सीट पर भाजपा वर्ष 2017 और 2022, दोनों चुनावों में जीत चुकी है।
वर्ष 2022 में भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच 15,841 वोटों का अंतर था। अब सपा ने उस सीट पर एक ऐसे राजनीतिक परिवार से उम्मीदवार घोषित किया है, जिसके प्रमुख सदस्य लंबे समय तक भाजपा से जुड़े रहे हैं।
भाजपा के लिए अपनी पिछली चुनावी बढ़त बरकरार रखना महत्वपूर्ण होगा, जबकि समाजवादी पार्टी को अपने पुराने समर्थकों के साथ नए मतदाताओं तक पहुंच बनानी होगी।
फिलहाल भाजपा ने 2027 के लिए इस सीट पर अपना उम्मीदवार घोषित नहीं किया है। इसलिए अभी से कीर्ति कश्यप और डॉ. राघवेंद्र शर्मा के बीच मुकाबला निश्चित बताना उचित नहीं होगा।
क्या 2027 में बिथरी चैनपुर का परिणाम बदल सकता है?
इस सीट पर सपा का नया उम्मीदवार तय होने के बाद राजनीतिक मुकाबला दिलचस्प हो गया है।
धर्मेंद्र कश्यप का स्थानीय प्रभाव, कीर्ति कश्यप की चुनावी तैयारी, भाजपा के मौजूदा संगठन और बसपा समेत अन्य दलों की भूमिका आगामी चुनाव में महत्वपूर्ण होगी।
लेकिन पिछली बार मिले वोट अपने-आप किसी नए प्रत्याशी के हिस्से नहीं आते। मतदाता उम्मीदवार, पार्टी, स्थानीय समस्याओं और सरकार के कामकाज सहित कई आधारों पर फैसला करते हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है—क्या अखिलेश यादव का कीर्ति कश्यप पर लगाया दांव बिथरी चैनपुर में भाजपा की लगातार दो चुनावों की जीत का सिलसिला रोक पाएगा, या भाजपा एक बार फिर इस सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखेगी?
इसका वास्तविक जवाब 2027 के विधानसभा चुनाव के परिणाम में ही मिलेगा।