UP Politics: बुलंदशहर से BSP के चुनावी अभियान की शुरुआत। आकाश आनंद ने अखिलेश के PDA पर हमला बोला और BJP से रोजगार व महंगाई पर सवाल पूछे।
'PDA के नाम पर हमारे समाज को बटोर रहे अखिलेश', आकाश आनंद का बड़ा हमला; बुलंदशहर से BSP ने फूंका 2027 का बिगुल
बुलंदशहर में 28 अक्टूबर 2026 को आयोजित बसपा की जनसभा में राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद ने अखिलेश यादव के PDA अभियान पर सवाल उठाए और भाजपा सरकार को रोजगार तथा महंगाई के मुद्दों पर घेरा।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | बुलंदशहर/लखनऊ | 28 अक्टूबर 2026
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले बहुजन समाज पार्टी ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश से अपना चुनावी अभियान तेज कर दिया है। बुधवार को बुलंदशहर के अनूपशहर क्षेत्र में आयोजित जनसभा में बसपा के राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद ने समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने सपा के PDA अभियान पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि अखिलेश यादव बहुजन समाज को अपने पक्ष में जोड़ने के लिए इस नारे का इस्तेमाल कर रहे हैं।
आकाश आनंद यहीं नहीं रुके। उन्होंने भाजपा सरकार को भी रोजगार, शिक्षा, महंगाई और विकास के मुद्दों पर घेरा। मायावती द्वारा दोबारा राजनीतिक जिम्मेदारी सौंपे जाने के बाद उनकी इस रैली को बसपा के 2027 चुनाव अभियान का महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।
खबर में खास
बुलंदशहर के अनूपशहर क्षेत्र में आकाश आनंद ने चुनावी जनसभा को संबोधित किया।
सपा के PDA अभियान पर सवाल उठाते हुए अखिलेश यादव पर राजनीतिक अवसरवाद का आरोप लगाया।
भाजपा सरकार को बेरोजगारी, शिक्षा और महंगाई के मुद्दों पर घेरा।
मायावती से दोबारा जिम्मेदारी मिलने के बाद हुई बातचीत का जिक्र किया।
बसपा ने अगले महीने सहारनपुर, अयोध्या, आगरा और कानपुर नगर में भी जनसभाओं की योजना बनाई है।
अखिलेश यादव के PDA अभियान पर सीधा हमला
बुलंदशहर की सभा में आकाश आनंद ने समाजवादी पार्टी की राजनीति को लेकर कई सवाल उठाए।
उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव का PDA अभियान बहुजन समाज के मतदाताओं को अपने साथ जोड़ने का राजनीतिक प्रयास है। आकाश ने PDA की अलग-अलग व्याख्याओं को लेकर भी सपा नेतृत्व पर निशाना साधा।
आकाश आनंद ने कहा कि सपा अपने राजनीतिक हितों के अनुसार नारों और सामाजिक समीकरणों की व्याख्या बदलती है।
उन्होंने पूर्ववर्ती सपा सरकार के कार्यकाल का भी उल्लेख किया और आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी के दावों तथा उसके कामकाज में अंतर रहा है।
ये बसपा नेता के राजनीतिक आरोप हैं। सपा की ओर से इन ताजा टिप्पणियों पर कोई पुष्ट आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध रिपोर्टों में नहीं मिली है।
चौधरी चरण सिंह और जाट समाज का मुद्दा भी उठाया
आकाश आनंद ने अपने भाषण में जाट समाज और पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह का भी उल्लेख किया।
उन्होंने अखिलेश यादव की हाल की एक टिप्पणी पर आपत्ति जताते हुए आरोप लगाया कि सपा नेतृत्व ने जाट समाज से जुड़े एक वरिष्ठ नेता के प्रति अनुचित भाषा का इस्तेमाल किया था।
उन्होंने सवाल उठाया कि जो राजनीतिक दल विभिन्न सामाजिक वर्गों के सम्मान की बात करता है, उसे अपने सार्वजनिक बयानों में भी उसी सिद्धांत का पालन करना चाहिए।
हालांकि, अखिलेश यादव की संबंधित मूल टिप्पणी का पूरा संदर्भ स्वतंत्र रूप से पुष्ट नहीं हुआ है। इसलिए आकाश आनंद के इस आरोप को स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता।
भाजपा से पूछा—रोजगार और शिक्षा पर कितना ध्यान दिया?
समाजवादी पार्टी के बाद आकाश आनंद ने भाजपा सरकार को भी निशाने पर लिया।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने अपनी उपलब्धियों के प्रचार-प्रसार पर बड़ी रकम खर्च की, लेकिन युवाओं के रोजगार और शिक्षा से जुड़ी समस्याओं को पर्याप्त प्राथमिकता नहीं दी।
आकाश आनंद ने भाजपा के विकास संबंधी दावों पर सवाल उठाते हुए सड़क निर्माण, सरकारी योजनाओं और सार्वजनिक सुविधाओं की स्थिति पर भी टिप्पणी की।
उन्होंने कहा कि चुनावी प्रचार के साथ-साथ सरकार को जनता की वास्तविक समस्याओं का जवाब देना चाहिए।
हालांकि, सरकार के प्रचार खर्च, बेरोजगारी और निर्माण कार्यों के बारे में उनके दावों की स्वतंत्र तथ्य-जांच इस रिपोर्ट के लिए उपलब्ध नहीं है।
महंगाई पर भी भाजपा को घेरा
आकाश आनंद ने अपने भाषण में महंगाई का मुद्दा भी उठाया।
उन्होंने कहा कि भाजपा ने 2014 के चुनाव के दौरान महंगाई को महत्वपूर्ण मुद्दा बनाया था, लेकिन अब आम परिवारों को गैस सिलेंडर, पेट्रोल और रोजमर्रा की जरूरतों के खर्च का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने सरकार से पूछा कि बढ़ती महंगाई को नियंत्रित करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।
आकाश ने अपने भाषण में घरेलू गैस और पेट्रोल की कीमतों की तुलना भी की। हालांकि, संबंधित कीमतें समय, शहर और उत्पाद के अनुसार अलग हो सकती हैं। इसलिए उनके बताए आंकड़ों को बिना अलग सत्यापन के वर्तमान आधिकारिक कीमत नहीं माना जा सकता
मायावती से पूछा था—बार-बार मेरी परीक्षा क्यों?
रैली में आकाश आनंद ने बसपा प्रमुख मायावती के साथ हुई एक व्यक्तिगत राजनीतिक बातचीत का भी उल्लेख किया।
उन्होंने बताया कि पार्टी की जिम्मेदारियों से हटाए जाने के बाद जब उन्हें मायावती के सामने अपनी बात रखने का अवसर मिला, तो उन्होंने बार-बार परीक्षा लिए जाने के बारे में सवाल किया।
आकाश आनंद के अनुसार, मायावती ने उन्हें डॉ. भीमराव आंबेडकर और बसपा संस्थापक कांशीराम के लंबे संघर्ष का उदाहरण दिया।
उन्होंने बताया कि मायावती का संदेश था कि बड़े सामाजिक आंदोलन की जिम्मेदारी संभालने के लिए लगातार परीक्षा और संघर्ष से गुजरना पड़ता है।
आकाश ने कहा कि उस बातचीत से वह भावुक हो गए और उन्होंने बसपा तथा बहुजन समाज के लिए पूरी मेहनत से काम करने का भरोसा दिया।
2027 से पहले बसपा की रणनीति क्या है?
बहुजन समाज पार्टी ने अपने चुनावी अभियान के लिए आकाश आनंद को अलग-अलग क्षेत्रों में जनसभाओं की जिम्मेदारी दी है।
28 अक्टूबर की बुलंदशहर सभा के बाद 2 नवंबर को सहारनपुर, 20 नवंबर को अयोध्या, 22 नवंबर को आगरा और 29 नवंबर को कानपुर नगर में कार्यक्रम प्रस्तावित हैं।
इन सभाओं का उद्देश्य कार्यकर्ताओं को सक्रिय करना, पार्टी के समर्थक वर्गों से संपर्क मजबूत करना और विधानसभा चुनाव की तैयारी को आगे बढ़ाना है।
वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में बसपा को उत्तर प्रदेश में केवल एक सीट मिली थी। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी कोई सीट नहीं जीत सकी थी।
इस पृष्ठभूमि में 2027 के चुनाव से पहले बसपा के लिए संगठन और मतदाता समर्थन बढ़ाना एक महत्वपूर्ण चुनौती है।
क्या सपा और भाजपा दोनों के खिलाफ लड़ाई तेज करेगी BSP?
बुलंदशहर की रैली से यह संकेत मिला कि बसपा अपने चुनावी अभियान में भाजपा और समाजवादी पार्टी दोनों को निशाने पर रखेगी।
सपा के PDA अभियान के सामने बसपा अपना बहुजन राजनीतिक आधार मजबूत करना चाहती है। दूसरी तरफ भाजपा के खिलाफ रोजगार, महंगाई और प्रशासनिक कामकाज जैसे मुद्दों को उठाने की तैयारी दिखाई देती है।
हालांकि, रैली में दिए गए भाषण के आधार पर यह तय नहीं किया जा सकता कि आगामी चुनाव में बसपा का जनाधार कितना बढ़ेगा।
सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या आकाश आनंद की सक्रियता बसपा के पुराने समर्थकों को फिर एकजुट कर पाएगी, या अखिलेश यादव का PDA अभियान 2027 में भी इन मतदाता वर्गों के बीच अपनी पकड़ बनाए रखेगा?
यह उत्तर प्रदेश की आगामी चुनावी राजनीति का एक महत्वपूर्ण सवाल होगा।