CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 30 अक्टूबर को 'जन महाभियोग'! खरगे के घर जुटेगा INDIA गठबंधन, क्या सच में हट सकते हैं मुख्य चुनाव आयुक्त?

चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्ष ने बढ़ाया दबाव। 30 अक्टूबर को दोपहर 3:30 बजे खड़गे के आवास पर कार्यक्रम होगा। जानिए आरोप, पुलिस का जवाब और महाभियोग का नियम।

चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्ष ने बढ़ाया दबाव। 30 अक्टूबर को दोपहर 3:30 बजे खड़गे के आवास पर कार्यक्रम होगा। जानिए आरोप, पुलिस का जवाब और महाभियोग का नियम।

CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 30 अक्टूबर को 'जन महाभियोग'! खरगे के घर जुटेगा INDIA गठबंधन, क्या सच में हट सकते हैं मुख्य चुनाव आयुक्त?

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0 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ INDIA गठबंधन का सार्वजनिक विरोध कार्यक्रम प्रस्तावित है।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | नई दिल्ली | 28 अक्टूबर 2026
देश की राजनीति में चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच टकराव तेज हो गया है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग को लेकर INDIA गठबंधन ने 30 अक्टूबर को दिल्ली में 'जन महाभियोग' नाम से कार्यक्रम आयोजित करने की घोषणा की है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने विपक्षी दलों के नेताओं को अपने सरकारी आवास पर बुलाया है। कार्यक्रम शुक्रवार, 30 अक्टूबर को दोपहर 3:30 बजे दिल्ली के 10, राजाजी मार्ग स्थित आवास पर प्रस्तावित है।
लेकिन इस घटनाक्रम का सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या विपक्ष के इस 'जन महाभियोग' से वास्तव में मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाया जा सकता है?
संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार इसका जवाब नहीं है। यह विपक्ष का राजनीतिक विरोध कार्यक्रम है, मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की औपचारिक संसदीय प्रक्रिया नहीं।

खबर में खास

  • 30 अक्टूबर को INDIA गठबंधन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध कार्यक्रम आयोजित करेगा।
  • कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने विपक्षी नेताओं को दिल्ली बुलाया है।

  • कार्यक्रम का समय दोपहर 3:30 बजे और स्थान 10, राजाजी मार्ग निर्धारित है।

  • कांग्रेस ने दूसरे स्थानों पर अनुमति न मिलने का आरोप लगाया है।

  • दिल्ली पुलिस ने 1 नवंबर की विपक्षी रैली की अनुमति वापस लेने से इनकार किया है।

  • 'जन महाभियोग' अपने-आप मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से नहीं हटा सकता।

खरगे ने विपक्षी नेताओं को पत्र लिखकर बुलाया

कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने 27 अक्टूबर को INDIA गठबंधन के नेताओं को पत्र भेजा।
पत्र में सभी संबंधित विपक्षी नेताओं से 30 अक्टूबर की दोपहर दिल्ली स्थित उनके सरकारी आवास पर एकत्र होने का अनुरोध किया गया।
बुधवार, 28 अक्टूबर को कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने भी स्पष्ट किया कि कार्यक्रम खड़गे के आवास पर ही आयोजित किया जाएगा।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विपक्ष की शिकायतों और उन्हें पद से हटाने की मांग को सार्वजनिक मंच पर उठाना है।
हालांकि, किन-किन दलों के कौन से नेता कार्यक्रम में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होंगे, इसकी अंतिम सूची अभी उपलब्ध नहीं है।

आखिर ज्ञानेश कुमार से क्यों नाराज है विपक्ष?

कांग्रेस और INDIA गठबंधन लंबे समय से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR और चुनावी प्रक्रिया से संबंधित मुद्दों पर सवाल उठा रहे हैं।
विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूचियों में बदलाव की प्रक्रिया से कुछ पात्र मतदाताओं के नाम हटने का खतरा पैदा हुआ है।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी सार्वजनिक मंचों पर मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं और 'वोट चोरी' का मुद्दा उठाते रहे हैं।
विपक्ष के कुछ नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से इस्तीफा देने की मांग की है।
हालांकि, ये विपक्ष के आरोप और राजनीतिक मांगें हैं। इनके आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने जानबूझकर किसी राजनीतिक दल को फायदा पहुंचाया है।

अशोक होटल से खड़गे के घर क्यों पहुंचा कार्यक्रम?

शुरुआत में विपक्ष 30 अक्टूबर के आयोजन को दिल्ली के अशोक होटल में करना चाहता था।

कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि होटल में कार्यक्रम की अनुमति पहले मिलने के बाद वापस ले ली गई।

इसके बाद विपक्ष ने रामलीला मैदान में कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बनाई।

कांग्रेस का दावा है कि वहां भी तैयारियों में बाधा डाली गई। वेणुगोपाल ने इसे विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश बताते हुए केंद्र सरकार पर आरोप लगाए।

लेकिन दिल्ली पुलिस की ओर से अलग स्पष्टीकरण सामने आया है।

पुलिस के अनुसार, 1 नवंबर की रैली के लिए कानून-व्यवस्था संबंधी अनापत्ति प्रमाणपत्र वापस नहीं लिया गया है। यह अनुमति संबंधित भूमि प्राधिकरण की स्वीकृति और निर्धारित शर्तों के अधीन है।

पुलिस सूत्रों ने यह भी कहा कि 30 अक्टूबर के अलग कार्यक्रम के लिए आवश्यक अनुमति संबंधी स्थिति कांग्रेस के दावे से भिन्न थी।

ऐसे में यह विवाद केवल आयोजन स्थल का नहीं, बल्कि कांग्रेस और पुलिस की अलग-अलग व्याख्याओं का भी है।

क्या 'जन महाभियोग' से ज्ञानेश कुमार पद से हट जाएंगे?

नहीं। यह सबसे महत्वपूर्ण तथ्य है।
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 324(5) के अनुसार मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने के लिए वही संवैधानिक आधार और प्रक्रिया लागू होती है, जो सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाने के लिए निर्धारित है।
इसके लिए संसद में निर्धारित विशेष बहुमत और संवैधानिक प्रक्रिया का पालन करना पड़ता है।
किसी राजनीतिक दल द्वारा आयोजित सार्वजनिक बैठक, प्रतीकात्मक संसद या 'जन महाभियोग' अपने-आप मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने का अधिकार नहीं रखता।
इसलिए विपक्ष के प्रस्तावित कार्यक्रम को संवैधानिक महाभियोग की औपचारिक कार्यवाही नहीं कहा जा सकता।
इस आयोजन का उद्देश्य राजनीतिक दबाव बनाना और अपने आरोपों के पक्ष में सार्वजनिक समर्थन जुटाना है।

संसद में भी उठ चुका है हटाने का मुद्दा

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग केवल सार्वजनिक विरोध तक सीमित नहीं रही है।
विपक्षी दलों ने संसद में भी उन्हें हटाने से संबंधित नोटिस दिए हैं।
द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, पहले नोटिस स्वीकार नहीं हुए थे, जबकि दूसरे नोटिस का एक हिस्सा राज्यसभा में लंबित बताया गया है।
लेकिन संसदीय नोटिस दिया जाना और उसे स्वीकार करके संवैधानिक प्रक्रिया आगे बढ़ाया जाना अलग-अलग चरण हैं।
इसलिए अभी यह कहना सही नहीं होगा कि मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ संसद में औपचारिक हटाने की कार्यवाही शुरू हो चुकी है।

1 नवंबर को दिल्ली में बड़ी रैली की तैयारी

30 अक्टूबर के कार्यक्रम के दो दिन बाद INDIA गठबंधन ने 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में बड़ी रैली आयोजित करने की योजना बनाई है।
विपक्ष इस रैली के जरिए मतदाता सूची और चुनाव आयोग से जुड़े सवालों को बड़े सार्वजनिक मंच पर उठाना चाहता है।
कांग्रेस नेताओं ने बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की उम्मीद जताई है। हालांकि, अभी वास्तविक भागीदारी का आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।
दिल्ली पुलिस ने रैली को लेकर सुरक्षा, आयोजकों की जिम्मेदारियों और कार्यक्रम की समाप्ति के समय से जुड़ी शर्तें निर्धारित की हैं।
रैली के प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार इसे शाम पांच बजे तक समाप्त किया जाना है।

यूपी की राजनीति के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह विरोध?

समाजवादी पार्टी भी INDIA गठबंधन का हिस्सा है। उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सपा और कांग्रेस के राजनीतिक संबंध महत्वपूर्ण बने हुए हैं।
यूपी में मतदाता सूची और चुनाव प्रशासन से जुड़े मुद्दों पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव पहले भी सवाल उठा चुके हैं।
हालांकि, 30 अक्टूबर के कार्यक्रम में अखिलेश यादव की व्यक्तिगत उपस्थिति की पुष्टि नहीं हुई है।
ऐसे में विपक्ष की यह मुहिम यूपी की राजनीति से भी जुड़ती है, लेकिन इसे सपा और कांग्रेस की किसी नई चुनावी रणनीति या गठबंधन समझौते की औपचारिक घोषणा नहीं माना जा सकता।

अब 30 अक्टूबर को किस बात पर रहेगी नजर?

सबसे पहले यह देखना होगा कि विपक्षी गठबंधन के कितने प्रमुख नेता खड़गे के आवास पर जुटते हैं।
दूसरा, क्या कार्यक्रम में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कोई नया दस्तावेज या अतिरिक्त प्रमाण सार्वजनिक किया जाता है?
तीसरा, क्या विपक्ष अपनी मांग को संसद की औपचारिक प्रक्रिया में आगे बढ़ाने की कोई नई घोषणा करता है?
फिलहाल यह स्पष्ट है कि विपक्ष चुनाव आयोग पर राजनीतिक दबाव बढ़ाने की तैयारी कर रहा है।
सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या 'जन महाभियोग' और सार्वजनिक रैलियों से विपक्ष चुनाव आयोग के खिलाफ अपनी मांग को नई ताकत दे पाएगा, या यह टकराव राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित रह जाएगा?
इसका जवाब 30 अक्टूबर के कार्यक्रम और उसके बाद की राजनीतिक तथा संसदीय गतिविधियों से मिलेगा।

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