राहुल गांधी के 'वोट चोरी' अभियान के जवाब में सड़क पर BJP! नितिन नवीन संभालेंगे मोर्चा, 10 लाख युवाओं तक पहुंचने का प्लान

SIR पर विपक्ष के आरोपों का जवाब देने के लिए भाजपा का देशव्यापी अभियान। दिल्ली में नितिन नवीन की पदयात्रा प्रस्तावित, 5 नवंबर तक कार्यक्रम चलेंगे।

BJP Padyatra: राहुल गांधी के वोट चोरी अभियान के जवाब में भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन दिल्ली में पदयात्रा करेंगे। जानिए पार्टी की रणनीति और यूपी से कनेक्शन।

राहुल गांधी के 'वोट चोरी' अभियान के जवाब में सड़क पर BJP! नितिन नवीन संभालेंगे मोर्चा, 10 लाख युवाओं तक पहुंचने का प्लान

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बुलंदशहर में 28 अक्टूबर 2026 को आयोजित बसपा की जनसभा में राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद ने अखिलेश यादव के PDA अभियान पर सवाल उठाए और भाजपा सरकार को रोजगार तथा महंगाई के मुद्दों पर घेरा।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | नई दिल्ली/लखनऊ | 28 अक्टूबर 2026
देश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच जारी टकराव अब सड़क पर राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन तक पहुंच गया है। राहुल गांधी और INDIA गठबंधन के 'वोट चोरी' संबंधी आरोपों का जवाब देने के लिए भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन दिल्ली के चांदनी चौक से पदयात्रा अभियान को आगे बढ़ाने की तैयारी में हैं।
बुधवार, 28 अक्टूबर को दिल्ली में भाजपा की 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' पदयात्रा प्रस्तावित है। इसमें दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं के शामिल होने की संभावना है।
इस अभियान के तहत भाजपा देशभर में जनसंपर्क, युवा संवाद, प्रेस कॉन्फ्रेंस और प्रमुख नागरिकों के साथ बैठकों का आयोजन कर रही है। पार्टी ने दस लाख से अधिक युवाओं और पेशेवरों तक पहुंचने का लक्ष्य रखा है।
यह गतिविधि ऐसे समय हो रही है, जब विपक्ष 30 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रतीकात्मक 'जन महाभियोग' और 1 नवंबर को दिल्ली में बड़ी रैली करने की तैयारी कर रहा है।

खबर में खास

  • भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन की दिल्ली के चांदनी चौक में पदयात्रा प्रस्तावित।
  • 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' अभियान 5 नवंबर तक चलेगा।

  • भाजपा SIR और कथित वोट चोरी पर विपक्ष के आरोपों का जवाब देगी।

  • दस लाख से अधिक युवाओं और पेशेवरों से संवाद का लक्ष्य।

  • अमित शाह सहित वरिष्ठ नेताओं के अलग-अलग राज्यों में कार्यक्रम प्रस्तावित।

  • 1 नवंबर को विपक्ष की दिल्ली में बड़ी रैली की तैयारी।

नितिन नवीन को खुद सड़क पर क्यों उतरना पड़ा?

भाजपा और कांग्रेस के बीच मतदाता सूची को लेकर विवाद लगातार बढ़ रहा है।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी और विपक्षी गठबंधन के कई नेताओं ने विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि कुछ पात्र मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटाए जा सकते हैं।
दूसरी तरफ भाजपा का कहना है कि विपक्ष चुनावी संस्थाओं को लेकर जनता में अविश्वास पैदा करने की कोशिश कर रहा है।
इन्हीं आरोपों का राजनीतिक जवाब देने के लिए भाजपा ने अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष को अभियान का प्रमुख चेहरा बनाया है।
NDTV की रिपोर्ट के अनुसार, नितिन नवीन पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद पहली बार इस मुद्दे पर सीधे सड़क पर उतरकर विपक्ष के खिलाफ पदयात्रा का नेतृत्व करने वाले हैं।
इसका उद्देश्य कार्यकर्ताओं को सक्रिय करना और मतदाता सूची संबंधी विवाद पर भाजपा का पक्ष जनता के सामने रखना है।

चांदनी चौक से शुरू होगा राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन

भाजपा ने दिल्ली के ऐतिहासिक चांदनी चौक इलाके में कार्यक्रम की तैयारी की है।
रिपोर्टों के अनुसार, पदयात्रा लाल किले के आसपास से टाउन हॉल की ओर प्रस्तावित है। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, दिल्ली भाजपा के वरिष्ठ पदाधिकारियों, सांसदों और अन्य नेताओं के इसमें शामिल होने की संभावना जताई गई है।
हालांकि, प्रकाशित रिपोर्टों में कार्यक्रम शुरू होने के समय को लेकर अंतर है। कुछ में दोपहर दो बजे, कुछ में शाम चार बजे और अन्य में शाम पांच बजे का समय बताया गया है।
इसलिए वास्तविक आयोजन शुरू होने का समय और उपस्थित नेताओं की अंतिम संख्या स्वतंत्र पुष्टि के बाद ही निश्चित रूप से बताई जा सकती है।
दिल्ली यातायात पुलिस ने 28 अक्टूबर को दोपहर तीन से शाम पांच बजे के बीच चांदनी चौक और लाल किला क्षेत्र में संभावित भीड़ तथा यातायात परिवर्तन को लेकर एडवाइजरी जारी की है।

सिर्फ पदयात्रा नहीं, दस लाख युवाओं तक पहुंचने का लक्ष्य

भाजपा की योजना केवल दिल्ली तक सीमित नहीं है।
पार्टी अपने अभियान के तहत देश के विभिन्न जिलों में युवाओं, विद्यार्थियों और पेशेवरों के बीच संवाद कार्यक्रम आयोजित कर रही है।
इन कार्यक्रमों में मतदाता सूची, SIR, चुनावी संस्थाओं की भूमिका और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की योजना है।
NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक भाजपा ने राष्ट्रीय स्तर पर दस लाख से अधिक युवाओं और पेशेवरों को इन गतिविधियों से जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
इसके अलावा विश्वविद्यालयों, कॉलेजों, आईटीआई और कोचिंग संस्थानों में भी कार्यक्रम आयोजित करने की योजना है।
दस लाख का आंकड़ा पार्टी का निर्धारित लक्ष्य है, अब तक अभियान में शामिल हो चुके लोगों की पुष्ट संख्या नहीं।

प्रभावशाली लोगों और स्थानीय संगठनों तक भी पहुंचेगी भाजपा

भाजपा ने अपने अभियान में केवल पार्टी कार्यकर्ताओं को शामिल करने के बजाय समाज के अलग-अलग वर्गों से संपर्क करने की योजना बनाई है।
रिपोर्ट के अनुसार, पार्टी प्रत्येक लोकसभा क्षेत्र में लगभग दो हजार प्रमुख नागरिकों, बुद्धिजीवियों और प्रभावशाली व्यक्तियों से संपर्क करने का लक्ष्य लेकर चल रही है।
इसके अतिरिक्त विधानसभा क्षेत्रों में संवाद कार्यक्रमों के आयोजन तथा जिला और प्रदेश स्तर पर प्रेस कॉन्फ्रेंस की योजना भी बनाई गई है।
भाजपा का उद्देश्य अपने राजनीतिक संदेश को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना है।
हालांकि, अभियान की सफलता का आकलन कार्यक्रमों में वास्तविक भागीदारी और जनता की प्रतिक्रिया के आधार पर ही किया जा सकेगा।

अमित शाह और भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री भी होंगे सक्रिय

इस अभियान में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सहित भाजपा के अन्य वरिष्ठ नेताओं की भागीदारी भी प्रस्तावित है।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक अमित शाह के 2 नवंबर को हैदराबाद और 5 नवंबर को हरियाणा के करनाल में कार्यक्रम तय किए गए हैं।
पार्टी शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों को भी अभियान में सक्रिय करने की तैयारी है।
भाजपा नेतृत्व चाहता है कि मतदाता सूची को लेकर कांग्रेस और विपक्ष द्वारा उठाए गए आरोपों का जवाब राष्ट्रीय स्तर के साथ स्थानीय स्तर पर भी दिया जाए।

राहुल गांधी और कांग्रेस क्या आरोप लगा रहे हैं?

कांग्रेस और INDIA गठबंधन का कहना है कि मतदाता सूची की शुद्धता के नाम पर होने वाली प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए।
विपक्ष ने मतदाताओं के नाम हटने, दस्तावेजों की जांच, तकनीकी प्रक्रियाओं और चुनाव आयोग के फैसलों को लेकर सवाल उठाए हैं।
राहुल गांधी ने इन मुद्दों को अपने राजनीतिक अभियान का प्रमुख हिस्सा बनाया है।
कांग्रेस की मांग है कि कथित चुनावी अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच हो और चुनाव आयोग जनता के सामने उठे सवालों का स्पष्ट जवाब दे।
हालांकि, विपक्ष के सभी आरोप सिद्ध तथ्य नहीं हैं। चुनाव आयोग का आधिकारिक पक्ष, संबंधित दस्तावेज और न्यायिक प्रक्रिया भी इस विवाद में महत्वपूर्ण हैं।

भाजपा का आरोप—लोकतांत्रिक संस्थाओं पर अविश्वास पैदा कर रहा विपक्ष

भाजपा का तर्क है कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण चुनावी व्यवस्था की सामान्य और आवश्यक प्रक्रिया है।
पार्टी का आरोप है कि कांग्रेस तथा विपक्ष के अन्य नेता राजनीतिक लाभ के लिए इस प्रक्रिया को विवादित बना रहे हैं।
इसी जवाबी अभियान को भाजपा ने 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' नाम दिया है।
हालांकि, मतदाता सूची में किसी वास्तविक त्रुटि की शिकायत और राजनीतिक आरोप के बीच अंतर करना आवश्यक है। यदि किसी पात्र व्यक्ति का नाम गलत तरीके से हटाया जाता है, तो उसका नियमानुसार समाधान चुनाव प्रशासन की जिम्मेदारी है।

30 अक्टूबर और 1 नवंबर को विपक्ष की बड़ी तैयारी

भाजपा की पदयात्रा के दो दिन बाद 30 अक्टूबर को INDIA गठबंधन ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रतीकात्मक विरोध कार्यक्रम की योजना बनाई है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के दिल्ली स्थित आवास पर प्रस्तावित इस आयोजन को विपक्ष ने 'जन महाभियोग' का नाम दिया है।
इसके बाद 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में विपक्ष की बड़ी जनसभा की तैयारी है।
यह विरोध कार्यक्रम संवैधानिक रूप से मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की औपचारिक संसदीय प्रक्रिया नहीं है।
अब दोनों राजनीतिक पक्ष सार्वजनिक कार्यक्रमों के माध्यम से अपनी बात जनता तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं।

यूपी विधानसभा चुनाव 2027 से क्या संबंध?

उत्तर प्रदेश अगले विधानसभा चुनाव की तैयारी की ओर बढ़ रहा है। यहां भाजपा, समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच मतदाता सूची तथा चुनावी प्रशासन के मुद्दों पर लगातार राजनीतिक बहस हो रही है।
सपा प्रमुख अखिलेश यादव भी मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठा चुके हैं।
ऐसे में भाजपा का राष्ट्रीय अभियान उत्तर प्रदेश के चुनावी माहौल के लिए भी महत्वपूर्ण है।
हालांकि, दिल्ली की पदयात्रा से यूपी के आगामी विधानसभा चुनाव का परिणाम तय नहीं हो जाता। मतदाताओं की पसंद, स्थानीय मुद्दे, उम्मीदवार और संगठनात्मक तैयारी अलग-अलग चुनावी कारक होंगे।

अब आगे किस बात पर रहेगी नजर?

सबसे पहले यह देखना होगा कि भाजपा की दिल्ली पदयात्रा में किन वरिष्ठ नेताओं की वास्तविक भागीदारी होती है और नितिन नवीन अपने संबोधन में विपक्ष के आरोपों पर क्या जवाब देते हैं।
दूसरा, क्या पार्टी SIR को लेकर कोई नए दस्तावेज या तथ्य सार्वजनिक करती है?
तीसरा, कांग्रेस और INDIA गठबंधन अपनी 30 अक्टूबर तथा 1 नवंबर की गतिविधियों में कौन-सी नई मांगें उठाते हैं?
सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या भाजपा का देशव्यापी जवाबी अभियान राहुल गांधी के 'वोट चोरी' मुद्दे का राजनीतिक प्रभाव कम कर पाएगा, या विपक्ष इस विवाद को 2027 के चुनाव तक बड़ा मुद्दा बनाए रखेगा?
इसका जवाब आने वाले राजनीतिक कार्यक्रमों और मतदाताओं की प्रतिक्रिया से ही स्पष्ट होगा।

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