कर्नाटक में कांग्रेस चारों MLC सीटें हारी! BJP-JDS ने किया 4-0 से क्लीन स्वीप, खरगे के गृहक्षेत्र वाली सीट पर भी झटका

कर्नाटक विधान परिषद चुनाव में भाजपा ने तीन और जेडीएस ने एक सीट जीती। कांग्रेस अपना कब्जा भी नहीं बचा सकी। डीके शिवकुमार ने हार स्वीकार की।

Karnataka MLC Result 2026: BJP-JDS गठबंधन ने चारों सीटें जीतीं। कांग्रेस को एक भी सीट नहीं मिली। जानिए विजेता, वोटों का अंतर और राजनीतिक मायने।

कर्नाटक में कांग्रेस चारों MLC सीटें हारी! BJP-JDS ने किया 4-0 से क्लीन स्वीप, खरगे के गृहक्षेत्र वाली सीट पर भी झटका

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कर्नाटक MLC चुनाव 2026 में BJP-JDS गठबंधन का 4-0 से क्लीन स्वीप। भाजपा ने तीन और जेडीएस ने एक सीट जीती, जबकि कांग्रेस को चारों सीटों पर हार का सामना करना पड़ा।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | बेंगलुरु/नई दिल्ली | 28 अक्टूबर 2026
कर्नाटक की राजनीति में सत्तारूढ़ कांग्रेस को बड़ा चुनावी झटका लगा है। विधान परिषद की चार सीटों पर हुए चुनाव में भारतीय जनता पार्टी और जनता दल सेक्युलर (जेडीएस) गठबंधन ने सभी सीटें जीत ली हैं। भाजपा ने तीन सीटों पर कब्जा बरकरार रखा, जबकि जेडीएस ने बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की सीट कांग्रेस से छीन ली।
इस परिणाम के साथ कांग्रेस चारों सीटों पर हार गई। सबसे दिलचस्प बात यह है कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के गृह क्षेत्र कलबुर्गी को शामिल करने वाले उत्तर-पूर्व शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में भी भाजपा प्रत्याशी ने जीत दर्ज की।
चुनाव परिणाम सामने आने के बाद भाजपा ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार पर राजनीतिक तंज कसा, जबकि शिवकुमार ने हार स्वीकार करते हुए संगठन की समीक्षा करने की बात कही है।

खबर में खास

कर्नाटक में 23 अक्टूबर को चार विधान परिषद सीटों के लिए मतदान हुआ था। 27 अक्टूबर को मतगणना शुरू हुई और बुधवार तक सभी परिणाम सामने आ गए।
भाजपा ने तीन सीटों पर जीत हासिल की, जबकि उसकी सहयोगी जेडीएस ने एक सीट जीती। कांग्रेस को कोई सीट नहीं मिली।
बेंगलुरु शिक्षक सीट पर जेडीएस के एपी रंगनाथ ने कांग्रेस के पांच बार के एमएलसी पुट्टन्ना को हराया। वहीं उत्तर-पूर्व शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा के शशिल जी. नमोशी लगातार पांचवीं बार विजयी हुए।

बेंगलुरु में कांग्रेस से जेडीएस ने छीनी सीट

बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में कांग्रेस ने अपने मौजूदा विधान परिषद सदस्य पुट्टन्ना को उम्मीदवार बनाया था।
उनके सामने भाजपा समर्थित जेडीएस उम्मीदवार एपी रंगनाथ मैदान में थे।
अंतिम परिणाम में रंगनाथ को 10,810 मत मिले, जबकि कांग्रेस के पुट्टन्ना को 9,902 मत प्राप्त हुए।
इस तरह जेडीएस प्रत्याशी ने 908 वोटों से जीत दर्ज की।
पुट्टन्ना पहले जेडीएस से जुड़े रहे थे और 2023 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस में शामिल हो गए थे। अब उनकी पुरानी पार्टी ने भाजपा के समर्थन से उन्हें पराजित कर दिया।

खरगे के गृह क्षेत्र से जुड़े निर्वाचन क्षेत्र में भी BJP की जीत

उत्तर-पूर्व शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा के मौजूदा एमएलसी शशिल जी. नमोशी ने कांग्रेस प्रत्याशी शरणप्पा मट्टूर को हराया।
नमोशी को 15,596 और मट्टूर को 12,299 मत मिले। भाजपा उम्मीदवार 3,297 मतों से विजयी हुए।
यह निर्वाचन क्षेत्र कलबुर्गी और आसपास के जिलों में फैला हुआ है। कलबुर्गी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का गृह क्षेत्र है।
इसी कारण इस जीत को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, यह केवल कलबुर्गी शहर का चुनाव नहीं था, बल्कि कई जिलों के पात्र शिक्षक मतदाताओं का निर्वाचन क्षेत्र था।

चारों सीटों पर किसकी जीत हुई?

निर्वाचन क्षेत्र

विजेता

पार्टी

जीत का अंतर

बेंगलुरु शिक्षक

एपी रंगनाथ

जेडीएस

908

उत्तर-पूर्व शिक्षक

शशिल जी. नमोशी

भाजपा

3,297

दक्षिण-पूर्व स्नातक

केएम सुरेश

भाजपा

23,098

पश्चिम स्नातक

एसवी संकनूर

भाजपा

9,323

मतगणना के अंतिम प्रकाशित आंकड़े: पीटीआई, 28 अक्टूबर 2026

BJP ने डीके शिवकुमार पर कसा तंज

चारों सीटों पर जीत के बाद कर्नाटक भाजपा ने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को निशाने पर लिया।
पार्टी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर “DK, it's done, bro” लिखकर एनडीए की चारों सीटों पर जीत का प्रचार किया।
इस पोस्ट के साथ शिवकुमार की पुरानी तस्वीर भी साझा की गई।
दूसरी ओर भाजपा के वरिष्ठ नेता बीएस येदियुरप्पा ने कांग्रेस सरकार के खिलाफ तीखी टिप्पणी करते हुए नए विधानसभा चुनाव कराने की मांग की।
यह भाजपा की राजनीतिक प्रतिक्रिया है। केवल विधान परिषद की चार सीटों के नतीजों से कर्नाटक विधानसभा को भंग करने की कोई संवैधानिक बाध्यता पैदा नहीं होती।

हार पर मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने क्या कहा?

कांग्रेस की हार के बाद मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा कि पार्टी मतदाताओं के फैसले का सम्मान करती है।
उन्होंने बताया कि कांग्रेस को दो सीटों पर जीत की उम्मीद थी, लेकिन परिणाम उम्मीद के मुताबिक नहीं आया।
शिवकुमार ने संगठन की कमियों की समीक्षा करने और कार्यकर्ताओं को अधिक सक्रिय बनाने की आवश्यकता बताई।
इस प्रतिक्रिया से स्पष्ट है कि कांग्रेस नेतृत्व परिणामों को चुनावी संगठन के लिए एक संदेश के रूप में देख रहा है।

कुमारस्वामी ने बताया 2028 का संकेत

केंद्रीय मंत्री और जेडीएस नेता एचडी कुमारस्वामी ने चारों सीटों पर एनडीए की जीत को महत्वपूर्ण राजनीतिक उपलब्धि बताया।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और दोनों दलों के कार्यकर्ताओं की मेहनत को जीत का श्रेय दिया।
कुमारस्वामी ने दावा किया कि यह परिणाम कर्नाटक में 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले एनडीए के लिए सकारात्मक संकेत है।
हालांकि, यह उनका राजनीतिक आकलन है। शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों का परिणाम सामान्य विधानसभा चुनाव में सभी मतदाताओं की पसंद को सीधे नहीं दर्शाता।

क्या कांग्रेस की सरकार पर कोई खतरा है?

इस चुनाव में कांग्रेस को सभी चार सीटों पर हार मिली है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि राज्य की कांग्रेस सरकार गिर गई है।
कर्नाटक विधान परिषद में कुल 75 सीटें हैं। इन चार सीटों के चुनाव से सरकार की विधानसभा में बहुमत की स्थिति प्रभावित नहीं होती।
कांग्रेस के लिए यह चुनावी हार और संगठनात्मक चुनौती है, जबकि भाजपा-जेडीएस गठबंधन के लिए इसे सफल चुनावी तालमेल के रूप में देखा जा रहा है।

अब कर्नाटक की राजनीति में आगे क्या?

कर्नाटक में अगला विधानसभा चुनाव 2028 में होना है। भाजपा और जेडीएस पहले से राजनीतिक सहयोगी हैं।
चारों विधान परिषद सीटों की जीत के बाद विपक्षी गठबंधन अपनी ताकत और संगठनात्मक तालमेल को लेकर अधिक सक्रिय हो सकता है।
वहीं कांग्रेस के सामने शिक्षक और स्नातक मतदाता वर्ग में समर्थन बढ़ाने, संगठन को मजबूत करने और विपक्ष के राजनीतिक हमलों का जवाब देने की चुनौती होगी।
सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या कर्नाटक में भाजपा-जेडीएस की यह 4-0 की जीत 2028 के विधानसभा चुनाव के लिए विपक्ष की ताकत का शुरुआती संकेत है, या सामान्य चुनाव में राजनीतिक समीकरण अलग होंगे?
आने वाले चुनावों में ही इस सवाल का स्पष्ट जवाब मिलेगा।

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