UP चुनाव 2027: जमानत के बाद भी आजम खान की रिहाई अटकी! 5 मामलों में परवाने जारी, 52 केस बाकी; सोमवार को ED मामले की सुनवाई
इलाहाबाद हाईकोर्ट से राहत मिलने के बावजूद आजम खान और अब्दुल्ला आजम अभी कानूनी औपचारिकताओं में उलझे हैं। रामपुर की अदालतों से बाकी रिहाई परवाने मिलने और जमानतियों के सत्यापन के बाद ही जेल से बाहर आने की स्थिति स्पष्ट होगी।
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Azam Khan Release News: सपा नेता आजम खान को हाईकोर्ट से जमानत मिली, लेकिन पाँच मामलों में रिहाई परवाने जारी होने के बाद भी 52 अन्य मामलों की प्रक्रिया लंबित बताई गई है। बेटे अब्दुल्ला के भी 41 मामलों में औपचारिकताएँ बाकी हैं।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | रामपुर/लखनऊ | 01 नवम्बर 2026
खबर में खास
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 29 अक्टूबर को आजम खान और अब्दुल्ला आजम की सजा निलंबित करते हुए जमानत मंजूर की।
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रामपुर की एमपी-एमएलए सेशन कोर्ट से आजम खान के पाँच मामलों में रिहाई परवाने जारी।
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मजिस्ट्रेट कोर्ट में आजम के 52 और अब्दुल्ला के 41 मामलों की रिहाई संबंधी प्रक्रिया लंबित बताई गई।
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दो पैन कार्ड मामले में आजम की ओर से ₹3.50 लाख और अब्दुल्ला की ओर से ₹2.75 लाख जमा कराए गए।
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ED से जुड़े अलग मामले में पुलिस के रिमांड आवेदन पर सोमवार, 2 नवंबर को सुनवाई प्रस्तावित।
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हाईकोर्ट ने सजा निलंबित की है, दोषसिद्धि पर रोक नहीं लगाई।
रामपुर। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खान तथा उनके बेटे अब्दुल्ला आजम की जेल से रिहाई को लेकर शनिवार, 31 अक्टूबर को नया घटनाक्रम सामने आया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट से दो पैन कार्ड मामले में जमानत मिलने के बावजूद रामपुर की अदालतों में अन्य मुकदमों से जुड़ी कानूनी औपचारिकताएँ पूरी नहीं हो सकी हैं।
शुक्रवार को आजम खान के पाँच मामलों में रिहाई परवाने जारी किए गए थे। लेकिन बाकी मामलों में जमानतियों के दस्तावेजों का सत्यापन और परवाने जारी होने की प्रक्रिया लंबित रहने के कारण वह जेल से बाहर नहीं आ सके।
शनिवार सुबह तक प्रकाशित रिपोर्टों में दोनों की वास्तविक रिहाई की पुष्टि नहीं हुई थी।
पाँच मामलों में राहत, फिर 52 मुकदमों का पेंच
आजम खान के खिलाफ एमपी-एमएलए मजिस्ट्रेट कोर्ट में विचाराधीन 52 मामलों में रिहाई परवाने जारी होने बाकी थे। वहीं अब्दुल्ला आजम के 41 मामलों में भी प्रक्रिया लंबित बताई गई।
पाँच मामलों में दस्तावेजों की जाँच पूरी होने के बाद सेशन कोर्ट ने आजम खान के रिहाई परवाने जारी किए। इनमें डूंगरपुर, यतीमखाना और टांडा थाने से संबंधित मामले शामिल हैं।
इसके बावजूद दूसरे मुकदमों से जुड़ी औपचारिकताएँ पूरी होना आवश्यक है। इसी वजह से हाईकोर्ट से जमानत मिलने और वास्तविक जेल रिहाई के बीच अंतर बना हुआ है।
आजम और अब्दुल्ला ने कितनी रकम जमा कराई?
दो पैन कार्ड मामले में जमानत का आदेश मिलने के बाद आजम खान की ओर से ₹3.50 लाख और अब्दुल्ला आजम की ओर से ₹2.75 लाख अदालत की नजारत में जमा कराए गए।
दोनों की ओर से जमानती भी प्रस्तुत किए गए हैं। अब संबंधित दस्तावेजों का सत्यापन और अन्य मामलों से जुड़ी अदालतों की प्रक्रिया पूरी होना जरूरी है।
रिहाई परवाना किसी एक मुकदमे में जारी होना सभी मुकदमों से हिरासत समाप्त होने के बराबर नहीं है।
हाईकोर्ट से जमानत मिली, फिर भी जेल से क्यों नहीं निकल पा रहे?
29 अक्टूबर को इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति समित गोपाल ने दो पैन कार्ड मामले में आजम खान और अब्दुल्ला आजम की सजा निलंबित करते हुए जमानत मंजूर की थी।
लेकिन अदालत ने दोनों की दोषसिद्धि पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। इसका अर्थ है कि फिलहाल दोषसिद्धि बरकरार है और विधानसभा चुनाव लड़ने की पात्रता से जुड़े कानूनी प्रतिबंध भी समाप्त नहीं हुए हैं।
वहीं, जेल में रहने के दौरान अन्य मामलों में पहले मिली जमानतों को निरस्त कराए जाने के कारण उन मामलों में दोबारा जरूरी प्रक्रिया पूरी करनी पड़ रही है।
सोमवार को ED से जुड़े मामले की सुनवाई
आजम खान की रिहाई से जुड़ा एक अन्य महत्वपूर्ण मामला जौहर यूनिवर्सिटी की कथित वित्तीय अनियमितताओं से संबंधित है।
प्रवर्तन निदेशालय की शिकायत से जुड़े मामले में पुलिस ने रामपुर की विशेष एमपी-एमएलए अदालत से रिमांड की मांग की है। इस आवेदन पर सोमवार, 2 नवंबर को सुनवाई प्रस्तावित है।
यदि अदालत कोई नया हिरासत संबंधी आदेश देती है, तो रिहाई की कानूनी स्थिति प्रभावित हो सकती है। फिलहाल उस आवेदन पर अंतिम आदेश आने की पुष्टि नहीं हुई है।
UP चुनाव 2027 से पहले क्यों महत्वपूर्ण है मामला?
आजम खान उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं। विशेषकर रामपुर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में उनकी लंबे समय से भूमिका रही है।
22 अक्टूबर को सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने रामपुर जेल में उनसे मुलाकात की थी। मुलाकात के बाद अखिलेश ने कहा था कि आजम खान ने कोई सीट नहीं मांगी, बल्कि सुझाव दिए हैं।
अब रिहाई की प्रक्रिया आगे बढ़ने से उनके राजनीतिक कार्यक्रमों और कानूनी स्थिति पर फिर ध्यान केंद्रित हुआ है। हालांकि रिहाई से चुनाव लड़ने की पात्रता अपने आप बहाल नहीं होगी।
आज जेल से बाहर आएंगे या फिर इंतजार बढ़ेगा?
शनिवार सुबह की रिपोर्टों के अनुसार, बचाव पक्ष दस्तावेजों और जमानतियों के सत्यापन की प्रक्रिया पूरी कराने में जुटा है।
लेकिन सभी आवश्यक परवाने जारी होने और जेल प्रशासन को संबंधित आदेश प्राप्त होने की पुष्टि के बिना रिहाई का निश्चित समय बताना संभव नहीं है।
अब दो सवाल अहम हैं—क्या शनिवार को सभी कानूनी औपचारिकताएँ पूरी होंगी और सोमवार को ED से जुड़े मामले में अदालत क्या आदेश देगी?
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