UP में बारिश से फसल खराब हुई तो मुआवजा कैसे मिलेगा? CM योगी ने दिए सर्वे के आदेश, किसानों के लिए 72 घंटे का नियम भी जानें
बेमौसम बारिश से फसल, मकान और पशुधन को हुए नुकसान पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तत्काल सर्वे और पात्र प्रभावितों को राहत देने के निर्देश दिए। फसल बीमा कराने वाले किसानों के लिए समय से नुकसान की सूचना देना जरूरी।
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आपकी वेबसाइट पर अखिलेश यादव की वाराणसी जनसभा बारिश के कारण स्थगित होने की खबर मौजूद है, जिसमें किसानों के नुकसान का भी उल्लेख है। लेकिन मुख्यमंत्री द्वारा राहत और मुआवजे के आदेश तथा फसल बीमा की अलग प्रक्रिया पर प्रकाशित समान रिपोर्ट नहीं मिली।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | लखनऊ | 1 नवंबर 2026
खबर में खास
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30 अक्टूबर को CM योगी ने बारिश से नुकसान का तत्काल आकलन कराने के निर्देश दिए।
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फसल के अलावा मकान क्षति और पशुधन हानि पर भी पात्रता के अनुसार राहत देने को कहा।
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प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में कुछ प्रकार की व्यक्तिगत फसल क्षति की सूचना 72 घंटे में देना जरूरी।
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बीमित किसान कृषि रक्षक हेल्पलाइन 14447 पर संपर्क कर सकते हैं।
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मुआवजे की राशि, पात्रता और भुगतान वास्तविक क्षति के सत्यापन तथा लागू नियमों पर निर्भर करेगा।
उत्तर प्रदेश में बेमौसम बारिश से किसानों की फसलों को हुए नुकसान के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राहत और मुआवजे को लेकर अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। अक्टूबर के अंतिम दिनों में प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश और तेज हवाओं का असर देखने को मिला, जिससे खेतों में खड़ी तथा कटाई के समय की फसलों को नुकसान की आशंका बढ़ी है।
मुख्यमंत्री ने 30 अक्टूबर को अधिकारियों से कहा कि प्रभावित इलाकों में नुकसान का तत्काल आकलन कर किसानों को जल्द सहायता उपलब्ध कराई जाए। इसके साथ ही बारिश से क्षतिग्रस्त मकानों और पशुओं की मौत से प्रभावित परिवारों के लिए भी नियमानुसार राहत सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
अब किसानों के सामने सबसे महत्वपूर्ण सवाल है कि नुकसान दर्ज कैसे कराया जाए, फसल बीमा होने पर क्या करना होगा और मुआवजा मिलने की प्रक्रिया क्या है।
CM योगी ने अधिकारियों को क्या निर्देश दिए?
मुख्यमंत्री ने राजस्व और प्रशासनिक अधिकारियों से प्रभावित क्षेत्रों में जाकर नुकसान का वास्तविक आकलन करने को कहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राहत कार्यों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
सरकार ने उन परिवारों की सहायता करने को भी कहा है जिनके मकान बारिश में क्षतिग्रस्त हुए हैं या गिर गए हैं। बेघर हुए परिवारों को आवश्यकता के अनुसार राहत शिविरों अथवा सुरक्षित आश्रय स्थलों में पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं।
इसके अलावा वरिष्ठ अधिकारियों को प्रभावित परिवारों से सीधे संवाद करने और राहत कार्यों की निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है।
बारिश से फसल खराब हुई है तो किसान क्या करें?
जिन किसानों की फसल बेमौसम बारिश, जलभराव या तेज हवा से खराब हुई है, उन्हें पहले नुकसान का विवरण सुरक्षित रखना चाहिए।
खेत में नुकसान की फोटो, फसल का नाम, प्रभावित क्षेत्र का विवरण और संबंधित जमीन के दस्तावेज जैसी जानकारी अधिकारियों को स्थिति समझाने में उपयोगी हो सकती है।
प्रभावित किसान स्थानीय लेखपाल, तहसील कार्यालय या जिला कृषि विभाग को नुकसान की सूचना देकर सरकारी सर्वे और राहत प्रक्रिया की जानकारी मांग सकते हैं। इसके बाद संबंधित अधिकारियों से यह भी पता करें कि उनके गांव और फसल को किस राहत या बीमा व्यवस्था के तहत शामिल किया गया है।
ध्यान रहे कि सरकारी आपदा राहत और फसल बीमा दो अलग प्रक्रियाएं हो सकती हैं। एक के लिए दिया गया आवेदन दूसरे के लिए स्वतः दावा दर्ज होने की गारंटी नहीं है।
72 घंटे के भीतर सूचना देना क्यों जरूरी है?
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के तहत बीमित फसलों की कुछ श्रेणियों में व्यक्तिगत नुकसान की सूचना घटना के 72 घंटे के भीतर दर्ज कराना आवश्यक है।
इनमें स्थानीय आपदा से हुआ पात्र नुकसान और योजना में निर्धारित कटाई के बाद की कुछ हानियां शामिल हो सकती हैं। ऐसे मामलों में प्रभावित किसान को समय रहते बीमा संबंधी सूचना देनी चाहिए।
इसके लिए कृषि रक्षक पोर्टल एवं हेल्पलाइन का नंबर 14447 है। किसान अपने बैंक या संबंधित बीमा कंपनी से भी संपर्क कर सकते हैं।
यह 72 घंटे की समयसीमा सभी प्रकार के सरकारी मुआवजे के लिए एक समान लागू नहीं होती। बीमा दावे में संबंधित फसल, जिले की अधिसूचना, बीमा कवरेज और घटना का प्रकार महत्वपूर्ण होता है।
क्या सभी किसानों को मुआवजा मिलेगा?
नहीं, केवल बारिश होने या फसल को नुकसान का दावा करने से हर किसान को अपने आप मुआवजा मिलने की पुष्टि नहीं होती।
सरकारी आपदा राहत में वास्तविक नुकसान, पात्रता और लागू सहायता नियमों की जांच होती है। वहीं फसल बीमा के तहत भुगतान के लिए बीमित फसल, नुकसान का प्रकार और योजना की शर्तें देखी जाती हैं।
मुख्यमंत्री ने शीघ्र सहायता देने के निर्देश दिए हैं, लेकिन इस नए नुकसान के लिए सभी किसानों को मिलने वाली कोई एक निश्चित राशि घोषित होने की पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
इसलिए बिना सत्यापन के प्रति एकड़ या प्रति किसान निश्चित भुगतान का दावा करना सही नहीं होगा।
धान की फसल और आलू की बुवाई पर चिंता
अक्टूबर के अंतिम दिनों की बारिश ऐसे समय हुई, जब कुछ क्षेत्रों में धान की कटाई और रबी फसलों की तैयारी चल रही थी।
खेतों में जलभराव और कटाई के आसपास की बारिश से किसानों की परेशानी बढ़ने की रिपोर्ट सामने आई है। हालांकि, पूरे प्रदेश में फसल नुकसान का अंतिम प्रमाणित क्षेत्रफल और कुल आर्थिक क्षति अभी इस रिपोर्ट के लिए उपलब्ध नहीं है।
वास्तविक नुकसान की तस्वीर सरकारी सर्वे पूरा होने और जिलेवार आंकड़े सामने आने के बाद स्पष्ट होगी।
मुआवजे की निगरानी कौन करेगा?
उत्तर प्रदेश में आपदा प्रबंधन और राहत संबंधी कार्यों में राजस्व प्रशासन तथा राहत आयुक्त कार्यालय की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
प्रभावित लोगों के लिए जिलास्तरीय राजस्व अधिकारियों से जानकारी लेना उपयोगी रहेगा। राज्य के राहत आयुक्त कार्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर शासनादेश और राहत संबंधी जानकारी भी उपलब्ध है।
उत्तर प्रदेश राहत आयुक्त कार्यालय
सरकारी सहायता से संबंधित पात्रता और वास्तविक आवेदन प्रक्रिया की पुष्टि संबंधित जिला प्रशासन से करना जरूरी है।
अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल क्या है?
मुख्यमंत्री ने प्रभावित किसानों की मदद के निर्देश दे दिए हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नुकसान का सर्वे कितनी जल्दी पूरा होता है, कितने प्रभावित किसान पात्र पाए जाते हैं और सहायता वितरण के आधिकारिक आंकड़े कब सामने आते हैं।
किसानों के लिए भी जरूरी है कि वे संभावित बीमा दावे की समयसीमा न चूकें और नुकसान का विवरण सुरक्षित रखें।
इस खबर का सबसे महत्वपूर्ण संदेश है—फसल खराब होने पर केवल मुआवजे की घोषणा का इंतजार न करें। संबंधित विभाग और, यदि फसल बीमित है, बीमा व्यवस्था को समय पर नुकसान की सूचना दें।
पाठकों के लिए आधिकारिक सहायता नंबर
किस काम के लिए | संपर्क |
|---|---|
फसल बीमा संबंधी शिकायत या नुकसान की सूचना | 14447 |
यूपी राज्य आपदा राहत नियंत्रण कक्ष | 1070 |
जिला आपदा हेल्पलाइन | 1077 |
