दिन में सपा में शामिल हुए सिनोद शाक्य, शाम को BJP की कार्यसमिति में आया नाम; यूपी की राजनीति में उठे सवाल

यूपी भाजपा की 712 सदस्यीय प्रदेश कार्यसमिति की सूची में पूर्व विधायक सिनोद शाक्य का नाम 88वें नंबर पर मिला, जबकि वह कुछ घंटे पहले ही अखिलेश यादव की मौजूदगी में समाजवादी पार्टी में शामिल हो चुके थे।

UP Politics: सपा में शामिल हुए सिनोद शाक्य का नाम उसी दिन भाजपा की कार्यसमिति सूची में सामने आया। जानिए पूरा मामला और 2027 चुनाव से पहले इसका राजनीतिक महत्व।

दिन में सपा में शामिल हुए सिनोद शाक्य, शाम को BJP की कार्यसमिति में आया नाम; यूपी की राजनीति में उठे सवाल

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सपा में शामिल हुए पूर्व विधायक सिनोद शाक्य का नाम भाजपा की कार्यसमिति सूची में सामने आया।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | लखनऊ/बदायूं | 27 अक्टूबर 2026
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दल संगठन को मजबूत करने में जुटे हैं। लेकिन भाजपा की नई प्रदेश कार्यसमिति की सूची ने एक ऐसा सवाल खड़ा कर दिया है, जिसकी चर्चा राजनीतिक गलियारों में तेज हो गई है।
बदायूं के पूर्व विधायक सिनोद कुमार शाक्य सोमवार, 26 अक्टूबर को समाजवादी पार्टी में शामिल हुए। उसी दिन शाम को भाजपा ने प्रदेश कार्यसमिति की सूची जारी की, जिसमें सिनोद शाक्य का नाम भी दर्ज था।
एक तरफ वह सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की मौजूदगी में पार्टी बदल चुके थे, दूसरी तरफ भाजपा की आधिकारिक संगठनात्मक सूची में उनका नाम दिखाई दिया।

खबर में खास

  • 26 अक्टूबर को सिनोद शाक्य समाजवादी पार्टी में शामिल हुए।
  • उसी शाम जारी भाजपा की सूची में उनका नाम 88वें नंबर पर था।

  • भाजपा ने कुल 712 सदस्यों, स्थायी आमंत्रित सदस्यों और विशेष आमंत्रित सदस्यों की घोषणा की।

  • 30 अक्टूबर से लखनऊ में प्रदेश कार्यसमिति की दो दिवसीय बैठक प्रस्तावित है।

अखिलेश यादव की मौजूदगी में सपा की सदस्यता

सिनोद कुमार शाक्य ने सोमवार को लखनऊ में समाजवादी पार्टी की सदस्यता ली। इस दौरान सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव मौजूद थे।
उनके साथ बिसौली के पूर्व विधायक कुशाग्र सागर समेत अन्य नेताओं ने भी समाजवादी पार्टी का दामन थामा।
सपा का यह सदस्यता अभियान ऐसे समय चल रहा है, जब उत्तर प्रदेश में 2027 के चुनाव को लेकर राजनीतिक दल नए नेताओं को अपने साथ जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं।

भाजपा की सूची में 88वें नंबर पर कैसे आया नाम?

26 अक्टूबर की शाम भाजपा ने प्रदेश कार्यसमिति की नई सूची जारी की। इसमें 548 कार्यसमिति सदस्य, 30 स्थायी आमंत्रित सदस्य और 134 विशेष आमंत्रित सदस्य शामिल थे।
दैनिक जागरण और आजतक की रिपोर्टों के मुताबिक, 548 सदस्यों वाली सूची में सिनोद कुमार शाक्य का नाम 88वें नंबर पर दर्ज था।
इससे सवाल उठा कि जिस नेता ने कुछ घंटे पहले ही भाजपा छोड़कर सपा का दामन थाम लिया, उसका नाम भाजपा की नई संगठनात्मक सूची में कैसे रह गया?
जनसत्ता की रिपोर्ट के अनुसार, मामला सामने आने के बाद सूची में संशोधन किया गया। हालांकि, प्रारंभिक सूची में नाम बने रहने के वास्तविक कारण पर भाजपा का स्पष्ट आधिकारिक स्पष्टीकरण उपलब्ध नहीं हुआ है।

कौन हैं सिनोद कुमार शाक्य?

सिनोद शाक्य बदायूं की दातागंज विधानसभा सीट से दो बार विधायक रह चुके हैं।
उन्होंने 2007 और 2012 के विधानसभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर जीत दर्ज की थी।
बाद में वह समाजवादी पार्टी से जुड़े। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान सपा से टिकट नहीं मिलने के बाद वह भाजपा में शामिल हो गए थे।
अब 2027 के चुनाव से पहले उन्होंने एक बार फिर समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया है।

2027 के चुनाव से पहले भाजपा के लिए क्या मायने?

भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक 30 और 31 अक्टूबर को लखनऊ में प्रस्तावित है। इस बैठक में आगामी विधानसभा चुनाव की संगठनात्मक तैयारियों पर चर्चा होने की उम्मीद है।
पार्टी की इतनी महत्वपूर्ण सूची में ऐसे नेता का नाम आना, जो उसी दिन दूसरी पार्टी में शामिल हो चुका हो, सूची तैयार करने और जारी करने की प्रक्रिया पर सवाल खड़े करता है।
हालांकि, यह भी संभव है कि सूची पहले तैयार की गई हो और बाद के राजनीतिक घटनाक्रम के अनुरूप उसे समय पर अपडेट नहीं किया जा सका हो। इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

सवाल सिर्फ एक नाम का नहीं, संगठन की तैयारी का भी

भाजपा और समाजवादी पार्टी दोनों 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी हैं। ऐसे समय में नेताओं का दल बदलना और संगठन में उन्हें जिम्मेदारी देना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो जाता है।
सिनोद शाक्य के मामले में तथ्य स्पष्ट हैं कि उनके सपा में शामिल होने के बाद भी भाजपा की जारी सूची में उनका नाम सामने आया।
अब सवाल यह है कि चुनाव की तैयारियों के बीच राजनीतिक दल अपनी संगठनात्मक सूचियों और नेताओं के बदलते रुख के बीच कितना प्रभावी तालमेल बना पा रहे हैं।

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