गोरखपुर AIIMS की निदेशक को जाना पड़ा प्राइवेट अस्पताल! अखिलेश ने योगी सरकार को घेरा, राजभर का पलटवार; 7 साल बाद भी कैथ लैब शुरू क्यों नहीं?
गोरखपुर AIIMS की कार्यकारी निदेशक डॉ. विभा दत्ता को हृदय संबंधी जांच के लिए निजी अस्पताल ले जाने पर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सवाल उठाए। मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने जवाब दिया, जबकि AIIMS प्रशासन ने बताया कि कैथ लैब का करीब 70 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है।
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UP Politics: गोरखपुर AIIMS में कैथ लैब नहीं होने पर अखिलेश यादव ने स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए। ओमप्रकाश राजभर ने उनके बयान का विरोध किया। AIIMS प्रशासन ने दिसंबर तक कैथ लैब शुरू होने की उम्मीद जताई है।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | गोरखपुर/लखनऊ | 31 अक्टूबर 2026
खबर में खास
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गोरखपुर AIIMS की कार्यकारी निदेशक डॉ. विभा दत्ता को हृदय संबंधी जांच के लिए निजी अस्पताल ले जाया गया।
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संस्थान में कैथ लैब अभी चालू नहीं होने के कारण यह कदम एहतियातन उठाया गया।
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अखिलेश यादव ने सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठाए।
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कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने 31 अक्टूबर को अखिलेश की आलोचना का जवाब दिया।
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AIIMS प्रशासन के अनुसार कैथ लैब का लगभग 70 प्रतिशत काम पूरा है।
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इसे दिसंबर 2026 तक शुरू करने की उम्मीद जताई गई है, लेकिन अभी सुविधा चालू नहीं हुई है।
गोरखपुर/लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर नया राजनीतिक विवाद सामने आया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह नगर गोरखपुर स्थित AIIMS की कार्यकारी निदेशक को हृदय संबंधी जांच के लिए निजी अस्पताल ले जाने की घटना पर समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सवाल उठाए हैं।
अब शनिवार, 31 अक्टूबर को प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने अखिलेश के बयान का विरोध करते हुए योगी सरकार की स्वास्थ्य सेवाओं का बचाव किया है।
हालांकि इस राजनीतिक विवाद के बीच सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि गोरखपुर AIIMS की अपनी कैथ लैब अभी चालू नहीं हो सकी है।
अखिलेश यादव ने AIIMS पर क्या सवाल उठाया?
अखिलेश यादव ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पर गोरखपुर AIIMS की निदेशक को निजी अस्पताल ले जाए जाने की खबर साझा की।
उन्होंने भाजपा सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि उसके शासन में AIIMS को भी इलाज की जरूरत पड़ रही है।
सपा अध्यक्ष ने इस घटना को सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति से जोड़ा। उनका सवाल था कि जिस बड़े चिकित्सा संस्थान में आम मरीज इलाज की उम्मीद लेकर आते हैं, वहाँ उसकी अपनी प्रमुख को विशेष जांच के लिए दूसरे अस्पताल क्यों जाना पड़ा?
अखिलेश की टिप्पणी के बाद यह मामला स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ राजनीतिक बहस का विषय बन गया।
ओमप्रकाश राजभर ने अखिलेश को क्या जवाब दिया?
शनिवार को समाचार एजेंसी ANI से बातचीत में ओमप्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव पर अनावश्यक आलोचना करने का आरोप लगाया।
राजभर ने कहा कि अखिलेश सरकार के दौरान बच्चों की स्वास्थ्य समस्याएँ गंभीर थीं, जबकि योगी सरकार ने पेयजल और सार्वजनिक स्वास्थ्य की स्थिति सुधारने के लिए काम किया है।
उन्होंने अखिलेश पर सरकार की उपलब्धियों को नजरअंदाज कर केवल सोशल मीडिया पर सवाल उठाने का आरोप भी लगाया।
हालांकि बच्चों की मृत्यु और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार को लेकर राजभर के व्यापक दावों की इस बयान के साथ कोई तुलनात्मक आधिकारिक सांख्यिकीय रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई। इसलिए इन्हें उनका राजनीतिक पक्ष माना जाना चाहिए।
निदेशक को निजी अस्पताल क्यों ले जाया गया?
एम्स की कार्यकारी निदेशक मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) डॉ. विभा दत्ता की बुधवार, 28 अक्टूबर को तबीयत बिगड़ी थी।
उन्हें पहले AIIMS गोरखपुर की इमरजेंसी में चिकित्सा सहायता दी गई, जहाँ उनकी स्थिति स्थिर हुई।
डॉक्टरों ने अतिरिक्त हृदय संबंधी मूल्यांकन की सलाह दी। संस्थान की कैथ लैब चालू नहीं होने के कारण उन्हें एहतियातन ऐसी निजी चिकित्सा सुविधा में ले जाया गया, जहाँ यह व्यवस्था मौजूद थी।
जांच में पेसमेकर लगाने की आवश्यकता नहीं पाई गई। AIIMS के अनुसार, उनकी स्थिति स्थिर है।
डॉ. दत्ता ने स्पष्ट किया कि निजी अस्पताल में उन्हें भर्ती नहीं किया गया था और वहाँ कोई उपचार प्रक्रिया नहीं हुई।
कैथ लैब क्या है और गोरखपुर AIIMS में क्यों नहीं है?
कैथ लैब विशेष चिकित्सा उपकरणों वाली ऐसी सुविधा है, जहाँ हृदय की रक्त वाहिकाओं की जांच और एंजियोग्राफी तथा एंजियोप्लास्टी जैसी प्रक्रियाएँ की जाती हैं।
AIIMS गोरखपुर में यह सुविधा अभी पूरी तरह कार्यरत नहीं है।
संस्थान के मुताबिक इसे शुरू करने का लगभग 70 प्रतिशत काम पूरा हो गया है। डॉ. विभा दत्ता ने बताया कि इसके लिए करीब ₹14–15 करोड़ के बजट को स्वीकृति मिली है और उपकरणों की व्यवस्था की जा रही है।
अस्पताल के एक वरिष्ठ डॉक्टर ने दिसंबर तक कैथ लैब शुरू होने की उम्मीद जताई है। यह अभी लक्ष्य है, निश्चित उद्घाटन तिथि नहीं।
पूर्वांचल के मरीजों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है सवाल?
गोरखपुर AIIMS में पूर्वी उत्तर प्रदेश और पड़ोसी बिहार के मरीज बड़ी संख्या में आते हैं।
जब तक संस्थान की अपनी कैथ लैब शुरू नहीं होती, तब तक ऐसी विशेष जांच या प्रक्रियाओं के लिए मरीजों को अन्य चिकित्सा केंद्रों की जरूरत पड़ सकती है।
इस घटना से अस्पताल की सभी स्वास्थ्य सुविधाओं के अनुपलब्ध होने का निष्कर्ष नहीं निकलता। लेकिन विशिष्ट हृदय चिकित्सा सेवाओं के विस्तार और उनकी समयसीमा को लेकर सवाल जरूर उठता है।
प्रत्यक्षदर्शी का सवाल: गोरखपुर AIIMS की कैथ लैब शुरू होने में हुई देरी के कारण और अब तक के निर्माण व उपकरण संबंधी कार्यों की प्रगति क्या सार्वजनिक की जानी चाहिए?
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