UP में सील अस्पतालों को नाम बदलकर फिर चलाने का आरोप! लखनऊ में बाबू हटाया, अधिकारी से चार्ज छीना; ब्रजेश पाठक ने 7 दिन में मांगी रिपोर्ट

लखनऊ, कानपुर और उन्नाव में सील अस्पतालों को नए नाम से संचालित कराने तथा कथित रिश्वतखोरी के मामले में स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई शुरू की है। तीन सदस्यीय जांच समिति एक सप्ताह में रिपोर्ट देगी।

UP Health Department News: सील अस्पतालों को नाम बदलकर दोबारा चलाने और रिश्वत मांगने के आरोपों पर ब्रजेश पाठक ने जांच के आदेश दिए। लखनऊ CMO कार्यालय से एक कर्मचारी हटाया गया और नर्सिंग होम नोडल अधिकारी से जिम्मेदारी वापस ली गई।

प्रत्यक्षदर्शी समाचार | लखनऊ | 31 अक्टूबर 2026
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लखनऊ, कानपुर और उन्नाव में सील अस्पतालों को दूसरे नाम से संचालित करने के आरोपों पर ब्रजेश पाठक ने एक सप्ताह में जांच रिपोर्ट मांगी।

खबर में खास

  • लखनऊ, कानपुर नगर और उन्नाव के स्वास्थ्य विभाग से जुड़े अधिकारियों-कर्मचारियों पर कथित रिश्वतखोरी के आरोप।
  • लखनऊ CMO कार्यालय में तैनात लिपिक संजीव को हटाकर इंदिरानगर स्थित प्रशिक्षण केंद्र से संबद्ध किया गया।

  • नर्सिंग होम के नोडल अधिकारी डॉ. एपी सिंह से जिम्मेदारी वापस ली गई और जांच का आदेश हुआ।

  • स्वास्थ्य महानिदेशालय स्तर पर तीन सदस्यीय जांच समिति गठित।

  • डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने एक सप्ताह में रिपोर्ट और आवश्यक कार्रवाई का प्रस्ताव मांगा।

  • कुछ निजी अस्पतालों को बंद करने के बाद उसी परिसर में दूसरे नाम से संचालित करने के आरोपों की भी जांच होगी।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर नया विवाद सामने आया है। लखनऊ, कानपुर नगर और उन्नाव में पहले से सील किए गए निजी अस्पतालों को नए नाम से संचालित कराने तथा इसके बदले कथित रूप से रिश्वत मांगने के आरोपों पर उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने जांच के आदेश दिए हैं।
मामले में कार्रवाई भी शुरू हो गई है। लखनऊ के मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय में तैनात एक लिपिक को उसके पद से हटाया गया है। वहीं नर्सिंग होम के नोडल अधिकारी से भी जिम्मेदारी वापस लेकर जांच शुरू की गई है।
शनिवार, 31 अक्टूबर को प्रकाशित अमर उजाला और लाइव हिन्दुस्तान की रिपोर्टों में इस कार्रवाई की पुष्टि की गई है।

सील अस्पतालों को दूसरे नाम से चलाने का क्या मामला है?

राजधानी लखनऊ में बड़ी संख्या में निजी अस्पताल संचालित हैं। इनमें कुछ अस्पतालों को स्वास्थ्य विभाग ने मानकों का पालन नहीं करने और अन्य अनियमितताओं के कारण बंद कराया था।
अब आरोप सामने आए हैं कि कुछ अस्पतालों को बंद किए जाने के बाद उसी परिसर में दूसरे नाम से संचालित किया गया।
अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, फैजुल्लागंज स्थित डेनियल हॉस्पिटल एंड ट्रॉमा सेंटर के परिसर में क्राउन हॉस्पिटल और ठाकुरगंज के ऑक्सीजन हॉस्पिटल के स्थान पर एवन हॉस्पिटल संचालित होने के आरोप हैं।
इसी प्रकार विभूतिखंड के अर्पण अस्पताल के स्थान पर धनवंतरी अस्पताल शुरू होने की जानकारी भी रिपोर्ट में दी गई है।
इन मामलों में पंजीकरण, स्वामित्व और संचालन की कानूनी स्थिति की स्वतंत्र जांच आवश्यक है।

लखनऊ CMO कार्यालय में किस पर कार्रवाई हुई?

मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने लखनऊ के CMO कार्यालय में तैनात लिपिक संजीव को हटाकर इंदिरानगर स्थित प्रशिक्षण केंद्र से संबद्ध कर दिया।
इसके अतिरिक्त नर्सिंग होम के नोडल अधिकारी डॉ. एपी सिंह से जिम्मेदारी वापस लेकर उनके खिलाफ जांच के आदेश दिए गए हैं।
नर्सिंग होम से संबंधित जिम्मेदारी डॉ. रवि पांडेय को सौंपी गई है।
हालांकि, इन प्रशासनिक कदमों से किसी कर्मचारी के खिलाफ रिश्वतखोरी का आरोप साबित नहीं होता। जांच के बाद ही संबंधित व्यक्तियों की जिम्मेदारी स्पष्ट होगी।

उन्नाव में ₹3.50 लाख मांगने का आरोप

उन्नाव के शेखपुर नरी स्थित उत्तम अस्पताल को नए नाम से संचालित कराने के लिए कथित रूप से ₹3.50 लाख मांगने का आरोप भी सामने आया है।
इससे संबंधित एक वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हुआ है।
हालांकि, वीडियो में दिखाई देने वाले स्वास्थ्य अधिकारी ने रिश्वत मांगने के आरोप को निराधार बताया है।
उन्नाव के CMO डॉ. ए.के. शर्मा ने कहा कि संबंधित अस्पताल अभी भी सील है और उसे नया लाइसेंस जारी करने की बात सही नहीं है।
जिलाधिकारी घनश्याम मीना ने वीडियो और आरोपों की जांच कराने के निर्देश दिए हैं।

ब्रजेश पाठक ने सात दिन में मांगी रिपोर्ट

उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख सचिव को मामले की गंभीरता से जांच कराने के निर्देश दिए हैं।
स्वास्थ्य महानिदेशालय स्तर पर गठित तीन सदस्यीय समिति लखनऊ, कानपुर नगर और उन्नाव से जुड़े आरोपों की पड़ताल करेगी।
समिति को एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट और दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई का प्रस्ताव शासन को उपलब्ध कराना है।
ब्रजेश पाठक ने कहा है कि जांच में दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

मरीजों की सुरक्षा पर क्यों उठे सवाल?

यह मामला केवल प्रशासनिक अनुमति या अस्पताल के नाम बदलने तक सीमित नहीं है।
यदि किसी निजी अस्पताल को निर्धारित मानकों के उल्लंघन के कारण बंद किया गया हो, तो उसके दोबारा संचालन से पहले आवश्यक अनुमति और सुविधाओं का सत्यापन जरूरी होता है।
ऐसे में जांच समिति के सामने सवाल होगा कि संबंधित अस्पतालों को किन कारणों से बंद कराया गया था, उनके नए पंजीकरण किस आधार पर हुए और क्या संचालन के लिए आवश्यक शर्तों का पालन हुआ।
फिलहाल किसी व्यापक भ्रष्टाचार नेटवर्क की पुष्टि नहीं हुई है।

अब आगे क्या होगा?

जांच समिति की रिपोर्ट के बाद संबंधित अस्पतालों के पंजीकरण, स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों की भूमिका और कथित रिश्वतखोरी के आरोपों पर अगली कार्रवाई स्पष्ट होगी।
इस बीच सरकारी स्तर पर कर्मचारी को हटाने और एक अधिकारी से जिम्मेदारी वापस लेने की कार्रवाई हो चुकी है।
प्रत्यक्षदर्शी का सवाल: किसी निजी अस्पताल को गंभीर अनियमितताओं पर बंद करने के बाद उसी भवन में दूसरे नाम से खोलने की अनुमति देने से पहले क्या उसकी पिछली जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जानी चाहिए?

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