UP चुनाव 2027: BJP के अंदर नाराजगी पर अमित शाह का बड़ा संदेश! बोले—‘गोमती में डालकर जाइए गुस्सा’, केशव मौर्य ने भी की खास अपील

लखनऊ में भाजपा कार्यसमिति के दौरान कार्यकर्ताओं की नाराजगी का मुद्दा उठा। अमित शाह ने व्यक्तिगत मतभेद छोड़कर एकजुट होने को कहा, वहीं डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने संगठन और जनप्रतिनिधियों के तालमेल पर जोर दिया।

UP BJP News: यूपी चुनाव 2027 से पहले अमित शाह ने नाराज भाजपा कार्यकर्ताओं से अपनी शिकायतें गोमती में डालकर चुनाव की तैयारी में जुटने को कहा। जानिए पार्टी के भीतर असंतोष की रिपोर्ट, MLC चुनाव नतीजों और केशव मौर्य की अपील का पूरा मामला।

प्रत्यक्षदर्शी समाचार | लखनऊ | 31 अक्टूबर 2026
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लखनऊ में भाजपा प्रदेश कार्यसमिति के दौरान अमित शाह ने कार्यकर्ताओं से आपसी नाराजगी छोड़कर एकजुट होने की अपील की।

खबर में खास

  • अमित शाह ने भाजपा कार्यकर्ताओं से निराशा और नाराजगी छोड़कर एकजुट होने की अपील की।
  • पार्टी के कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं की उपेक्षा से जुड़ी शिकायतें सामने आने की रिपोर्ट।

  • यूपी MLC चुनाव की 11 सीटों में भाजपा को 6 और सपा को 5 सीटें मिली थीं।

  • केशव प्रसाद मौर्य ने व्यक्तिगत मतभेद भुलाकर संगठन के साथ काम करने का संदेश दिया।

  • 2027 विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी और कार्यकर्ताओं के तालमेल पर जोर।
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले भारतीय जनता पार्टी के संगठन को लेकर एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लखनऊ में भाजपा प्रदेश कार्यसमिति की बैठक के दौरान कार्यकर्ताओं से अपनी नाराजगी और आपसी मतभेद भुलाने की अपील की है।
उनका यह संदेश ऐसे समय आया है, जब भाजपा के कुछ क्षेत्रीय नेताओं और कार्यकर्ताओं की ओर से संगठन और सरकार में पर्याप्त महत्व नहीं मिलने की शिकायतें सामने आने की खबरें हैं।
30 अक्टूबर को हुई बैठक में अमित शाह ने कार्यकर्ताओं से कहा कि उनके मन में जो भी निराशा या नाराजगी है, उसे लखनऊ से जाते समय गोमती नदी में डालकर जाएँ। उन्होंने सभी से एकजुट होकर अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटने का आह्वान किया। इस बयान की विस्तृत रिपोर्ट 31 अक्टूबर को सामने आई है।

आखिर भाजपा के कार्यकर्ताओं में नाराजगी की चर्चा क्यों?

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, अक्टूबर में पार्टी के भीतर हुई समीक्षा बैठकों के दौरान कुछ क्षेत्रीय नेताओं ने अपनी उपेक्षा की शिकायत की थी।
कुछ कार्यकर्ताओं की चिंता यह भी बताई गई कि दूसरे दलों से आने वाले नेताओं को संगठन में जिम्मेदारियां मिलने से लंबे समय से जुड़े कार्यकर्ताओं के सामने असहज स्थिति पैदा होती है।
हालांकि, इन शिकायतों को पूरे प्रदेश के भाजपा संगठन में व्यापक असंतोष का प्रमाण नहीं माना जा सकता। पार्टी के सभी पदाधिकारियों या कार्यकर्ताओं की राय एक जैसी होने की पुष्टि भी नहीं है।

अमित शाह ने नाराज कार्यकर्ताओं से क्या कहा?

गृह मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि कई बार किसी कार्यकर्ता की राजनीतिक अपेक्षाएं पूरी नहीं हो पातीं। कोई बड़ा पद चाहता है, लेकिन उसे दूसरी जिम्मेदारी मिलती है।
शाह ने कार्यकर्ताओं के योगदान को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि चुनाव में पार्टी की सफलता के लिए संगठन के लोग ही निर्णायक भूमिका निभाते हैं। उन्होंने नेताओं से व्यक्तिगत आकांक्षाओं से ऊपर उठकर काम करने की अपील की।
हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, शाह ने स्पष्ट किया कि केवल कोई एक नेता पार्टी को चुनाव नहीं जिता सकता, इसके लिए कार्यकर्ताओं की मेहनत जरूरी है।

केशव प्रसाद मौर्य ने भी दिया संदेश

प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने राजनीतिक प्रस्ताव पेश करते हुए कार्यकर्ताओं से व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाएं और आपसी मतभेद भुलाने की अपील की।
उन्होंने पार्टी के सांसदों, विधायकों और संगठन के पदाधिकारियों के बीच बेहतर तालमेल पर जोर दिया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी संगठन की विचारधारा और कार्यकर्ताओं के समर्पण को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी का उल्लेख करते हुए कहा कि राजनीतिक प्राथमिकताएं बदल सकती हैं, लेकिन पार्टी के आदर्श स्थिर रहते हैं।

MLC चुनाव के नतीजों का क्या संबंध?

हाल में उत्तर प्रदेश विधान परिषद की 11 सीटों पर हुए चुनावों में भाजपा ने छह और समाजवादी पार्टी ने पांच सीटें जीतीं।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में भाजपा के कुछ नेताओं के हवाले से कहा गया कि संगठन के भीतर निराशा चुनावी प्रदर्शन से संबंधित चिंताओं में शामिल थी।
हालांकि, चुनाव नतीजों के पीछे केवल कार्यकर्ताओं की नाराजगी को कारण मानना उचित नहीं होगा। उम्मीदवार, स्थानीय समीकरण और मतदान की प्रकृति जैसे अन्य पहलुओं की भी भूमिका हो सकती है।

क्या चुनाव से पहले भाजपा संगठन में बदलाव करेगी?

इंडियन एक्सप्रेस ने एक वरिष्ठ भाजपा पदाधिकारी के हवाले से बताया है कि पार्टी आने वाले सप्ताहों में नाराज कार्यकर्ताओं से संपर्क कर उनकी शिकायतें दूर करने का प्रयास करेगी।
इससे संकेत मिलता है कि संगठन के भीतर संवाद बढ़ाना चुनाव की तैयारियों का हिस्सा है। हालांकि, किसी बड़े पद परिवर्तन, नई नियुक्ति या संगठनात्मक फेरबदल की अलग आधिकारिक घोषणा इस बयान से नहीं हुई है।

2027 के चुनाव से पहले अब किस बात पर नजर?

भाजपा नेतृत्व ने संगठनात्मक एकजुटता पर जोर दिया है, जबकि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस भी अपने-अपने राजनीतिक मुद्दों पर सक्रिय हैं।
अब देखना होगा कि नाराज कार्यकर्ताओं से संवाद के लिए भाजपा कौन-से ठोस कदम उठाती है और जिलों तथा बूथ स्तर पर जनप्रतिनिधियों और संगठन के बीच तालमेल को किस तरह मजबूत किया जाता है।
सवाल यह है कि अमित शाह की अपील के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं की शिकायतों पर कौन-से व्यावहारिक फैसले सामने आएंगे?

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