आजम खान को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं, 16 नवंबर को हाईकोर्ट में सुनवाई; ED गिरफ्तारी पर सवाल कायम

जेल से रिहाई के तुरंत बाद ED की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका हाईकोर्ट भेजी गई। कपिल सिब्बल ने राजनीतिक प्रताड़ना का आरोप लगाया, सुप्रीम कोर्ट ने मामले के गुण-दोष पर राय नहीं दी।

आजम खान की ED गिरफ्तारी पर सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका इलाहाबाद हाईकोर्ट ट्रांसफर की। 16 नवंबर को सुनवाई होगी। जानिए अदालत का आदेश और कपिल सिब्बल की दलीलें।

प्रत्यक्षदर्शी समाचार | नई दिल्ली/लखनऊ | 5 नवंबर 2026
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समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान । सुप्रीम कोर्ट ने 5 नवंबर को ED की गिरफ्तारी के खिलाफ उनकी याचिका इलाहाबाद हाईकोर्ट ट्रांसफर कर दी।
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री आजम खान को गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट से तत्काल राहत नहीं मिली। अदालत ने उनकी प्रवर्तन निदेशालय (ED) की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका इलाहाबाद हाईकोर्ट ट्रांसफर कर दी। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच 16 नवंबर को मामले की सुनवाई करे और आजम खान की अंतरिम राहत की मांग पर विचार करे। इससे उनकी रिहाई का सवाल फिलहाल अनसुलझा है।

खबर में खास

  • सुप्रीम कोर्ट ने आजम खान की याचिका इलाहाबाद हाईकोर्ट भेजी।
  • 16 नवंबर को डिवीजन बेंच में सुनवाई कराने का निर्देश।
  • कपिल सिब्बल ने ED की गिरफ्तारी को राजनीतिक प्रताड़ना बताया।
  • अदालत ने गिरफ्तारी की वैधता पर अंतिम राय नहीं दी।
  • हाईकोर्ट में अंतरिम राहत की मांग पर भी विचार होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने आज क्या फैसला दिया?

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने आजम खान की याचिका पर विचार करते हुए कहा कि पहले हाईकोर्ट में मामला सुना जाना उचित होगा।
अदालत ने संबंधित रिकॉर्ड दो दिनों के भीतर इलाहाबाद हाईकोर्ट भेजने का निर्देश दिया। हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को मामला मुख्य न्यायाधीश के सामने रखने के लिए कहा गया, ताकि 16 नवंबर को डिवीजन बेंच सुनवाई कर सके।
सुप्रीम कोर्ट ने आजम खान को याचिका में संशोधन और अतिरिक्त दस्तावेज दाखिल करने की अनुमति भी दी।

जेल से रिहा हुए, फिर ED ने क्यों गिरफ्तार किया?

29 अक्टूबर को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को दोहरे पैन कार्ड मामले में जमानत दी थी। अदालत ने उनकी सजा निलंबित की, लेकिन दोषसिद्धि पर रोक नहीं लगाई।
31 अक्टूबर को रामपुर जेल से रिहाई के तुरंत बाद ED ने आजम खान को एक अलग मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार कर लिया।
यह मामला मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच से संबंधित है।
1 नवंबर को गाजियाबाद की विशेष PMLA अदालत ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा था। इसके बाद उन्होंने गिरफ्तारी और हिरासत आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।

कपिल सिब्बल ने क्या दलील दी?

आजम खान की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट में पक्ष रखा।
उन्होंने आरोप लगाया कि अन्य मामलों में जमानत मिलने के बाद ED की गिरफ्तारी का उद्देश्य आजम खान को जेल में बनाए रखना है।
सिब्बल ने मामले में पुराने घटनाक्रम और 2019 की FIR का हवाला देते हुए गिरफ्तारी के आधार पर सवाल उठाए। उन्होंने इसे राजनीतिक प्रताड़ना बताया।
यह बचाव पक्ष की दलील है। ED की कार्रवाई को दुर्भावनापूर्ण साबित करने वाला कोई अंतिम न्यायिक निष्कर्ष इस सुनवाई में नहीं दिया गया।

CJI ने कहा—दलील में दम हो सकता है, लेकिन...

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने संकेत दिया कि बचाव पक्ष की दलीलों में कुछ आधार हो सकता है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट इस स्तर पर कोई राय व्यक्त नहीं करना चाहता।
अदालत ने गिरफ्तारी को न तो अवैध घोषित किया और न ही उसकी वैधता पर अंतिम फैसला दिया।
मामले के सभी कानूनी प्रश्न हाईकोर्ट के विचार के लिए खुले रखे गए हैं।

16 नवंबर को क्या होगा?

अब इलाहाबाद हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच को ED की गिरफ्तारी और न्यायिक हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका पर विचार करना है।
आजम खान की तरफ से अंतरिम राहत की मांग भी रखी गई है। हालांकि सुनवाई तय होने का मतलब जमानत या रिहाई सुनिश्चित होना नहीं है।
2027 के विधानसभा चुनाव से पहले यह मामला इसलिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि आजम खान समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं और उनके वकीलों ने गिरफ्तारी के समय पर सवाल उठाए हैं।
अब सबसे महत्वपूर्ण बात 16 नवंबर की सुनवाई होगी। उसी के बाद स्पष्ट हो सकेगा कि आजम खान को कोई अंतरिम कानूनी राहत मिलती है या मामला आगे बढ़ता है।

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