SIR पर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई: राहुल गांधी-अखिलेश की याचिका पर नजर, चुनाव आयोग बोला—फॉर्म-6 नहीं बदला

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कामकाज को लेकर दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई सूचीबद्ध है। आयोग ने अदालत में जवाब देकर विपक्ष के आरोपों को खारिज किया है।

SIR और चुनाव आयोग के खिलाफ राहुल गांधी, अखिलेश यादव समेत विपक्षी नेताओं की याचिका पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई। जानिए विपक्ष की मांग और चुनाव आयोग का जवाब।

प्रत्यक्षदर्शी समाचार | नई दिल्ली | 27 अक्टूबर 2026
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SIR से जुड़े विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई सूचीबद्ध, चुनाव आयोग ने आरोपों पर अपना जवाब दाखिल किया।

खबर में खास

  • सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को SIR और चुनाव आयोग से संबंधित याचिकाएं सुनवाई के लिए सूचीबद्ध हैं।
  • राहुल गांधी, अखिलेश यादव और अन्य विपक्षी नेताओं ने आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।

  • याचिकाओं में मतदाता सूची से नाम हटाने, चुनावी रिकॉर्ड और आयोग की निर्णय प्रक्रिया से जुड़े सवाल हैं।

  • चुनाव आयोग का कहना है कि SIR के फैसले सर्वसम्मति से हुए और वैधानिक फॉर्म-6 में बदलाव नहीं किया गया।

  • उपलब्ध जानकारी में आज की सुनवाई का अंतिम न्यायिक आदेश अभी सामने नहीं आया है।

सुप्रीम कोर्ट में आज किस मामले की सुनवाई?

देश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चल रहे विवाद के बीच मंगलवार, 27 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई सूचीबद्ध है।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और अन्य विपक्षी नेताओं की संयुक्त याचिका भी संबंधित मामलों के साथ अदालत के समक्ष है।
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की तीन सदस्यीय पीठ इन मामलों पर सुनवाई करेगी।
इससे पहले 15 अक्टूबर को अदालत ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और अन्य चुनाव आयुक्तों को नोटिस जारी किया था
 

राहुल गांधी और विपक्ष ने क्या मांग रखी?

विपक्षी नेताओं ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया और पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं।
संयुक्त याचिका में आयोग के आंतरिक रिकॉर्ड की जाँच, मतदाताओं के नाम हटाने की प्रक्रिया की स्वतंत्र समीक्षा और संबंधित जानकारी सार्वजनिक करने जैसी मांगें की गई हैं।
याचिकाकर्ताओं ने यह भी सवाल उठाया है कि क्या मुख्य चुनाव आयुक्त ने कुछ फैसले अन्य चुनाव आयुक्तों की असहमति के बावजूद लिए थे।
संबंधित अन्य याचिकाओं में SIR की वैधानिकता को चुनौती देने और उसे रोकने की मांग भी की गई है। हालांकि अलग-अलग याचिकाओं की मांगों को एक जैसा नहीं माना जाना चाहिए।

चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में क्या जवाब दिया?

 
सोमवार, 26 अक्टूबर को चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर आरोपों का विरोध किया।
आयोग के अनुसार, विशेष गहन पुनरीक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिए गए थे। किसी एक अधिकारी ने अकेले निर्णय नहीं लिया।
आयोग ने यह भी कहा कि उसने वैधानिक फॉर्म-6 में कोई संशोधन नहीं किया है। उसका तर्क है कि ऐसा संशोधन करने का अधिकार केंद्र सरकार के पास है।
चुनाव आयोग ने SIR प्रक्रिया को कानूनी बताया है और विपक्ष के आरोपों को गलत आधार पर आधारित बताया है। यह आयोग का न्यायालय में प्रस्तुत पक्ष है, जिस पर अदालत को विचार करना है।

मतदाता सूची से नाम हटने का मुद्दा क्यों महत्वपूर्ण?

 
इस विवाद का प्रमुख पहलू यह है कि मतदाता सूची से किसी व्यक्ति का नाम हटाते समय निर्धारित कानूनी प्रक्रिया और सत्यापन का पालन किया जाए।
विपक्षी दलों ने दावा किया है कि पुनरीक्षण प्रक्रिया में मतदाताओं के नाम हटाने और रिकॉर्ड बदलने को लेकर शिकायतें सामने आई हैं।
दूसरी ओर चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने के लिए संबंधित निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी की प्रक्रिया और कानूनी प्रावधान लागू होते हैं।
दोनों पक्षों के दावों पर न्यायिक विचार जारी है। केवल शिकायत दर्ज होने से चुनावी गड़बड़ी सिद्ध नहीं होती

अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर नजर

इस मामले में अब अदालत की सुनवाई और अगले आदेश महत्वपूर्ण होंगे।
सुप्रीम कोर्ट के सामने आयोग की निर्णय प्रक्रिया, मतदाताओं के अधिकारों और निष्पक्ष चुनाव व्यवस्था से जुड़े कानूनी सवाल हैं।
फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि सुप्रीम कोर्ट ने आज SIR पर रोक लगा दी है या मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कोई अंतिम कार्रवाई कर दी है।
आज की सुनवाई का आदेश आने पर इस खबर को उसी के आधार पर अपडेट किया जाना चाहिए।

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