राहुल गांधी पर FIR की मांग हाईकोर्ट ने खारिज की! सिखों पर अमेरिका में दिए बयान को लेकर वाराणसी से प्रयागराज तक चला विवाद

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नागेश्वर मिश्रा की याचिका खारिज की; सितंबर 2024 के बयान पर शुरू हुआ मामला, 16 अक्टूबर को सुरक्षित रखा था फैसला।

राहुल गांधी को इलाहाबाद हाईकोर्ट से राहत मिली। अमेरिका में सिख समुदाय पर दिए बयान को लेकर FIR की मांग वाली याचिका खारिज हुई। जानिए वाराणसी से हाईकोर्ट तक का मामला।

प्रत्यक्षदर्शी समाचार | प्रयागराज | 5 नवंबर 2026
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राहुल गांधी के खिलाफ सिख समुदाय संबंधी टिप्पणी को लेकर FIR दर्ज कराने की मांग इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 5 नवंबर 2026 को खारिज कर दी।

खबर में खास

  • राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज कराने की मांग वाली याचिका खारिज।
  • न्यायमूर्ति विक्रम डी. चौहान की एकल पीठ ने सुनाया फैसला।
  • मामला सितंबर 2024 में अमेरिका में सिख समुदाय पर दिए बयान से जुड़ा।
  • वाराणसी की अदालत पहले भी FIR की मांग ठुकरा चुकी थी।
  • हाईकोर्ट के विस्तृत लिखित आदेश की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से जुड़े एक पुराने राजनीतिक विवाद में गुरुवार, 5 नवंबर को नया फैसला आया। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सिख समुदाय के संबंध में अमेरिका में दिए गए उनके बयान को लेकर FIR दर्ज कराने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी।
यह याचिका वाराणसी निवासी नागेश्वर मिश्रा और अन्य की ओर से दायर की गई थी। न्यायमूर्ति विक्रम डी. चौहान की एकल पीठ ने सुनवाई पूरी होने के बाद फैसला सुनाया।

राहुल गांधी ने अमेरिका में क्या कहा था?

विवाद सितंबर 2024 में राहुल गांधी की अमेरिका यात्रा के दौरान दिए गए बयान से शुरू हुआ था।
वर्जीनिया में भारतीय प्रवासियों को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने भारत में सिखों की धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर सवाल उठाए थे।
उन्होंने पगड़ी पहनने, कड़ा धारण करने और गुरुद्वारा जाने के अधिकार का उल्लेख किया था। राहुल गांधी ने इस मुद्दे को केवल सिख समुदाय नहीं, बल्कि सभी धर्मों की स्वतंत्रता से जोड़कर प्रस्तुत किया था।
उनके इस बयान पर राजनीतिक विवाद हुआ और शिकायतकर्ताओं ने इसे आपत्तिजनक बताते हुए कानूनी कार्रवाई की मांग की।

वाराणसी में क्यों दर्ज कराना चाहते थे FIR?

नागेश्वर मिश्रा और अन्य शिकायतकर्ताओं का आरोप था कि राहुल गांधी के बयान से देश में सिख समुदाय की धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर गलत संदेश गया।
शिकायतकर्ताओं ने आशंका जताई कि इस बयान का इस्तेमाल अलगाववादी तत्व प्रचार के लिए कर सकते हैं।
सारनाथ थाने में शिकायत के बाद मामला वाराणसी की अदालत पहुंचा।
28 नवंबर 2024 को मजिस्ट्रेट अदालत ने FIR दर्ज कराने की अर्जी खारिज कर दी थी। इसके बाद शिकायतकर्ताओं ने उस आदेश को चुनौती दी।

एक ही विवाद में पहले राहुल गांधी को क्यों नहीं मिली थी राहत?

मामले में जुलाई 2025 के दौरान निचली अदालत को शिकायत पर नए सिरे से विचार करने का निर्देश दिया गया था।
राहुल गांधी ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी, लेकिन सितंबर 2025 में उनकी याचिका खारिज हो गई।
इसके बाद वाराणसी की मजिस्ट्रेट अदालत ने मामले पर दोबारा विचार किया और अक्टूबर 2025 में FIR दर्ज कराने की मांग फिर ठुकरा दी।
इस बार शिकायतकर्ताओं ने उस नए आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी।

5 नवंबर को हाईकोर्ट ने क्या फैसला सुनाया?

हाईकोर्ट ने 16 अक्टूबर 2026 को सुनवाई के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
गुरुवार, 5 नवंबर को न्यायमूर्ति विक्रम डी. चौहान की पीठ ने शिकायतकर्ताओं की याचिका खारिज कर दी।
इससे संबंधित कार्यवाही में राहुल गांधी को राहत मिली है। हालांकि, अभी उपलब्ध रिपोर्टों में हाईकोर्ट के विस्तृत लिखित आदेश का पूरा तर्क सामने नहीं आया है।
इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि अदालत ने राहुल गांधी के सभी राजनीतिक बयानों को सही ठहरा दिया है या उन्हें हर संभावित कानूनी मामले से मुक्त कर दिया है।

राहुल गांधी ने आरोपों पर क्या सफाई दी थी?

राहुल गांधी ने निचली अदालत में दिए लिखित जवाब में शिकायत को राजनीति से प्रेरित बताया था।
उन्होंने कहा था कि वह सिख समुदाय सहित सभी धर्मों का सम्मान करते हैं और उनके बयान का उद्देश्य संबंधित समुदाय के अधिकारों तथा योगदान को रेखांकित करना था।
अब इस मामले में महत्वपूर्ण बात यही है कि हाईकोर्ट ने शिकायतकर्ताओं की मौजूदा याचिका खारिज कर दी है। आगे की कानूनी स्थिति विस्तृत आदेश और किसी संभावित नई न्यायिक कार्यवाही पर निर्भर करेगी।

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