UP BJP में अंदरूनी नाराजगी! पुराने कार्यकर्ता बोले—बाहर से आए नेताओं को पद, जमीन पर काम करने वाले नजरअंदाज; RSS तक पहुंची बात

2027 चुनाव से पहले वाराणसी और सुल्तानपुर की बैठकों में भाजपा कार्यकर्ताओं की नाराजगी सामने आई। संगठन में पदों के बंटवारे और प्रशासन से शिकायतों पर फीडबैक लिया गया।

UP Politics: भाजपा के पुराने कार्यकर्ताओं ने संगठन में कथित अनदेखी और दूसरे दलों से आए नेताओं को पद मिलने पर सवाल उठाए। RSS और BJP नेतृत्व ने फीडबैक लिया।

यूपी भाजपा में अंदरूनी नाराजगी! पुराने कार्यकर्ताओं की अनदेखी और बाहरी नेताओं को पद देने पर सवाल, RSS ने संभाला मोर्चा

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यूपी चुनाव 2027 से पहले भाजपा और RSS की संगठनात्मक बैठकों में कार्यकर्ताओं की शिकायतें सामने आईं।
प्रत्यक्षदर्शी समाचार | लखनऊ/वाराणसी | 28 अक्टूबर 2026
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले भारतीय जनता पार्टी के सामने संगठन को एकजुट रखने की चुनौती सामने आई है। वाराणसी और सुल्तानपुर में हुई भाजपा तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की संगठनात्मक बैठकों में कुछ पुराने कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों ने अपनी कथित अनदेखी, प्रशासनिक स्तर पर सुनवाई न होने और दूसरे राजनीतिक दलों से आए नेताओं को प्रमुख पद दिए जाने पर सवाल उठाए हैं।
28 अक्टूबर को प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक, भाजपा नेतृत्व अब कार्यकर्ताओं से फीडबैक लेकर संगठन के भीतर मौजूद असंतोष को कम करने की कोशिश कर रहा है।
इन बैठकों में केवल कार्यकर्ताओं की शिकायतें ही नहीं उठीं, बल्कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उनकी सरकार के खिलाफ समाजवादी पार्टी के राजनीतिक हमलों का प्रभावी जवाब नहीं देने को लेकर भी पार्टी के कुछ नेताओं की सक्रियता पर सवाल उठे।

खबर में खास

  • वाराणसी में भाजपा के पुराने कार्यकर्ताओं ने संगठनात्मक पदों के बंटवारे पर सवाल उठाए।
  • दूसरे दलों से भाजपा में आने वाले नेताओं को महत्वपूर्ण पद दिए जाने पर कुछ कार्यकर्ताओं ने आपत्ति जताई।

  • सुल्तानपुर की संघ परिवार की बैठक में थानों और सरकारी दफ्तरों में कार्यकर्ताओं की सुनवाई का मुद्दा उठा।

  • काशी और गोरखपुर क्षेत्रों की 133 विधानसभा सीटों से जुड़े संगठनात्मक कार्यों की समीक्षा हुई।

  • समाजवादी पार्टी के सोशल मीडिया हमलों का जवाब देने में भाजपा नेताओं की सक्रियता पर भी चर्चा हुई।

वाराणसी में नितिन नवीन के सामने उठी नाराजगी

8 अक्टूबर को वाराणसी में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने काशी क्षेत्र के पूर्व पदाधिकारियों के साथ संगठनात्मक बैठक की थी।
इस बैठक में पार्टी की राष्ट्रीय महासचिव स्मृति ईरानी, प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और प्रदेश सह-प्रभारी जगदीश पटेल भी मौजूद थे।
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, बैठक में एक नेता ने संगठन के भीतर जिम्मेदारियां देने के तरीके पर सवाल उठाए।
सूत्रों के मुताबिक, उस नेता की शिकायत थी कि दिल्ली और लखनऊ में वरिष्ठ नेताओं से संपर्क रखने वाले लोगों को संगठन में महत्वपूर्ण पद मिल जाते हैं, जबकि लंबे समय तक जमीन पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं को अपेक्षित जिम्मेदारी नहीं मिलती।
यह बैठक में सामने आई शिकायत थी, न कि भाजपा नेतृत्व की ओर से पदों के वितरण में अनियमितता स्वीकार किए जाने की आधिकारिक घोषणा।

दूसरे दलों से आने वालों को पद देने पर भी सवाल

बैठक में दल बदलकर भाजपा में शामिल हुए नेताओं को लेकर भी चर्चा हुई।
रिपोर्ट के अनुसार, एक नेता ने कहा कि चुनावी परिस्थितियों में दूसरी पार्टियों से आए लोगों को टिकट या मंत्री पद देना राजनीतिक जरूरत हो सकती है, लेकिन ऐसे नेताओं को संगठन के वरिष्ठ पदों पर बैठाने से पुराने कार्यकर्ताओं के लिए उनके साथ काम करना मुश्किल हो सकता है।
कुछ पदाधिकारियों ने वाराणसी क्षेत्र के मौजूदा विधायकों की जगह नए चेहरों को चुनाव मैदान में उतारने का सुझाव भी दिया।
हालांकि, किसी विधायक का टिकट काटने या नए उम्मीदवारों की सूची पर अंतिम निर्णय होने की पुष्टि नहीं हुई है।

सुल्तानपुर में RSS की बैठक, थानों में सुनवाई का मुद्दा

5 अक्टूबर को सुल्तानपुर में RSS के सह-सरकार्यवाह अरुण कुमार की अध्यक्षता में संघ परिवार की बैठक हुई थी।
इस बैठक में अमेठी के भाजपा नेता गोविंद सिंह चौहान ने सरकारी कार्यालयों और पुलिस थानों में कार्यकर्ताओं की सुनवाई को लेकर सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि यदि स्थानीय नेता सरकारी कार्यालयों में कार्यकर्ताओं को न्याय दिलाने में मदद नहीं कर पाते, तो कार्यकर्ताओं का उन पर भरोसा कैसे बना रहेगा।
चौहान ने द इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में भी संगठन में कार्यकर्ताओं की उपेक्षा न करने और नौकरशाही की कार्यप्रणाली में सुधार की जरूरत बताई।
यह समस्या नई नहीं है। सितंबर में प्रकाशित हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट में भी भाजपा के कुछ विधायकों और कार्यकर्ताओं ने पुलिस-प्रशासन के स्तर पर अपनी बात न सुने जाने की शिकायत की थी।

अखिलेश यादव के सोशल मीडिया हमलों का जवाब क्यों नहीं दे पा रहे नेता?

14 और 15 अक्टूबर को वाराणसी में भाजपा के विस्तारकों और क्षेत्रीय प्रभारियों की दो दिवसीय कार्यशाला आयोजित हुई।
इसमें काशी क्षेत्र की 71 और गोरखपुर क्षेत्र की 62 विधानसभा सीटों से जुड़ी संगठनात्मक तैयारियों पर चर्चा की गई।
बैठक में शामिल एक भाजपा नेता के हवाले से रिपोर्ट में बताया गया कि समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता अखिलेश यादव के सोशल मीडिया पोस्ट और राजनीतिक आरोपों को सक्रियता से फैलाते हैं।
इसके विपरीत भाजपा के कुछ विधायक और पदाधिकारी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तथा पार्टी पर लगाए गए आरोपों का जवाब देने में उतने सक्रिय नहीं दिखाई देते।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि बैठक में कुछ विधायकों की सोशल मीडिया गतिविधियों पर टिप्पणी हुई। कहा गया कि वे निजी परिचितों को जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हैं, लेकिन राजनीतिक आरोपों के जवाब में पर्याप्त सक्रियता नहीं दिखाते।
यह संगठनात्मक बैठक में जताई गई चिंता है। इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि भाजपा के सभी विधायक या पदाधिकारी निष्क्रिय हैं।

2024 के परिणाम के बाद संगठन पर बढ़ा ध्यान

उत्तर प्रदेश में 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा की सीटें 2019 की तुलना में काफी कम हो गई थीं।
2019 में भाजपा ने प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में से 62 सीटें जीती थीं, जबकि 2024 में यह संख्या घटकर 33 रह गई। दूसरी ओर समाजवादी पार्टी ने 2024 में 37 सीटें जीतकर राज्य में सबसे बड़ी लोकसभा पार्टी बनने में सफलता हासिल की।
उस चुनाव के बाद से भाजपा के भीतर जमीनी संगठन, कार्यकर्ताओं की भागीदारी और सरकारी प्रशासन से तालमेल की चर्चा लगातार होती रही है।
हालांकि, भाजपा के चुनावी प्रदर्शन में बदलाव के अनेक राजनीतिक कारण हो सकते हैं। केवल कार्यकर्ताओं की नाराजगी को हार का निश्चित कारण मानना सही नहीं होगा।

30 अक्टूबर की प्रदेश कार्यसमिति बैठक पर भी नजर

उत्तर प्रदेश भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक 30 अक्टूबर को लखनऊ में प्रस्तावित है।
28 अक्टूबर को प्रकाशित रिपोर्टों के मुताबिक, बैठक में योगी सरकार की उपलब्धियों, संगठन की तैयारियों और 2027 विधानसभा चुनाव के लिए राजनीतिक संदेश पर चर्चा होने की योजना है।
इससे पहले सामने आई कार्यकर्ताओं की शिकायतें इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं क्योंकि चुनाव अभियान चलाने में पार्टी का जमीनी संगठन बड़ी भूमिका निभाता है।
भाजपा के लिए एक तरफ सरकार की उपलब्धियों को मतदाताओं तक पहुंचाने की चुनौती है, तो दूसरी तरफ पुराने और नए नेताओं के बीच संगठनात्मक तालमेल बनाए रखना भी जरूरी होगा।

भाजपा नेतृत्व ने क्या कहा?

द इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, पार्टी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि बैठकों का उद्देश्य कार्यकर्ताओं की शिकायतें सुनना और उन्हें शांत करना था।
वहीं उत्तर प्रदेश भाजपा के प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने कहा कि वह संबंधित बैठकों में मौजूद नहीं थे, इसलिए उनके पास इसकी जानकारी नहीं है। रिपोर्ट में केंद्रीय नेतृत्व की ओर से प्रश्नों का जवाब नहीं मिलने की बात भी कही गई है।
इसलिए कार्यकर्ताओं की शिकायतों को पूरे भाजपा संगठन की आधिकारिक राय के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।

2027 से पहले भाजपा के सामने सबसे बड़ा संगठनात्मक सवाल

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा और समाजवादी पार्टी दोनों अपनी-अपनी संगठनात्मक ताकत बढ़ाने की तैयारी में हैं।
भाजपा के लिए महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या कार्यकर्ताओं से फीडबैक लेने की मौजूदा प्रक्रिया उनकी शिकायतों का समाधान करने में सफल होगी।
दूसरी ओर विपक्ष भाजपा की संगठनात्मक चुनौतियों को अपने राजनीतिक अभियान का विषय बना सकता है।
अब सवाल यह है कि 2027 के चुनाव से पहले भाजपा पुराने कार्यकर्ताओं की नाराजगी दूर कर पाएगी, या संगठन में पदों और जिम्मेदारियों को लेकर उठी शिकायतें उसके सामने चुनौती बनी रहेंगी?

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