विजय की सरकार गिराने के लिए ₹70 करोड़ का ऑफर? तमिलनाडु में विधायकों की खरीद-फरोख्त के आरोप, DMK-AIADMK का पलटवार

TVK मंत्री निर्मल कुमार ने विपक्ष पर सरकार अस्थिर करने की कोशिश का आरोप लगाया; एक विधायक ने ₹15 करोड़ की पेशकश का दावा किया, दोनों विपक्षी दलों ने आरोप नकारे।

तमिलनाडु में विजय की TVK सरकार के मंत्री ने विधायकों को ₹70 करोड़ तक देने का आरोप लगाया। DMK-AIADMK ने दावे खारिज किए। जानिए पूरा विवाद।

प्रत्यक्षदर्शी समाचार | चेन्नई | 5 नवंबर 2026
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तमिलनाडु के मंत्री निर्मल कुमार ने DMK और AIADMK पर TVK विधायकों को ₹60–70 करोड़ तक की पेशकश करने का आरोप लगाया है। विपक्षी दलों ने इन आरोपों का खंडन किया है।

खबर में खास

  • TVK मंत्री ने विधायकों को ₹60–70 करोड़ तक देने की कोशिश का आरोप लगाया।
  • मदुरै सेंट्रल के विधायक ने खुद को ₹15 करोड़ की पेशकश होने का दावा किया।
  • DMK और AIADMK ने आरोपों को खारिज किया।
  • जुलाई में कथित विधायक-खरीद मामले में आठ लोगों की गिरफ्तारी हुई थी।
  • 234 सदस्यीय विधानसभा में TVK अकेले बहुमत से नीचे है।
तमिलनाडु में मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की सरकार को लेकर नया राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है। सत्तारूढ़ तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) ने विपक्षी दलों DMK और AIADMK पर विधायकों को करोड़ों रुपये का लालच देकर सरकार अस्थिर करने की कोशिश का आरोप लगाया है।
4 नवंबर को राज्य के कानून एवं बिजली मंत्री आर. निर्मल कुमार ने दावा किया कि TVK विधायकों को पार्टी बदलने के लिए ₹60 से ₹70 करोड़ तक की पेशकश की जा रही है। गुरुवार, 5 नवंबर को इस मामले पर आई विस्तृत रिपोर्टों में सत्तापक्ष और विपक्ष के अलग-अलग दावे सामने आए हैं।

₹70 करोड़ की पेशकश का दावा किसने किया?

मदुरै में पत्रकारों से बातचीत करते हुए मंत्री निर्मल कुमार ने आरोप लगाया कि विधानसभा चुनाव के बाद से DMK और AIADMK से जुड़े लोग TVK विधायकों से संपर्क कर रहे हैं।
उनका कहना है कि कुछ मामलों में पुलिस कार्रवाई हुई है और कथित खरीद-फरोख्त से जुड़े पैसे के लेनदेन की जांच चल रही है।
निर्मल कुमार ने बेंगलुरु के रास्ते कथित हवाला लेनदेन का आरोप भी लगाया। हालांकि, ₹70 करोड़ की किसी विशेष पेशकश का स्वतंत्र दस्तावेजी प्रमाण अभी सार्वजनिक रिपोर्टों में उपलब्ध नहीं है।

एक विधायक ने भी लगाया ₹15 करोड़ का आरोप

मदुरै सेंट्रल से TVK विधायक मधार बदरुद्दीन ने दावा किया कि उन्हें विधानसभा में संभावित शक्ति परीक्षण के दौरान सरकार के खिलाफ मतदान करने के लिए ₹15 करोड़ की पेशकश की गई थी।
उन्होंने आरोप लगाया कि DMK और AIADMK मिलकर सरकार गिराने की कोशिश कर रहे हैं।
हालांकि, विधायक ने उन्हें संपर्क करने वाले व्यक्ति की पहचान सार्वजनिक नहीं की। उन्होंने बताया कि पार्टी नेतृत्व को इसकी जानकारी दे दी गई है।

विपक्ष का पलटवार—TVK पर ही खरीद-फरोख्त का आरोप

DMK ने मंत्री निर्मल कुमार के आरोपों का खंडन किया है।
पार्टी प्रवक्ता टीकेएस एलंगोवन ने सवाल उठाया कि विपक्ष को TVK विधायकों को खरीदने की क्या आवश्यकता है। उन्होंने उल्टा सत्तारूढ़ पार्टी पर दलबदल को बढ़ावा देने का आरोप लगाया।
एलंगोवन ने विधानसभा चुनाव के बाद AIADMK के छह विधायकों के इस्तीफा देकर TVK में शामिल होने का उदाहरण भी दिया।
AIADMK ने भी विधायक-खरीद के आरोपों से इनकार किया है। इस तरह दोनों पक्ष एक-दूसरे पर राजनीतिक जोड़तोड़ का आरोप लगा रहे हैं।

जुलाई में आठ लोगों की गिरफ्तारी का क्या मामला था?

जुलाई 2026 में पुलिस ने कथित विधायक-खरीद के एक पुराने मामले में आठ लोगों को गिरफ्तार किया था।
उस मामले में एक TVK विधायक को प्रस्तावित अविश्वास प्रस्ताव के दौरान सरकार के खिलाफ मतदान करने के लिए ₹35 करोड़ देने की कोशिश का आरोप था।
लेकिन पुराने मामले में गिरफ्तारी अपने आप वर्तमान ₹70 करोड़ वाले आरोप की पुष्टि नहीं करती। नए दावों की अलग जांच आवश्यक है।

क्या विजय की सरकार अल्पमत में है?

2026 के विधानसभा चुनाव में TVK ने 234 में से 108 सीटें जीती थीं। साधारण बहुमत के लिए 118 सदस्यों का समर्थन जरूरी है।
TVK ने कांग्रेस और अन्य सहयोगी दलों के समर्थन से सरकार बनाई। इसलिए TVK के पास अकेले बहुमत न होना और उसकी गठबंधन सरकार के पास सदन का विश्वास न होना दो अलग स्थितियां हैं।
13 नवंबर के आसपास एक और शक्ति परीक्षण की संभावनाओं पर चर्चा हो रही है, लेकिन उसकी आधिकारिक घोषणा की पुष्टि नहीं हुई है।

अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल क्या है?

फिलहाल ₹70 करोड़ की कथित पेशकश और ₹15 करोड़ वाले व्यक्तिगत आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
आगे तीन बातों पर निगाह रहेगी—क्या पुलिस नए आरोपों से जुड़े प्रमाण सार्वजनिक करती है, क्या कोई औपचारिक शिकायत या अदालती कार्रवाई होती है और क्या विधानसभा में शक्ति परीक्षण का प्रस्ताव आता है।
इन सवालों के जवाब ही तय करेंगे कि विवाद राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रहता है या किसी औपचारिक जांच और विधायी प्रक्रिया तक पहुंचता है।

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