‘10 साल में 12 बच्चे, एक घर में 132 लोग?’ SIR पर अमित शाह ने राहुल गांधी को दी खुली बहस की चुनौती

करनाल की रैली में गृह मंत्री ने मतदाता सूची की कथित गड़बड़ियों पर उठाए तीन सवाल; बोले—संसद में चर्चा को तैयार, सड़क पर बहस चाहिए तो हरियाणा में जगह चुनें।

अमित शाह ने करनाल में राहुल गांधी से SIR पर सवाल पूछे। 12 बच्चों, उम्र में बड़े बेटे और एक मकान में 132 लोगों के कथित मामलों का जिक्र करते हुए बहस की चुनौती दी।

प्रत्यक्षदर्शी समाचार | करनाल | 5 नवंबर 2026
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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 5 नवंबर 2026 को करनाल में SIR के मुद्दे पर राहुल गांधी से सवाल पूछे और सार्वजनिक बहस की चुनौती दी।

खबर में खास

  • अमित शाह ने मतदाता सूची में उम्र, परिवार और पते से जुड़ी कथित विसंगतियों के उदाहरण दिए।
  • राहुल गांधी को हरियाणा में सार्वजनिक बहस की चुनौती दी।
  • कहा—SIR पर चर्चा के लिए सरकार संसद का विशेष सत्र बुलाने को तैयार है।
  • कांग्रेस पर घुसपैठियों के नाम बचाने का आरोप लगाया।
  • कथित गड़बड़ियों और घुसपैठ संबंधी दावों की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई।
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच जारी राजनीतिक विवाद में गुरुवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नया मोर्चा खोल दिया। हरियाणा के करनाल में भाजपा की ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ पदयात्रा के समापन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने राहुल गांधी से मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों पर कई सवाल पूछे।
शाह ने 10 साल के वैवाहिक जीवन में 12 बच्चों, बेटे की उम्र पिता से अधिक होने और 600 वर्ग गज के एक मकान में 132 लोगों के नाम जैसे उदाहरण दिए। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग का काम मतदाता सूची में गलत प्रविष्टियों की जांच और सुधार करना है।

अमित शाह ने कौन-से तीन सवाल उठाए?

लाइव हिन्दुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, शाह ने मतदाता सूची में कथित विसंगतियों का उल्लेख करते हुए पूछा कि दस साल की शादी में 12 बच्चे कैसे हो सकते हैं, बेटा अपने पिता से उम्र में बड़ा कैसे हो सकता है और एक मकान में 132 लोगों की प्रविष्टियां कैसे हो सकती हैं।
उन्होंने इन उदाहरणों के जरिए कांग्रेस के SIR विरोध पर सवाल उठाए।
हालांकि, भाषण में बताए गए इन मामलों के संबंधित निर्वाचन क्षेत्र, मकान के पते और मूल मतदाता रिकॉर्ड का स्वतंत्र सत्यापन उपलब्ध नहीं है। इसलिए इन्हें अभी अमित शाह द्वारा लगाए गए आरोपों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

राहुल गांधी को सड़क पर बहस की चुनौती

समाचार एजेंसी UNI के अनुसार, शाह ने कहा कि यदि राहुल गांधी संसद के बजाय सड़क पर बहस करना चाहते हैं, तो हरियाणा का कोई भी चौराहा चुन सकते हैं।
उन्होंने चुनौती दी कि उस स्थान पर भाजपा युवा मोर्चा के अध्यक्ष उनसे बहस करने पहुंचेंगे।
शाह ने राहुल गांधी पर संसद में चर्चा के बजाय विरोध प्रदर्शन करने का आरोप भी लगाया। उनका कहना था कि लोकतंत्र में गंभीर सवालों पर बहस के लिए संसद प्रमुख मंच है।

क्या SIR पर संसद का विशेष सत्र बुलाया जाएगा?

गृह मंत्री ने दोहराया कि सरकार मतदाता सूची के पुनरीक्षण पर संसद का विशेष सत्र बुलाने के लिए तैयार है।
उन्होंने राहुल गांधी से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस संबंध में पत्र लिखने को कहा।
हालांकि, विशेष सत्र बुलाने की तैयारी जताना और उसकी तारीख आधिकारिक रूप से घोषित होना अलग बातें हैं। अभी इस बयान के आधार पर संसद के नए सत्र की निश्चित तारीख नहीं बताई जा सकती।

कांग्रेस पर घुसपैठियों को बचाने का आरोप

शाह ने आरोप लगाया कि विपक्ष मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के नाम पर अवैध घुसपैठियों को बचाने का प्रयास कर रहा है।
उन्होंने मतदाता सूची में मृत व्यक्तियों, स्थायी रूप से स्थानांतरित लोगों और एक से अधिक स्थानों पर दर्ज नामों की जांच का समर्थन किया।
लेकिन किसी मतदाता का नाम सूची में नहीं मिलना या सत्यापन में उपस्थित न होना, अपने आप उसके अवैध विदेशी नागरिक होने का प्रमाण नहीं है। इसके लिए अलग कानूनी और तथ्यात्मक जांच आवश्यक है।

विपक्ष और चुनाव आयोग का क्या पक्ष है?

कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल SIR की प्रक्रिया में पात्र मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटाए जाने की आशंका उठाते रहे हैं। वे चुनाव आयोग से अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।
दूसरी ओर चुनाव आयोग का घोषित उद्देश्य मतदाता सूची को अद्यतन करना और मृत, स्थानांतरित, दोहरी तथा अन्य अपात्र प्रविष्टियों की पहचान करना है। आयोग की प्रक्रिया में मतदाताओं को नाम जुड़वाने या गलत विलोपन पर दावा-आपत्ति दर्ज कराने का प्रावधान भी है।

करनाल से आगे क्यों बढ़ा राजनीतिक विवाद?

भाजपा के इस अभियान में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल और पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेता शामिल हुए।
शाह ने आज के भाषण में मतदाता सूची की कथित गड़बड़ियों को सीधे कांग्रेस की राजनीतिक आपत्तियों से जोड़ा।
अब महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि जिन विशिष्ट मतदाता प्रविष्टियों पर शाह ने सवाल उठाए, क्या उनके सत्यापित रिकॉर्ड सार्वजनिक होंगे? और क्या सरकार तथा विपक्ष SIR पर संसदीय या सार्वजनिक संवाद की दिशा में कोई औपचारिक कदम उठाएंगे?

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